देश का सबसे पुराना वित्तीय संस्थान आईएफसीआई विनिवेश की तैयारी में फिर से जुट गया है। इसके तहत संस्थान की 26 फीसदी हिस्सेदारी रणनीतिक साझेदार को बेचे जाने की योजना है।
सरकार के मुताबिक, विनिवेश की प्रक्रिया अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि इससे पहले भी इसके विनिवेश की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन आईएफसीआई प्रबंधन की ओर से प्रबंधन नियंत्रण सौंपे जाने से इनकार करने के कारण यह सौदा पूरा नहीं हो पाया था। सूत्रों के मुताबिक, नए सौदे के तहत रणनीतिक साझेदार को प्रबंधन की कुछ जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
संस्थान के अधिकारियों का कहना है कि विनिवेश प्रक्रिया बंद नहीं हुई थी, बल्कि उस पर काम चल रहा था। उनके मुताबिक, दिसंबर में इसके लिए बोली आमंत्रित की गई थी। जिसमें स्टरलाइट इंडस्ट्रीज और मार्गन स्टेनले ने प्रबंधन नियंत्रण की मांग की थी और इसके लिए 108 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से बोली लगाई थी।
सूत्रों का कहना है कि 2007 में आरक्षित मूल्य 107 रुपये प्रति शेयर रखने से कई बोलीदाताओं ने बोली में भाग नहीं लिया। जिन तीन कंपनियों ने बोली लगाई थी, उनमें से दो की बोली 107 रुपये प्रति शेयर से कम ही थी। कंपनी सूत्रों के मुताबिक, आरक्षित मूल्य 107 रुपये प्रति शेयर सेबी के फॉरम्यूला पर आधारित था, जिसके तहत बाजार में पिछले 6 माह या 6 हफ्तों में कंपनी के शेयर मूल्य का औसत निकाला जाता है।
हालांकि बाद में प्रबंधन नियंत्रण की जिम्मेदारी सौंपे जाने के मुद्दे पर सौदा पूरा नहीं हो पाया। सूत्रों का कहना है कि जब बोली की प्रक्रिया शुरू की गई थी, तब से लेकर अब तक कंपनी के शेयरों की कीमत में काफी गिरावट आ चुकी है। लेकिन दूसरा पहलू यह भी है कि इस दौरान आईएफसीआई का प्रदर्शन बेहतर रहा और पिछले वित्त वर्ष में कंपनी को 1022 करोड़ रुपये की कमाई हुई।
वहीं वित्त वर्ष 2008-08 की पहली तिमाही में कंपनी ने 151 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया। इससे कंपनी के बेहतर मूल्यांकन में मदद मिलेगी। सूत्रों का कहना है कि अगर सीमित मात्रा में प्रबंधन जिम्मेदारी सौंपने की बात आती है, तो स्टरलाइट फिर से विनिवेश प्रक्रिया में रुचि दिखा सकती है।
कवायद फिर शुरू
आईएफसीआई 26 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया में फिर जुटा
अक्टूबर से इसके शुरू होने की संभावना