प्राइवेट अस्पतालों का कहना है कि केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के तहत तय की गई दरों के हिसाब से मरीजों की भर्ती अव्यावहारिक हो जाएगी। पिछले सप्ताह स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से सीडीएचएस को लेकर एक अधिसूचना जारी की गई थी, जिस पर निजी क्षेत्र की यह प्रतिक्रिया आई है।
इस अधिसूचना में सीजीएचएस योजना के तहत पंजीकृत अस्पतालों में मरीजों की भर्ती की दरें बताई गई हैं। सीजीएचएस में 41 लाख लाभार्थी पंजीकृत हैं, जिनमें केंद्र सरकार के कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मचारी शामिल होते हैं। देश भर में सीजीएचएस योजना से करीब 2,000 अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेंटर शामिल हैं।
अधिसूचना में कहा गया है कि अस्पतालों को दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य पर 20 प्रतिशत छूट देनी होगी। प्रत्यारोपण के मामले में एमआरपी का 60 प्रतिशत लेना होगा, अगर वह प्रत्यारोपण सीजीएचएस में शामिल नहीं है। साथ ही रह मरीज के लिए 2 प्रतिशत बिल प्रॉसेसिंग शुल्क का भुगतान करना होगा। मेडिका ग्रुप आफ हॉस्पिटल्स के चेयरमैन आलोक रॉय ने कहा, ‘नई अधिसूचना की प्रमुख समस्या यह है कि दरें अभी भी 2014 वाली दिखाई गई हैं।
महंगाई को देखते हुए हम संशोधित दरों की मांग कर रहे हैं। अगर महंगाई दर को देखें तो पिछले 8 साल में हमारी लागत कम से कम 40 प्रतिशत बढ़ी है। हॉस्पिटल इंडस्ट्री के लिए यह गंभीर चिंता का विषय है।’रॉय ने कहा कि अस्पसालों को अधिकतम खुदरा मूल्य पर 20 प्रतिशत छूट देने को कहना व्यावहारिक नहीं है क्योंकि कुछ दवाओं में महज 10 प्रतिशत मुनाफा होता है।
वॉकहॉर्ट हॉस्पिटल्स की प्रबंध निदेशक जहाबिया खोराकीवाला ने कहा, ‘हमें परिचालन संबंधी कोई निर्देश नहीं दिया गया है कि दवाएं किस तरह खरीदी जाएं, लेकिन कहा गया है कि लाभार्थियों के लिए एक निश्चित पेशकश करनी होगी। साथ ही यह कहा गया है कि हम सीजीएचएस दरों के तहत जितने भुगतान का दावा करते हैं, उससे ज्यादा शुल्क मरीजों से नहीं ले सकते।’ उन्होंने एक और मसला उठाते हुए कहा कि मरीज कैंसर के इलाज के लिए अस्पताल से दवाएं ले सकते हैं, या सीजीएचएस से खरीद सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘अगर मरीज अस्पताल से ही दवा लेते हैं तो भुगतान के लिए दाखिल करने पर वह बिल स्वयं ही पूरी तरह से अस्वीकृत हो सकता है।’
मेडिकल इंप्लांट यानी किसी प्रत्यारोपण की स्थिति में अस्पताल एमआरपी का सिर्फ 60 प्रतिशत ले सकते हैं, अगर पव इंप्लांट सीजीएचएस में उल्लिखित नहीं है। रॉय ने कहा, ‘हम हर मरीज को दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य पर 20 प्रतिशत छूट दें, उसके बाद इंप्लांट की लागत के 40 प्रतिशत का बोझ उठाएं और साथ में प्रॉसेसिंग शुल्क का भी भुगतान करें। हम मरीजों से इसके लिए अतिरिक्त पैसे नहीं ले सकते, ऐसे में सीजीएचएस के तहत मरीजों की भर्ती करना अव्यावहारिक हो जाएगा।’