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आर या पार

Last Updated- December 07, 2022 | 10:03 AM IST

परमाणु करार पर कांग्रेस और वाम दलों के बीच आर-पार की घड़ी नजदीक आ गई है।


चारों वाम दलों ने मंगलवार को भारत-अमेरिका असैनिक परमाणु करार के मुद्दे पर केन्द्र की यूपीए सरकार से बुधवार को अपना समर्थन वापस लेने की घोषणा कर दी।

हालांकि दिनभर चले कई नाटकीय घटनाक्रमों के तहत जहां सपा ने भी इसके तुरंत बाद सरकार को हर हाल में बचाने का ऐलान का भी कर दिया, वहीं कांग्रेस ने कहा कि वाम दलों के समर्थन वापस ले लेने के बावजूद उसकी सरकार को कोई खतरा नहीं है। दूसरी ओर विपक्षी खेमे यानी एनडीए ने भी नए घटनाक्रमों के मद्देनजर एक आपात बैठक बुलाने की घोषणा कर दी। 

इस राजनीतिक ड्रामे की शुरुआत हुई माकपा, भाकपा, आरएसपी और फारवर्ड ब्लॉक के नेताओं की माकपा मुख्यालय में लगभग एक घंटे तक चली बैठक के बाद माकपा महासचिव प्रकाश करात के समर्थन वापसी के ऐलान के बाद। उन्होंने कहा कि वाम दल बुधवार को राष्ट्रपति से समय मांगकर उन्हें समर्थन वापसी के बारे में अपना पत्र सौंप देंगे।

समर्थन वापसी की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि जब इस महीने की 10 तारीख को परमाणु करार पर यूपीए और वाम दलों की समिति की बैठक बुलाई गई थी तो इससे पहले ही विदेश दौर में प्रधानमंत्री ने यह बयान जारी कर कि सरकार जल्द आईएईए में जाएगी, प्रस्तावित बैठक को निरर्थक साबित कर दिया है। अब ये सभी दल यह मांग करेंगे कि सरकार जल्द से जल्द सदन के पटल पर अपना बहुमत सिध्द करे। वाम दलों की इस घोषणा के साथ ही यूपीए के साथ उसके साढ़े चार साल पुराने रिश्ते का अंत हो गया।

बहरहाल, वाम दलों के इस तलाक के तुरंत बाद ही मुलायम सिंह यादव नीत समाजवादी पार्टी ने भी आनन-फानन में परमाणु करार पर कांग्रेस का हाथ थामने का ऐलान कर दिया। पार्टी ने कहा कि वह सदन में सरकार को बचाने के लिए मतदान करेगी। मुलायम सिंह यादव की अध्यक्षता में बुधवार को यहां हुई बैठक में यादव को आश्वस्त किया गया कि संसदीय दल एकजुट होकर समर्थन करेगा।

First Published - July 9, 2008 | 12:53 AM IST

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