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ओमीक्रोन से जंग में बूस्टर खुराक असरदार होने का दावा

Last Updated- December 11, 2022 | 6:16 PM IST

ओमीक्रोन और इसका उप-स्वरूप पूरी दुनिया में तेजी से फैल रहा है। इसे देखकर टीका बनाने वाली लगभग सभी कंपनियों ने अपने-अपने कोविड-19 टीके सार्स-कोव-2 स्वरूप के खिलाफ असरदार होने का दावा शुरू कर दिया है।
रूस के गमालेया इंस्टीट्यूट ने आज दावा किया कि स्पूतनिक लाइट या स्पूतनिक वी की एक या दो बूस्टर खुराक ले ली जाएं तो ओमीक्रोन का संक्रमण होने पर भी अस्पताल में भर्ती होने की आशंका काफी कम हो जाती है। उसने कहा कि सिटी ​क्लिनिकल हॉ​स्पिटल और गमालेया नैशनल रिसर्च सेंटर ऑफ एपिडेमोलॉजी ऐंड माइक्रोबायोलॉजी के प्रतिनिधियों समेत रूसी वैज्ञानिकों की एक टीम ने अध्ययन में पाया है कि स्पूतनिक वी की दो खुराक के बाद इसकी एक बूस्टर खुराक (स्पूतनिक लाइट) लेने पर ओमीक्रोन के कारण अस्पताल में भर्ती होने की आशंका 97 फीसदी कम हो जाती है और दो बूस्टर खुराक लेने के बाद 99.4 फीसदी कम हो जाती है। स्पूतनिक वी की कम से कम एक खुराक लेने वाले मरीजों में यह 85.9 फीसदी असरदार है। यह अध्ययन मॉस्को में करीब 1,000 मरीजों पर किया गया।
इस बीच भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और भारत बायोटेक ने कहा कि कोवैक्सीन की एक बूस्टर खुराक लेने से कोरोनावायरस के डेल्टा और ओमीक्रोन (बीए.1.1 तथा बीए.2) स्वरूपों  के खिलाफ प्रतिरक्षा बढ़ जाती है। हालांकि इस अध्ययन की तुलनात्मक समीक्षा नहीं की गई है लेकिन सीरियन हैमस्टर (मनुष्य को होने वाली बीमारियों का अध्ययन इस जीव पर किया जाता है) को यह खुराक देने के बाद उसमें एंटीबॉडी प्रतिक्रिया देखी गई, वायरस का प्रभाव कम रहा और फेफड़ों की बीमारी भी कम गंभीर रही। इस अध्ययन के नतीजे कल बायोरेविक्स में प्रकाशित किए गए थे।
अध्ययन में कहा गया है, ‘डेल्टा संक्रमण के अध्ययन में हमने दो खुराकें लेने के बाद और तीन खुराकें लेने के बाद होने वाली प्रतिक्रिया देखी तो पाया कि बूस्टर यानी तीसरी खुराक लेने पर ज्यादा फायदा मिल रहा है। हालाकि दोनों में वायरस को बेअसर करने वाले एंटीबॉडी का स्तर तो लगभग एक जैसा था मगर बूस्टर खुराक लेने पर फेफड़ों की बीमारी कम गंभीर रही।’ टीका लेने वाले पशुओं के समूह में भी ओमीक्रोन से अधिक सुरक्षा पाई गई।
जून के पहले हफ्ते में हैदराबाद की बायोलॉजिकल ई ने कहा था कि कोविशील्ड या कोवैक्सीन की दो खुराक के बाद उसके टीके कोर्बेवैक्स की एक खुराक लेने पर कोरोनावायरस के ​खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता बहुत बढ़ जाती है। उसने कहा कि कोर्बेवैक्स की बूस्टर खुराक से ओमीक्रोन स्वरूप के ​खिलाफ एंटीबॉडी में काफी इजाफा देखा गया। कंपनी ने कहा कि कोविशील्ड की दो खुराक के बाद कोर्बोवैक्स की बूस्टर खुराक लेने वाले 91 फीसदी लोगों में ओमीक्रोन को बेअसर करने वाली एंटीबॉडी दिखीं और कोवैक्सीन के बाद कोर्बेवैक्स की बूस्टर खुराक लेने वाले 75 फीसदी लोगों में ये एंटीबॉडी मिलीं। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया अमेरिकी साझेदार नोवावैक्स के साथ ओमीक्रोन स्वरूप के लिए खास टीका लाने पर काम करने जा रही है, जो वुहान स्वरूप से विकसित किए गए मूल टीके से अलग होगा। दिसंबर में एस्ट्राजेनेका ने भी दावा किया था कि तीसरी बूस्टर खुराक से ओमीक्रोन के ​खिलाफ एंटीबॉडी के स्तर में उल्लेखनीय सुधार होता है।
इस हफ्ते की शुरुआत में मुंबई के स्थानीय निकाय के अ​धिकारियों ने बीए.4 उप-स्वरूप के तीन मामलों और बीए.5 के एक मामले की पु​ष्टि की थी। जनवरी के बाद से दुनिया भर में ओमीक्रोन स्वरूप के संक्रमण का प्रसार तेजी से हुआ है। इस बीच देश में एहतियाती खुराक की मांग काफी कम है और 18 से 59 आयु वर्ग में अब तक 1,79,079 एहतियाती खुराक ही दी गई हैं। हालांकि बूस्टर खुराक के मामले में वरिष्ठ नागरिकों की ​स्थिति थोड़ी बेहतर है।

First Published - June 16, 2022 | 12:34 AM IST

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