अर्थव्यवस्था में आ रही मंदी का असर उद्योग जगत पर भी नहीं, बल्कि स्नातक छात्रों पर भी पड़ रहा है।
स्नातक की शिक्षा प्राप्त कर कॉलेजों से निकलने वाले छात्रों को नौकरी तलाशने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस बात का खुलासा एक्सेंचर की ओर से दुनियाभर कराए गए स्नातकों के सर्वे से हुआ।
सर्वे में भारत समेत आठ देशों के 2,468 छात्रों को शामिल किया गया, जिनमें 286 भारतीय स्नातकों को शामिल किया गया था। सर्वे से पता चला कि स्नातक होने के बाद करीब 87 फीसदी छात्र नौकरी की तलाश में जुट जाते हैं, लेकिन उनमें से केवल 15 फीसदी को ही रोजगार मिल पाता है।
यही नहीं, सर्वे से पता चला है कि अर्थव्यवस्था की मंद पड़ती रफ्तार से कई स्नातकों को कम वेतन वाली नौकरी से ही संतोष करना पड़ रहा है। सर्वे के मुताबिक, करीब 36 फीसदी स्नातकों को नौकरी पाने के लिए योग्यता से समझौता करना पड़ता है यानी योग्यता के मुताबिक नौकरी न मिल पाने का दंश झेलना पड़ता है।
31 फीसदी स्नातक खास दक्षता वाले क्षेत्रों में नौकरी हासिल करना चाहते हैं, जबकि उनमें से 25 फीसदी को ही ऐसे संगठन में नौकरी मिल पाती है, जबकि 24 फीसदी छात्रों को नौकरी के लिए शहर से बाहर का रुख करना पड़ता है।
सर्वे के मुताबिक, ज्यादातर भारतीय छात्र इंजीनियरिंग, कंप्यूटर और गणित में कैरियर बनाना चाहते हैं, वहीं टेक्नोलॉजीज कंसल्टिंग, कम्युनिकेशंस, इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर उनका पंसदीदा क्षेत्र है। सर्वे में शामिल करीब 46 फीसदी भारतीय स्नातकों का मानना है कि अर्थव्यवस्था में आ रही मंदी के चलते उन्हें नौकरी के लिए खासी जद्दोजहद करनी पड़ रही है, वहीं दुनियाभर के करीब 63 फीसदी स्नातक इससे इतेफाक रखते हैं।
टैलेंट एंड ऑर्गेनाइजेशन परफॉर्मेंस संस्था एक्सेंचर इंडिया के दीपक मालकनी का कहना है नई पीढ़ी के छात्र बेहतर और प्रतियोगी माहौल वाले संस्थानों में काम करना चाहते हैं। सर्वे से इस बात का भी पता चला कि ज्यादातर भारतीय छात्र स्नातक पूरा करने के तीन महीने के अंदर फुल टाइम नौकरी की चाह रखते हैं, वहीं करीब 53 फीसदी छात्र बिना किसी शिक्षा ऋण के अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं। यही नहीं, करीब 50 फीसदी भारतीय स्नातक हफ्ते में 40 घंटे से अधिक तक काम करने को तैयार रहते हैं, जबकि 41 फीसदी का मानना है कि संस्थान उनकी क्षमता का पूरी तरह से उपयोग नहीं कर पा रहा है।