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उत्तराखंड कहिए या ‘दानवीर कर्ण’

Last Updated- December 06, 2022 | 10:42 PM IST

गर्मी बढ़ने के साथ ही जहां अन्य राज्यों में बिजली की किल्लत होने लगती है, वहीं उत्तराखंड सरकार को गर्मियों में बिजली उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।


उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में बर्फ के पिघलने से बिजली उत्पादन बढ़ सकता है। उसके मुताबिक, राज्य में बिजली उत्पादन का आंकड़ा 23.5 मिलियन यूनिट से 24.5 मिलियन यूनिट तक पहुंच सकता है। यानी मांग से करीब 2 मिलियन यूनिट ज्यादा बिजली उत्पादन की उम्मीद है।


औरों पर भी करम करेगी सरकार


यूपीसीएल के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य में मांग से अधिक बिजली उत्पादन होने की उम्मीद में राज्य सरकार दिल्ली, पंजाब और हरियाणा की तर्ज पर नए समझौते करेगी। जल विद्युत पर निर्भर इस राज्य में बिजली उत्पादन की यह स्थिति सर्दियों के उन हालात से बिल्कुल उलट है, जब नदियों में पानी की कमी के चलते यहां बिजली की भारी किल्लत थी। 


लेकिन अब बिजली उत्पादन बेहतर होने की जो उम्मीदें जगी हैं उसकी वजह सिर्फ यह नहीं है कि बर्फ बिघलने से नदियों में ज्यादा पानी है। दरअसल 304 मेगावॉट की बहुप्रतीक्षित मनेरी भाली जलविद्युत परियोजना (स्टेज 2) पूरा हो जाने से यह संभव हुआ है। भले ही यह परियोजना देर से पूरी हुई है लेकिन काम हो जाने से सरकार ने राहत की सांस ली है।


दिलचस्प पहलू यह है कि उत्तरकाशी जिले में भगीरथी नदी पर बनी मनेरी भली परियोजना राष्ट्र को समर्पित की गई तो मुख्य मंत्री भुवन चंद खंडूड़ी उसका सारा श्रेय अपने नाम करना नहीं भूले। खंडूड़ी ने कहा कि सरकार की जी-तोड़ कोशिश के चलते ही यह काम पूरा हो पाया है।


मनेरी ने की है कायापलट


मनेरी भाली परियोजना का काम पूरा हो जाने से न सिर्फ उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड(यूजीवीएनएल) ने राहत की सांस ली है बल्कि इससे राज्य का बिजली संकट खत्म होने के भी आसार हैं। गौरतलब है कि 9 नवंबर साल 2000 में उत्तराखंड बनने के बाद पूरी होने वाली यह पहली जलविद्युत परियोजना है।


यह वजह है कि खंडूड़ी ने इसे उत्तराखंड का पहला पावर बेबी कहा। सरकारी रिपोर्टों के मुताबिक उत्तराखंड में 25450 मेगावॉट पनबिजली उत्पादित की जा सकती है लेकिन फिलहाल केवल 2810 मेगावॉट बिजली का उत्पादन ही किया जा रहा है।


एनएचपीसी, एनटीपीसी, टीएचडीसी सरकारी कंपनियों के जिम्मे 13667 मेगावॉट की परियोजनाएं हैं और सरकार 8932 मेगावॉट क्षमता वाली नई परियोजनाओं के लिए जल्द ही नीति बनाने वाली है।


बस 10 साल में होगा कमाल


जानकारों का कहना है कि अगर यह सारी परियोजनाएं अगले 5 से 10 साल के अंदर पूरी हो जाती हैं तो उत्तराखंड बिजली के मामले में न सिर्फ आत्मनिर्भर हो जाएगा बल्कि भारत का एक बिजली संपन्न राज्य बन जाएगा। बिजली सचिव शत्रुघ्न सिन्हा भी उम्मीदों से भरकर कहते हैं कि केवल 5 से 10 साल की बात है फिर सारी परियोजनाएं का काम पूरा हो जाएगा।


मगर राह में कुछ मुश्किलें भी हैं


हालांकि रास्ता उतना आसान भी नहीं है। 6000 मेगावॉट क्षमता वाली पंचेश्वर परियोजना का भविष्य पहले ही अधर में लटका है। जैसा कि मुख्यमंत्री खंडूड़ी ने कहा कि नेपाल के हालिया राजनैतिक बदलाव के मद्देनजर इस परियोजना से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मसलों पर ध्यान देना होगा।


पिथौरागढ़ मे रिलायंस एनर्जी की 340 मेगावॉट की अर्थिंग सोबला परियोजना पर भी मुश्किलों के बादल मंडरा रहे हैं क्योंकि यह एस्कॉट वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में पड़ रही है। इस मसले पर वाइल्डलाइफ अथॉरिटी और राज्य सरकार के बीच ठन गई है।


उधर खंडूड़ी केन्द्र से भी बिजली पाने की जुगत भिड़ाने में लगे हैं। साथ ही सरकार अपनी नई विद्युत नीति का कड़ाई से पालन कर रही है। सरकार ने फैसला किया है कि माइक्रो(100 किलोवॉट तक) और मिनी ( 100 किलोवॉट से कम) पनबिजली परियोजनाओं के लिए स्थानीय उद्यमियों और ग्राम पंचायतों को वरीयता दी जाएगी। इससे पहले सरकार ने प्रदेश से बाहर की निजी कंपनियों पर ज्यादा भरोसा जताया था।


प्रादेशिक आइना
उत्तराखंड  –   हाल-ए-बिजली


बर्फ पिघलने से गर्मियों में बिजली उत्पादन बढ़ने की उम्मीद
मांग से करीब 2 मिलियन यूनिट ज्यादा बिजली उत्पादन के अनुमान
राज्य में 25450 मेगावॉट पनबिजली उत्पादित की जा सकती है
खंडूड़ी केन्द्र से भी बिजली पाने की जुगत भिड़ाने में लगे

First Published - May 10, 2008 | 12:15 AM IST

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