सरकार की बंदरगाहों की संपत्ति के मुद्रीकरण की महत्त्वाकांक्षी योजना की कठिन शुरुआत हुई है। बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्ल्यू) 2021-22 लक्ष्य का सिर्फ 14 प्रतिशत परियोजनाएं आवंटित करने में सफल रहा है। मंत्रालय करीब 1,000 करोड़ रुपये की 3 परियोजनाओं के मुद्रीकरण में सफल रहा है। यह इस वित्त वर्ष में 13 परियोजनाओं के माध्यम से 6,924 करोड़ रुपये जुटाने के लक्ष्य से बहुत नीचे है।
नीति आयोग के मुताबिक राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) में देश के 12 प्रमुख बंदरगाहों में से 9 को शामिल किया गया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘सभी 13 परियोजनाओं को प्रक्रिया के तहत लाया गया है। एमओपीएसडब्ल्यू इनके आवंटन के लिए तैयार है। लेकिन परियोजनाओं को सुरक्षा संबंधी मंजूरी मिलना अभी बाकी है। 3 परियोजनाएं आवंटित कर दी गई हैं, शेष 10 परियोजनाओं का आवंटन संबंधित मंत्रालयों से मंजूरी मिलने के बाद किया जाएगा।’
रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय से अलग से सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद ही इन परियोजनाओं के ठेकों का आवंटन हो सकेगा क्योंकि ये परियोजनाएं रणनीतिक क्षेत्रों में स्थित हैं। सरकार के नियमों के मुताबिक अंतिम सुरक्षा मंजूरी 5 साल के लिए वैध होगी। एमओपीएसडब्ल्यू के सूत्रों ने संकेत दिए कि जिन बंदरगाहों के परिचालन के मुद्रीकरण के टेंडर जारी किए गए हैं, उनके टेंडरों में सक्रिय दिलचस्पी दिखी है।
मंत्रालय को पूरा भरोसा है कि सुरक्षा मंजूरी में देरी के बावजूद चालू और आगामी वित्त वर्षों में मुद्रीकरण का काम पूरा कर लिया जाएगा। इन 13 परियोजनाओं में पारादीप बंदरगाह पर 3,000 करोड़ रुपये के निवेश से पश्चिमी डॉक के विकास और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) के कंटेनर टर्मिनल को 853 करोड़ रुपये में पट्टे पर दिए जाने जैसे बड़े काम शामिल है। इसमें 495 करोड़ रुपये की मुंबई इंटरनैशनल क्रूज टर्मिनल का परिचालन एवं प्रबंधन (ओऐंडएम) भी शामिल है। नीति आयोग की ओर से जारी एनएमपी योजना के मुताबिक केंद्र सरकार ने 2024-25 तक 12,828 करोड़ रुपये मूल्य की 31 कार्गो बर्थ के मुद्रीकरण की योजना बनाई है। यह 6 लाख करोड़ रुपये की मुद्रीकरण योजना का 2 प्रतिशत है।
यह भी जानकारी मिल रही है कि मंत्रालय ने वित्त वर्ष 22 में लक्ष्य पूरा न होने की वजह से मुद्रीकरण के लक्ष्य में बदलाव किया है। मंत्रालय की सागरमाला योजना की शीर्ष समिति की आगामी बैठक में यह एजेंडे में शामिल होगा।
एनएमपी ने वित्त वर्ष 23 में 4,680 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 24 में 915 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 25 में 1,940 करोड़ रुपये की बंदरगाहों की संपत्तियों को निजी कंपनियों को पट्टे पर देने की योजना बनाई थी। यह ठेके 30 साल के लिए आवंटित किए जाएंगे और वास्तविक पूंजी निवेश शुरुआती वर्षों में चरणबद्ध तरीके से होने की संभावना है।