भारत के प्रधानमंत्री की अगली सरकारी विदेश यात्रा पहले से कहीं ज्यादा सुखद और सुरक्षित होगी।
ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि अमेरिका सरकार ने भारत को उच्च गुणवत्ता और बेहद सुरक्षित माने जाने वाले वीआईपी एयरक्रॉफ्ट की आपूर्ति को हरी झंडी दिखा दी है। भारत ऐसे तीन विमानों की खरीद करेगा, जिनमें से एक की आपूर्ति जुलाई के अंत तक होने की संभावना है।
इस विमान में उच्च गुणवत्ता वाले संचार उपकरण, रडार और मिसाइल की चेतावनी देने वाले सैन्य उपकरण भी लगे होंगे। उल्लेखनीय है कि इस तरह की सुविधाओं से लैस विमान का उपयोग अमेरिकी राष्ट्रपति और उच्चाधिकारी बगदाद और काबुल की यात्रा के दौरान करते हैं।
गौरतलब है कि इस विमान के लिए अमेरिकी सरकार के ईयूए समझौते का भारत ने पुरजोर विरोध किया था, जिसमें इस बात का उल्लेख है कि अमेरिकी वायुसेना को उस मिलिट्री बेस में जांच की अनुमति दी जाए, जहां उस विमान को रखा जाना है। दरअसल, यूएस एयरफोर्स इस बात की जांच करेगी कि विमान में लगे अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किसी अन्य मकसद के लिए तो नहीं किया जा रहा है।
भारत ने समझौते में शामिल जांच और वैरिफिकेशन जैसे शब्द का विरोध किया था और इस बात की धमकी दी थी कि वह विमान की खरीद से अपना हाथ खींच सकता है। हालांकि रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इस इस मामले को सुलझा लिया गया है। इसके लिए रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी को वॉशिंगटन भेजा गया था ताकि वह इस समझौते पत्र में शामिल आपत्तिजनक शब्दों को बदलवा सकें। हालांकि इस सौदे के बारे में बोइंग इंडिया से जब संपर्क किया गया, तो उसने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
अमेरिका की ओर से भारत के प्रस्ताव को स्वीकार कर लेने के बाद भी अमेरिकी एयरफोर्स के पास यह अधिकार होगा कि वह इस बात की जांच कर सके कि हाईटेक उपकरणों का गलत उपयोग तो नहीं हो रहा है। रक्षा मंत्रालय के अधिकारी ने अमेरिकी अधिकारी को बताया कि भारत इन उपकरणों की सुरक्षा की गारंटी लेगा। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस 737-700 एयरक्रॉफ्ट को बोइंग और जनरल इलेक्ट्रिक ने मिलकर तैयार किया है, जिसे बोइंग बिजनेस जेट्स का नाम दिया गया है।
भारत को आपूर्ति किया जाने वाला वीआईपी 737 बीबीजे की ओर से तैयार किया गया 100 वां विमान होगा। इस विमान में एक कॉन्फ्रेंस रूम, लिविंग-कम-स्लीपिंग रूम, कम्युनिकेशन सेंटर और करीब 48 लोगों के बैठने की जगह होगी। पीएटीएस एयरक्रॉफ्ट निर्माता कंपनी भी इस तरह की सुविधाओं से लैस विमान बनाती है, जिसकी कीमत करीब 300 करोड़ रुपये है।
हालांकि इसमें सैन्य सुरक्षा उपकरण मौजूद नहीं होते हैं। भारत को आपूर्ति किए जाने वाले विमान में लार्ज एयरक्रॉफ्ट इन्फ्रा-रेड कांउटर मेजर्स लगे होंगे, जिससे किसी भी मिसाइल का पता तुरंत लगाया जा सकेगा। साथ ही विमान मिसाइल को गलत दिशा में भेजने में सक्षम भी होगा। विमान में जो संचार उपकरण लगे होंगे, उसे कोई डीकोड या जाम नहीं कर सकता है।