मुंबई के चार्टर्ड एकाउंटेंट पी. एस. शेट्टी को आयकर विभाग ने जब कागजात समेत अधिकरियों के समक्ष उपस्थित होने का फरमान सुनाया तो वे चकित रह गए।
उनका चकित होना लाजिमी भी था, क्योंकि उन्हें जिस कंपनी के कागजात लेकर बुलाया गया था, वास्तव में शेट्टी उस कंपनी के अधिकृत ऑडिटर नहीं थे। तब उन्हें इस बात का पता चला कि उनके नाम व पेशे का गलत इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेज तैयार किया गया है।
उसके बाद शेट्टी ने इंस्टीटयूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) से संपर्क कर फर्जीवाड़े की जानकारी दी, साथ ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। बाद में पुलिस ने फर्जीवाड़ा करने वाली कंपनी के अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया।
सच तो यह है कि इस तरह के मामले केवल शेट्टी के साथ ही नहीं हुए हैं, बल्कि ऐसा फर्जीवाड़ा इन दिनों खूब हो रहा है। दरअसल, तेजी से विकास कर रही अर्थव्यस्था में कुशल सीए की मांग पिछले पांच सालों से काफी बढ़ गई है। ऐसे में कई लोग फर्जी सीए बनकर कंपनी को चूना लगा रहे हैं, वहीं सीए के प्रतिष्ठि पेशे को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। फर्जी चार्टर्ड एकाउंटेंट के पास कोई डिग्री नहीं होती है, बल्कि वे गलत नाम और फर्जी कागजात के सहारे सीए की बढ़ती मांग के अवसरों को भुनाते हैं और कंपनियों को झांसे में लेकर उन्हें चूना लगाते हैं।
कंपनी मामलों के मंत्री ने एक सवाल के जबाव में संसद में बताया कि अब तक करीब 240 फर्जी सीए के खिलाफ कार्रवाई की गई है। हालांकि आईसीएआई ने ऐसे लोगों की संख्या करीब 269 बताई है। आईसीएआई के पूर्व अध्यक्ष आर. भूपति का कहना है कि यह संख्या काफी कम है और फर्जीवाड़ा करने वालों की तादाद इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। उनके मुताबिक, आईसीएआई से वर्तमान में करीब 140,000 सीए जुड़े हुए हैं। ऐसे में फर्जी सीए की बताई गई संख्या मात्र एक फीसदी ही है।
आईसीएआई के उपाध्यक्ष उत्तम प्रकाश अग्रवाल का कहना है कि हमें पुलिस से सहयोग नहीं मिल पाता है। यही वजह है कि फर्जी सीए के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती है। उनका कहना है कि संस्था अपने सदस्यों पर तो नियंत्रण रख सकती है, लेकिन फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार इसके पास नहीं है। आर. भूपति का कहना है कि दो क्षेत्रों में फर्जीवाड़े की आशंका रहती है। बैंक और टैक्स विभाग के पास जमा करने वाले सर्टिफिकेट पर किया जाने वाला सीए का हस्ताक्षर।
इस बारे में आईसीआईसीआई बैंक से जब ई-मेल के जरिए पूछा गया कि उन्हें फर्जी सीए सर्टिफिकेट की समस्या का सामना करना पड़ता है, तो उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। आईसीएआई कर्नाटक, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की अदालतों में लंबित ऐसे 19 मामलों का अध्ययन किया, जिसके आधार पर कहा जा सकता है कि छोटे शहरों में फर्जीवाड़ा करने वाले आसानी से पकड़ में आ जाते हैं, क्योंकि वहां सीए की संख्या सीमित होती है।
सरकार ने चार्टर्ड एकाउंटेंट्स एक्ट में संशोधन किया है, जिसमें प्रावधान है कि फर्जीवाड़ा में पहली बार पकड़े जाने पर 5,000 से 1 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है, जबकि दूसरी बार ऐसा करते पकड़े जाने पर एक साल की सजा और दो लाख रुपये जुर्माना तक हो सकता है। इससे पहले एक्ट के मुताबिक, सजा का प्रावधान नहीं था और जुर्माना की राशि भी काफी कम थी।