facebookmetapixel
रेट कट का असर! बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारीTest Post कैश हुआ आउट ऑफ फैशन! अक्टूबर में UPI से हुआ अब तक का सबसे बड़ा लेनदेनChhattisgarh Liquor Scam: पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ED ने किया गिरफ्तारFD में निवेश का प्लान? इन 12 बैंकों में मिल रहा 8.5% तक ब्याज; जानिए जुलाई 2025 के नए TDS नियमबाबा रामदेव की कंपनी ने बाजार में मचाई हलचल, 7 दिन में 17% चढ़ा शेयर; मिल रहे हैं 2 फ्री शेयरIndian Hotels share: Q1 में 19% बढ़ा मुनाफा, शेयर 2% चढ़ा; निवेश को लेकर ब्रोकरेज की क्या है राय?Reliance ने होम अप्लायंसेस कंपनी Kelvinator को खरीदा, सौदे की रकम का खुलासा नहींITR Filing 2025: ऑनलाइन ITR-2 फॉर्म जारी, प्री-फिल्ड डेटा के साथ उपलब्ध; जानें कौन कर सकता है फाइलWipro Share Price: Q1 रिजल्ट से बाजार खुश, लेकिन ब्रोकरेज सतर्क; क्या Wipro में निवेश सही रहेगा?Air India Plane Crash: कैप्टन ने ही बंद की फ्यूल सप्लाई? वॉयस रिकॉर्डिंग से हुआ खुलासा

आयातित एमआरएनए टीका लाने की योजना नहीं

Last Updated- December 11, 2022 | 6:31 PM IST

संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने की दर कम होने से कोविड-19 के प्रबंधन के मामले में भारत बेहतर ​​स्थिति में है। लेकिन कोविड-19 कार्यकारी समूह एनटीएजीआई के प्रमुख एन के अरोड़ा ने सोहिनी दास से बातचीत में कहा कि टीकाकरण का दायरा बढ़ाने के लिए नई और ल​क्षित संचार की रणनीति पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए आयातित एमआरएनए टीका लाने की कोई योजना नहीं है। पेश है प्रमुख अंश :

सार्स-कोव-2 के उभर रहे म्यूटेंट स्वरूप के लिहाज से टीकाकरण कवरेज की क्या भूमिका है?
वै​श्विक परिदृश्य के लिहाज से इस बात का पता लगाना मुश्किल है कि सार्स-कोव-2 वायरस में म्यूटेशन को किससे बढ़ावा मिलता है। विश्लेषकों के एक वर्ग का कहना है कि यह उन देशों से आ रहा है जहां टीकाकरण कम हुआ है। लेकिन यह बात सही नहीं लगती। अधिक टीकाकरण वाली आबादी में भी नए म्यूटेशन देखे गए हैं। वास्तव में कुछ वायरस का प्रभाव या प्रवृ​त्ति वि​भिन्न इलाकों में अलग-अलग देखा गया है। उदाहरण के लिए ओमीक्रोन का असर भारत के मुकाबले अमेरिका में कहीं ज्यादा दिखा। हालांकि वायरस और टीकाकरण की दर महत्त्वपूर्ण निर्णायक कारक हैं। अभी देश में संक्रमितों के अस्पताल में भर्ती होने की दर काफी कम है। लेकिन निगरानी रखना उतना ही महत्त्वपूर्ण है। आपको पता होगा कि हमने वायरस के स्वरूप का पता लगाने के लिए अपशिष्ट जल पर भी नजर रखनी शुरू की थी। जांच कराने की दर घटी है और लक्षण वाले कुछ लोग भी जांच कराने से परहेज करते हैं। हमें सामाजिक मेल-मिलाप के दौरान सजग रहने और कोविड अनुकूल व्यवहार करने और अगले छह से आठ महीनों तक ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है।
भारत में कोविड-19 टीकाकरण रणनीति का अगला चरण क्या है?
हमने ‘हर घर दस्तक’ अ​भियान बुधवार से फिर शुरू कर दिया है। हमारा स्पष्ट संकेत है कि सभी आयु वर्गों में टीकाकरण से बचे हुए लोगों को प्राथमिक खुराक के साथ एहतियाती खुराक देने की जरूरत है। टीकाकरण सुरक्षा का अहम उपाय है और यह काम भी करता है। हम जानते हैं कि इससे बीमारी गंभीर होने का जोखिम दूर होता है और मृत्यु दर भी नगण्य होती है। आने वाले दिनों
और हफ्तों में आप टीकाकरण के लिए सामाजिक जागरूकता और संचार की रणनीति में बदलाव देखेंगे। खास तौर
अ​भिभावकों में भरोसा बढ़ाएंगे कि टीके उनके बच्चों के लिए सुर​क्षित हैं। फिलहाल हमारा लक्ष्य 12 साल से ऊपर के सभी लोगों का टीकाकरण करने का है।
क्या कोविड टीका हमारे नियमित टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा बन जाएगा?
समय आने पर हम इस पर विचार करेंगे कि कोविड-19 टीके को हमारे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा बनाने की जरूरत है या नहीं। कम से कम हमने यह सीखा कि वयस्कों का टीकाकरण कैसे किया जा सकता है, इसलिए हम वयस्कों को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल कर सकते हैं। कुछ ऐसे टीके आ रहे हैं जिसे भ्रूण की सुरक्षा के लिए मां को दिया जा सकता है।
क्या बच्चों के लिए आयातित एमआरएनए टीका प्रयोग करने की कोई योजना है?
एमआरएनए टीके के कई प्रतिकूल असर सामने आए हैं। इससे दुनिया भर में हृदय की मांसपे​शियों में सूजन की ​शिकायतें आई हैं। अगर हम वै​श्विक एमआरएनए टीका लाते भी हैं तो इसे सभी बच्चों के लिए देना संभव नहीं होगा। स्वदेशी एमआरएन टीका लाने में देर हुई है। देखते हैं यह कब तक उपलब्ध होता है। इस समय कोर्बोवैक्स, कोवोवैक्स और को​वैक्सीन तीनों बहुत अच्छे और सुरक्षित टीके हैं।    
क्या हम बूस्टर खुराक लगाना जारी रखेंगे?
इस समय हम तीसरी खुराक 9 महीने बाद लगा रहे हैं। मुश्किल से 5 से 6 फीसदी ने बूस्टर खुराक लगवाई है। हमें इन लोगों का टीकाकरण पूरा करने दीजिए। हमारे पास बुनियादी ढांचे की कोई समस्या नहीं है। दिक्कत यह है कि अब लोग कुछ हद तक निश्चिंत हो गए हैं। जब हमें जरूरत पड़ेगी तो हम इस बारे में कोई फैसला लेंगे।
आगे निगरानी की रणनीति क्या है?
हम कोविड-19 और अन्य बीमारियों की निगरानी को स्थायी बनाने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि यह आखिरी महामारी नहीं है। इसे लंबे समय तक जारी रखने की कोशिश की जा रही है। इस समय इसका हर साल विस्तार किया जा रहा है, लेकिन इसे जन स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे का हिस्सा बनाने की योजना है। अगर कल कोई दवा प्रतिरोधी बैक्टरिया पैदा होता है तो हमारे पास इसकी निगरानी की व्यवस्था होगी। कोविड-19 की निगरानी के लिए बनाई गई प्रयोगशालाओं का नेटवर्क काम करता रहेगा। इन्साकॉग बना रहेगा और ये प्रयास केवल कोविड के लिए नहीं होंगे बल्कि आने वाले वर्षों में भी जारी रहेंगे।
टीकों के मिश्रण पर कोई फैसला लिया गया है?
टीकों के मिश्रण के असर के आकलन के लिए अध्ययन किए जा रहे हैं। अच्छे सबूत मिल रहे हैं, इसलिए हम इस पर आपसी संवाद जारी रखेंगे। इसे बंद करने का कोई विचार नहीं है।

क्या हम कोविड-19 संक्रमण के स्थानिक चरण में हैं?
हम तेजी से सामान्य हालात की तरफ बढ़ रहे हैं। सार्वजनिक स्थानों पर भीड़भाड़ कम नहीं है, लेकिन हमारे यहां गंभीर संक्रमण के मामले कम हैं। यही वजह है कि स्थितियां बेहतर नजर आने लगी हैं और हम आगे बढ़ रहे हैं। वर्ष 2021 की तीसरी और चौथी तिमाह में जीवन लड़खड़ा रहा था, लेकिन अब यह धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। हम सतर्क रहने और मास्क पहनने और हाथ धोने की आदत बनाए रखने के लिए कह रहे हैं। स्थानिक संक्रमण हर्ड इम्यूनिटी के जितना ही रहस्य एवं मिथक है। अगर वायरस अपना स्वरूप बदलता है तो हम कैसे स्थानिक संक्रमण और हर्ड इम्यूनिटी हासिल कर सकते हैं।

First Published - June 3, 2022 | 12:26 AM IST

संबंधित पोस्ट