कांग्रेस ने कथित धनशोधन के मामले में राहुल गांधी की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष पेशी को लेकर सोमवार को केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया और आरोप लगाया कि उसने जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करके देश में आतंक फैला दिया है। मुख्य विपक्षी दल ने यह दावा भी किया कि राहुल गांधी की ईडी के समक्ष पेशी पर पार्टी के ‘सत्याग्रह’ को रोकने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने नई दिल्ली इलाके में ‘अघोषित आपातकाल’ लगा दिया। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के समर्थन में मार्च निकाला जिसके बाद पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में ले लिया।
कांग्रेस के मार्च और ‘सत्याग्रह’ को देखते हुए पुलिस ने ‘24 अकबर रोड’ (कांग्रेस मुख्यालय) जाने वाले कई रास्तों पर अवरोधक लगा दिए थे और इलाके में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 लागू कर दी थी। इसको लेकर कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस कार्यालय के निकट सिर्फ बुल्डोजर नहीं दिख रहा है। एपीजे अब्दुल कलाम रोड स्थित ईडी मुख्यालय तक जाने के लिए राहुल गांधी कांग्रेस मुख्यालय से पैदल निकले और इस मौके पर उनके साथ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता एवं कार्यकर्ता भी थे।
पुलिस ने मार्च शुरू होने के कुछ देर बाद कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को रोक लिया और उन्हें हिरासत में ले लिया। बाद में राहुल गांधी गाड़ी में सवार होकर ईडी मुख्यालय पहुंचे। कांग्रेस के अनुसार गहलोत, पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला, वरिष्ठ नेता हरीश रावत, जयराम रमेश और कई अन्य नेताओं को हिरासत में ले लिया गया। बाद में प्रियंका गांधी ने तुगलक रोड थाने पहुंचकर हिरासत में लिए गए पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि पुलिस के साथ हुई धक्कामुक्की के चलते वेणुगोपाल की तबियत बिगड़ गई थी और उन्हें सांस लेने में थोड़ी दिक्कत होने लगी थी, हालांकि बाद में उनकी सेहत में सुधार हुआ। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि हिरासत में लिए गए नेताओं को पुलिस ने छोड़ दिया। राहुल गांधी से पूछताछ के दौरान ही अशोक गहलोत, भूपेश बघेल और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ईडी कार्यालय के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में सरकार पर तीखा हमला बोला और सरकार पर प्रतिशोध की राजनीति करने का आरोप लगाया। गहलोत ने कहा, ‘राहुल गांधी जी को सुबह से बैठाकर रखा है, उन्होंने क्या गलत किया है? उन्होंने सिर्फ अखबार को कर्ज दिया, इसमें कुछ भी गलत नहीं है…इस कंपनी (यंग इंडियन) से सोनिया गांधी जी और राहुल गांधी जी एक रुपया नहीं ले सकते। इसमें कोई लाभ नहीं ले सकता। यह सब प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और एजेंसियों को अच्छी तरह मालमू है।’ उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘सत्ता में बैठे लोगों के लिए देश में प्रतिपक्ष नहीं है। सोनिया गांधी जी समेत 13 दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री से अपील की थी कि वह अहिंसा का माहौल बनाने की अपील करें, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया। आज देश में दंगे हो रहे हैं, बुल्डोजर चलाने का नाटक हो रहा है।’
गहलोत ने आरोप लगाया कि ‘इस सरकार ने पूरे देश में आतंक मचा रखा है। कई अधिकारी कहते हैं कि हमारी मजबूरी है।’ बघेल ने कहा, ‘विपक्ष के नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों का लगातार दुरुपयोग किया जा रहा है। पिछले आठ वर्षों में भाजपा और उसके समर्थक दलों के नेताओं के खिलाफ एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया है।’
‘कांग्रेस और करप्शन का गहरा याराना’ : नकवी
केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने सोमवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी की प्रवर्तन निदेशालय के समक्ष पेशी को लेकर विपक्षी दल के नेताओं का विरोध प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि ‘कांग्रेस और करप्शन (भ्रष्टाचार) का गहरा याराना है।’ उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में यह भी कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ तो देश ने सत्याग्रह देखा है, लेकिन भ्रष्टाचार के पक्ष में सत्याग्रह की ‘कांग्रेस की सियासी संस्कृति’ देश पहली बार देख रहा है। वरिष्ठ भाजपा नेता नेता ने कहा कि ‘परिवार पर एलिगेशन’ (परिवार पर आरोप) और ‘पार्टी का एजिटेशन’ (पार्टी का आंदोलन) इस बात का प्रमाण है कि ‘कांग्रेस और करप्शन का कितना गहरा याराना है।’