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सौर उपकरण के लिये PLI- 2 योजना से 1.4 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत होगी: R K Singh

Last Updated- December 11, 2022 | 3:18 PM IST

बिजली मंत्री  R K Singh ने बुधवार को कहा कि सौर विनिर्माण के लिये 19,500 करोड़ रुपये की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के दूसरे चरण से हर साल करीब 1.4 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में उच्च दक्षता के सौर पीवी मॉड्यूल्स पर राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिये 19,500 करोड़ रुपये के व्यय के साथ PLI योजना (दूसरा चरण) को मंजूरी दी गयी। इसका मकसद उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मोड्यूल में 65,000 मेगावॉट पैमाने की विनिर्माण क्षमता हासिल करना है। 

सरकार ने PLI- 2 के तहत दायरा बढ़ाया है क्योंकि घरेलू विनिर्माण क्षमता से निर्यात को भी गति मिलेगी। सौर मोड्यूल के लिये PLI-1 के तहत 4,500 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए थे। चूंकि देश सौर उपकरण का आयात कर रहा था, अत: यह मुख्य रूप से घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखकर लाया गया था। 

यहां अग्नि अभियान की शुरुआत के दौरान अलग से बातचीत सिंह ने कहा, ‘‘सौर मॉड्यूल के लिये पीएलआई-दो से घरेलू विनिर्माण को गति मिलने से 1.40 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत होगी। साथ ही इससे निर्यात के कारण प्रवाह (विदेशी मुद्रा) भी होगा।’’ पीएलआई योजना से यह अनुमान है कि पूर्ण और आंशिक रूप से एकीकृत, सौर पीवी मॉड्यूल की लगभग 65,000 मेगावॉट सालाना उत्पादन क्षमता स्थापित की जाएगी। योजना से प्रत्यक्ष रूप से करीब 94,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा। साथ ही इससे प्रत्यक्ष रूप से 1,95,000 तथा परोक्ष रूप से 7,80,000 रोजगार सृजित होंगे। 

मंत्री ने कहा कि पहले दौर में 8,700 मेगावॉट विनिर्माण क्षमता के लिये 4,500 करोड़ रुपये की PLI योजना लायी गयी थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी, 2022 को अपने बजट भाषण में पीएलआई-दो की घोषणा की थी। कुछ राज्यों में मुफ्त बिजली दिये जाने के बारे में उनके विचार के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा, ‘‘मैंने मुफ्त में बिजली देने के खिलाफ नहीं बोला है…अगर राज्य सरकारें बजट में घोषित सब्सिडी का भुगतान करती हैं, इसमें कोई समस्या नहीं है। आप सभी को मुफ्त बिजली दे सकते हैं। लेकिन राज्य सरकार को इसका भुगतान करना होगा।’’ 

उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों के ऊपर उनके वितरण कंपनियों का सब्सिडी मद में करीब 1.35 लाख करोड़ रुपये का बकाया है।

First Published - September 21, 2022 | 7:50 PM IST

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