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दुर्लभ खनिजों की किल्लत से जूझ रहा वाहन उद्योग, भारत बनाएगा आत्मनिर्भर सप्लाई चेन

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भारत में वाहन उद्योग को दुर्लभ खनिजों की चीन से आपूर्ति में बाधा का सामना, सरकार उद्योग संघों के साथ मिलकर समाधान तलाशने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।

Last Updated- June 15, 2025 | 10:26 PM IST
H. D. Kumaraswamy
केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच डी कुमारस्वामी | फाइल फोटो

चीन से दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति बाधित होने से भारत का वाहन उद्योग मुश्किल दौर से गुजर रहा है। मगर केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच डी कुमारस्वामी का कहना है कि भारत सरकार इस मामले का जल्द समाधान निकालने के लिए उद्योग संघों के साथ मिलकर काम कर रही है। उन्होंने दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति में आई बाधा सहित विभिन्न मसलों पर पूजा दास के साथ बातचीत की। प्रमुख अंशः

भारतीय आयातकों की शिकायत है कि भारत द्वारा लगभग 40 प्रमाणपत्रों को हरी झंडी दिए जाने के बावजूद चीन दुर्लभ मैग्नेट के आयात की अनुमति नहीं दे रहा है। भारत इस मसले पर चीन से कैसे बात कर रहा है?

भारत सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और जल्द समाधान खोजने के लिए उद्योग संघों से बातचीत कर रही है। इस कठिन परिस्थिति से निपटने के लिए वाहन उद्योग में पर्याप्त क्षमता है।   

इस्पात और एल्युमीनियम पर अमेरिका द्वारा शुल्क दोगुना करने से भारत से धातु का निर्यात बाधित हो सकता है। इसका हमारे निर्यातकों पर क्या असर होगा?

भारत ने वित्त वर्ष 2025 में अमेरिका को 1.65 लाख टन तैयार इस्पात का निर्यात किया, जो हमारे कुल उत्पादन का लगभग 0.1 प्रतिशत है। इसे देखते हुए भारत पर इसका सीधा असर बहुत मामूली होगा। मगर भारत सरकार अमेरिकी शुल्कों के परोक्ष प्रभावों पर काफी सतर्क है क्योंकि इस्पात निर्यात करने वाले देश अपना अधिशेष उत्पादन दूसरे बाजारों में भेज सकते हैं। इससे मुकाबला बढ़ जाएगा और दुनिया भर में कीमतों पर इसका असर होगा। भारत अमेरिका के साथ इस मसले पर बातचीत कर रहा है। 

यूरोपीय संघ की सीबीएएम को भारत और अन्य विकासशील देशों के लिए बड़ा संकट बताया जा रहा है। क्या भारत एफटीए पर जारी बातचीत में स्थानीय एमएसएमई और कार्बन उत्सर्जन रोकने में परेशानी झेलने वाले क्षेत्रों के लिए रियायत चाह रहा है?

भारत इन क्षेत्रों की चिंता दूर करने के लिए यूरोपीय संघ से लगातार बातचीत कर रहा है। हमारा पूरा प्रयास है कि सीबीएएम के तहत इस समस्या का जल्द समाधान निकले। मौजूदा एफटीए चर्चा में हम एक निश्चित अवधि, समझौते के बाद नई व्यवस्था की तरफ कदम बढ़ने के पारदर्शी तरीकों पर जोर दे रहे हैं और कार्बन उत्सर्जन कम करने में भारत के प्रयासों का एहसास करा रहे हैं। उद्योग जगत की प्रतिस्पर्द्धी क्षमता बरकरार रखने के साथ ही टिकाऊ व्यापार समझौता करने पर भी हमारा ध्यान है।

अमेरिका ने डब्ल्यूटीओ में इस्पात शुल्क पर भारत की चुनौती को कानून और प्रक्रिया के नाम पर ठुकरा दिया है। भारत अब इसके पक्ष में किस तरह मुहिम चला रहा है? 

भारत का हमेशा व्यवस्था आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में विश्वास रहा है। अमेरिका ने प्रक्रियात्मक आधार पर हमारी चुनौती जरूर अस्वीकार कर दी है मगर हम परस्पर लाभकारी एवं पारदर्शी तरीके से द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए लगातार उनसे (अमेरिका) बात करते रहेंगे।

पीएम ई-ड्राइव के तहत तिपहिया वाहनों की बिक्री ने अधिक रफ्तार नहीं पकड़ी है। क्या योजना वित्त वर्ष 26 के बाद भी जारी रहेगी? 

ई-3 डब्ल्यू (एल5) के मामले में अब तक इस योजना के अंतर्गत 1.58 लाख वाहनों की बिक्री हो चुकी है। यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2024-25 के लिए निर्धारित लक्ष्य 80,546 से ज्यादा है और 2,05,392 के लक्ष्य तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।  मगर ई-रिक्शा और ई-कार्ट की बिक्री सुस्त है और अब तक 2,743 ई-3डब्ल्यू (ई-रिक्शा एवं ई-कार्ट) ही इस योजना के अंतर्गत बिके हैं। 29 सितंबर 2024 को जारी अधिसूचना के अनुसार ई-2 डब्ल्यू एवं ई-3डब्ल्यूएस (ई-रिक्शा एवं ई-कार्ट) और ई-तिपहिया (एल5) के लिए रकम का इस्तेमाल 31 मार्च, 2031 तक हो सकेगा। 31 मार्च, 2026 तक बेचे गए वाहन इस प्रोत्साहन के लिए पात्र होंगे। पीएम ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत रकम के इस्तेमाल के लिए अब भी काफी समय शेष है। इसकी अवधि बढ़ाने का निर्णय उद्योगों के रुझानों एवं योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार होगा।

एसीसी बैटरी भंडारण पीएलआई के लिए शेष 10 गीगावाट आवर क्षमता का ठेका कब तक दिया जाएगा? क्या आपने नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के साथ कोई बोलीकर्ता चुना है?

10 गीगावाट आवर एसीसी क्षमता के लिए बोली दस्तावेज को नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय अंतिम रूप दे रहा है। इसके बाद हमारा मंत्रालय सीपीपी पोर्टल पर वैश्विक निविदा जारी करेगा।

ई-ऐंबुलेंस को सब्सिडी प्रोत्साहन की क्या स्थिति है? दिशानिर्देश कब तक जारी होने की उम्मीद है और किस ओईएम ने दिलचस्पी दिखाई है? क्या किसी ओईएम ने डिलिवरी से जुड़ा कोई वादा किया है?

फिलहाल देश में ई-ऐंबुलेंस का विनिर्माण नहीं हो रहा है। दिशानिर्देश तैयार हो रहे हैं और इस मामले में संबंधित पक्षों के साथ बातचीत चल रही है। दिशानिर्देश तैयार होने के बाद रकम का इस्तेमाल किया जाएगा। कई ओईएम ने दिलचस्पी दिखाई है और उम्मीद की जा रही है कि अगले साल के अंत तक बाजार में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड संस्करण दोनों ही बाजार में आ जाएंगे।  

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First Published - June 15, 2025 | 10:26 PM IST

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