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मंकीपॉक्स से घबराने की जरूरत नहीं

Last Updated- December 11, 2022 | 5:32 PM IST

केरल में मंकीपॉक्स के पहले मामले की पु​ष्टि होने के साथ ही राज्य सरकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय है कि अभी घबराने की जरूरत नहीं है और राज्य ने इसका फैलाव रोकने के लिए पहले ही पर्याप्त कदम उठाए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय है कि यह बीमारी कोविड जितनी घातक नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के पास उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जून के आखिर तक 50 देशों में पाए गए मंकीपॉक्स के 3,413 मामलों में से केवल एक ही मौत नाइजीरिया में हुई है। ब्रिटेन में सबसे ज्यादा 793 मामले दर्ज किए गए है। इसके बाद जर्मनी (521) का स्थान है।
सरकार के एक सूत्र के मुताबिक 15 से 20 लोग पहले से ही निगरानी में हैं, जिनमें 11 वे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने 12 जुलाई को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से तिरुवनंतपुरम की उड़ान में एक संक्रमित व्यक्ति के साथ यात्रा की थी। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद रोग के लक्षण सामने आने की अवधि लगभग 21 दिन होती है। दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर अरविंद कुमार आचरा ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि हालांकि यह कोविड की तरह संक्रामक नहीं है, लेकिन चिंता की एक वजह यह है कि यह वायरस कई तरह से फैलता है।
प्रो. आचरा मंकीपॉक्स पर निगरानी रखने के लिए केरल भेजे गए केंद्र सरकार के उच्च-स्तरीय दल का हिस्सा हैं। केरल में कोविड प्रबंधन समिति के सदस्य और तिरुवनंतपुरम के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के सहायक प्रोफेसर अनीश टीएस ने कहा, ‘मौजूदा मामले से आगे बढ़ने के आसार नहीं है, क्योंकि राज्य पहले ही सभी एहतियाती कदम उठा चुका है। कोविड के विपरीत वायरस के रूप बदलने (म्यूटेशन) की आशंका भी कम ही है।’
संक्रमित व्यक्ति को पहले कोल्लम के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था और बाद में उसे तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित कर दिया गया। केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने गुरुवार को कहा था कि वायरस को लेकर चिंता की कोई बात नहीं है और प्रभावित मरीज की हालत स्थिर है।
केरल में कोविड -19 के पहले तीन मामले भी देखे थे, जब 30 जनवरी, 2020 को वुहान से लौटने वाले भारत के तीन मेडिकल छात्र संक्रमित हो गए थे। 19 मई, 2018 को दक्षिण भारत में निपाह वायरस का पहला मामला भी केरल में ही दर्ज किया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की बीमारियों का सबसे पहले केरल में पता लगाए जाने की वजह शायद इसकी बेहतर निगरानी, अनिवासी भारतीय लोगों का अधिक घनत्व और चिकित्सा क्षेत्र में मानव संसाधनों की गुणवत्ता है। अनीश ने कहा कि ‘केरल के लोगों में जागरूकता अधिक है और ऐसी बीमारियों के प्रति प्रणाली संवेदनशील है। इसके अलावा अन्य राज्यों के विपरीत एनआरआई आबादी में से बड़ी संख्या में लोग विदेशों में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में काम कर रहे हैं। यही कारण है कि केरल में ऐसी बीमारियों की पहचान आसानी से हो जाती है।’इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, केरल के अध्यक्ष सैम्यूल कोशी ने कहा ‘यह कोविड की तरह नहीं है। केवल निकट संपर्क वाले लोग ही प्रभावित होते हैं। एक अन्य अच्छी बात यह है कि यह (उतना) घातक नहीं है। हमें सावधान रहना चाहिए और अन्य रोगों से पीड़ित लोगों को अतिरिक्त  ध्यान रखना चाहिए।’
केरल के पांच जिलों में विशेष अलर्ट जारी
केरल सरकार ने मंकीपॉक्स के प्रसार को रोकने के लिए शुक्रवार को पांच जिलों में विशेष अलर्ट जारी किया। यहां एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद, राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने कहा कि पांच जिलों- तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पत्तनमतिट्टा, अलप्पुझा और कोट्टायम में विशेष अलर्ट जारी किया गया है क्योंकि इन जिलों के लोगों ने संक्रमित व्यक्ति के साथ शारजाह-तिरुवनंतपुरम इंडिगो उड़ान में यात्रा की थी जो यहां 12 जुलाई को पहुंची थी। मंत्री ने कहा कि विमान में 164 यात्री और उड़ान दल के छह सदस्य मौजूद थे।
उन्होंने कहा कि उक्त सभी जिलों में पृथक-वास केंद्र स्थापित किए जाएंगे। मंत्री ने कहा कि संक्रमित व्यक्ति के बगल की सीटों पर बैठने वाले 11 लोग उच्च जोखिम संपर्क सूची में हैं। इसके अलावा मरीज के माता-पिता, एक ऑटो चालक, एक टैक्सी चालक और एक निजी अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ प्रमुख संपर्क सूची में हैं। 

First Published - July 15, 2022 | 11:52 PM IST

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