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मेरा गांव, तेरा देश…

Last Updated- December 07, 2022 | 4:43 AM IST

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक छोटा सा गांव है गाह, जहां इन दिनों तेजी से विकास कार्य हो रहा है। वजह- यही वह गांव है, जहां भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का जन्म हुआ था।


दरअसल, पाकिस्तानी सरकार ने भारत से संबंध सुधारने की कवायद के मद्देनजर इस गांव को आदर्श गांव के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। यही नहीं, द एनर्जी रिसर्च इंस्टीटयूट की मदद से यहां सौर ऊर्जा संयंत्र के जरिए बिजली की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही सड़क और सिंचाई के साधन भी विकसित किए जा रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि पहले पाकिस्तानी सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया था। लेकिन जब भारत की ओर से परवेज मुशर्रफ के दिल्ली स्थित दरियागंज वाले पैतृक मकान को भारत सरकार की ओर व्यवस्थित व मरम्मत करने का काम शुरू किया गया, तो पाक स्थित उनके पैतृक गांव गाह का विकास भी शुरू कर दिया गया।

पाक में होने के बावजूद मनमोहन के पैतृक गांव के लोग भले ही इतने खुशनसीब हों लेकिन सभी भारतीय प्रधानमंत्रियों के पैतृक स्थानों के लोगों का नसीब इतना अच्छा नहीं रहा है, भले ही वे भारत में ही हों। अगर भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पैतृक स्थान को दरकिनार कर दिया जाए, जिनका पैतृक स्थान आनंद भवन हमेसा सरकार की आंखों का तारा रहा है, देश के अन्य प्रधानमंत्रियों के पैतृक स्थानों को इतनी तवज्जो कभी नहीं मिली।

मिसाल के तौर पर, मुगलसराय जिले का रामनगर लाल बहादुर शास्त्री का जन्म स्थल है, लेकिन सरकार ने यहां के विकास पर ध्यान नहीं दिया। शास्त्री जी की पुत्रवधू रामा शास्त्री ने बताया कि इस गांव में पावर ग्रिड का कार्यालय खोलने के अलावा, विकास के मद्देनजर यहां एक ईंट तक नहीं जोड़ी गई है। पीएम का पैतृक गांव होने के बावजूद यह उपेक्षित पड़ा है।

मुलायम सिंह सरकार ने 2004 में शास्त्री जी के घर को यादगार स्मारक बनाने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। शास्त्री जी के पुत्र व सांसद अनिल शास्त्री का कहना है कि हमारे इस पुराने घर में शास्त्री जी से जुड़ीं कई चीजें रखी हैं, जिसे देखने विदेशी पर्यटक तक आते हैं। इसी तरह,  पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का पैतृक गांव इब्राहिम पट्टी भी सरकारी उपेक्षा का दंश झेल रहा है।
(दिल्ली से सौभद्र चटर्जी)

First Published - June 10, 2008 | 12:28 AM IST

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