देश में एक बार फिर कोविड-19 के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन अपनी कोशिशों के बावजूद सरकार लोगों को टीके की एहतियाती तीसरी खुराक लेने के लिए राजी नहीं कर पाई है।
बिज़नेस स्टैंडर्ड के एक विश्लेषण में पाया गया है कि 23 जून तक पात्र लोगों में से 20 प्रतिशत से भी कम लोगों को एहतियाती खुराक दी गई है।
23 जून को दी गई 14 लाख खुराक में से 4,52,600 एहतियाती खुराक थी। इनमें से 1,00,000 से ज्यादा खुराक 18 से 59 आयु वर्ग वालों को और 3,52,084 खुराक 60 वर्ष तथा इससे अधिक आयु के लोगों के साथ-साथ अग्रिम पंक्ति और स्वास्थ्य कर्मियों को दी गई थी।
जहां एक ओर अग्रिम पंक्ति, स्वास्थ्य कर्मियों और 60 वर्ष से अधिक वाली श्रेणी को 3.83 करोड़ खुराक दी जा चुकी हैं, वहीं दूसरी ओर 18-59 आयु वर्ग में वृद्धि सीमित है, इस आयु वर्ग को मुश्किल से 44 लाख खुराक दी गई हैं। विश्लेषण से पता चलता है कि 18 से 59 आयु वर्ग वाली श्रेणी को दी गई एहतियाती खुराक में एक-चौथाई हिस्सा केवल तीन शहरों का ही है। इन 44 लाख खुराकों में से 10 लाख से अधिक खुराक दिल्ली, मुंबई और बेंगलूरु में दी गई हैं। 18 से 59 आयु वर्ग को दी जाने वाली एहतियाती खुराक में 70 प्रतिशत हिस्सा पांच राज्यों – बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा और पश्चिम बंगाल का रहा है। 27 प्रतिशत के साथ बिहार पहले स्थान पर रहा और इसके बाद दिल्ली और महाराष्ट्र का क्रमश: 15 प्रतिशत तथा 12.9 प्रतिशत योगदान रहा।
60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग, अग्रिम पंक्ति और स्वास्थ्य कर्मियों वाली श्रेणी में खुराक वितरण अधिक रहा, हालांकि तीन शहरों – दिल्ली, मुंबई और बेंगलूरु का दी गई खुराकों में केवल पांच प्रतिशत योगदान रहा।
राज्यवार तुलना से पता चलता है कि दी गई खुराकों में आंध्र प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र का हिस्सा 46 प्रतिशत रहा है। इसमें आंध्र प्रदेश की हिस्सेदारी 11.7 प्रतिशत थी। इसके बाद 9.7 प्रतिशत के साथ गुजरात का स्थान रहा।
देश में अब तक कोविड की तीसरी एहतियाती खुराक कुल आबादी में से केवल तीन प्रतिशत को ही दी गई है, जो दुनिया के 26 प्रतिशत औसत के मुकाबले काफी कम है।