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थर्मामीटर बेचें या चिकित्सा उपकरण, कराना होगा पंजीकरण

Last Updated- December 11, 2022 | 2:10 PM IST

 केंद्र सरकार ने व्यापारियों और चिकित्सा उपकरणों व्यापारियों और रीसेलरों को पंजीकरण कराने के लिए कहा है। यह कदम देश में चिकित्सा उपकरण उद्योग के विनियमन का दायरा बढ़ाने की कोशिश के तहत उठाया जा रहा है। इस कदम का उपभोक्ताओं और व्यापारियों पर दूरगामी प्रभाव हो सकता है क्योंकि किराना प्लेटफॉर्मों आदि के जरिये बेरोकटोक बिक रहीं मास्क या कंडोम जैसी कई वस्तुओं की किल्लत हो सकती है। 
30 सितंबर की एक अधिसूचना में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि जो व्यक्ति इन-विट्रो डायग्नोस्टिक मेडिकल डिवाइस सहित चिकित्सा उपकरण बेचना, भंडारण करना, प्रदर्शन करना या बेचना अथवा वितरित करना चाहता है, उसे पंजीकरण प्रमाणपत्र लेना ही होगा। इन नियमों को चिकित्सा उपकरण (पांचवां संशोधन) नियम, 2022 कहा जा सकता है।
केंद्र के कदम के बारे में बताते हुए, एम्ड (असोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइसेज इंडस्ट्री) के फोरम कोऑर्डिनेटर राजीव नाथ ने कहा कि चिकित्सा उपकरण नियम, 2017 में निर्माताओं और आयातकों के लिए नियम तथा जिम्मेदारियां बताई गई थीं। मगर रीसेलर, थोक विक्रेता, व्यापारी या खुदरा विक्रेता इसके दायरे से बाहर थे।
उन्होंने कहा, ‘पहले दवाओं के रूप में अधिसूचित चिकित्सा उपकरणों के रीसेलरों को थोक दवा लाइसेंस की जरूरत होती थी। मगर चश्मे, कंडोम, दस्ताने, एडल्ट डायपर्स, व्हीलचेयर, ऑक्सीमीटर, मास्क, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर जैसे तमाम चिकित्सा उपकरण फार्मेसी के अलावा कई दुकानों पर भी मिलते हैं।
यह देखकर मॉल्स, किराना स्टोर, पान वालों जैसे लाखों रीसेलरों के लिए अलग से नियामकीय व्यवस्था जरूरी हो गई। पहले इन्हें केवल सामान्य ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया के लिए कहा गया था।’ फरवरी में सरकार ने मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिसूचना का मसौदा जारी किया था। इसका मकसद चिकित्सा उपकरणों को विनियमित करने के लिए व्यापारियों द्वारा चिकित्सा उपकरणों की रीसेलिंग को भी कानूनी दायरे में लाना था। 
उपकरण उद्योग नई अधिसूचना से खुश है। नाथ ने कहा कि उन्हें यह जानकर खुशी हो रही है कि अधिसूचना जारी हो गई है क्योंकि बाजार अनिश्चितता के साथ उथल-पुथल से गुजर रहा था और व्यापारियों को राज्य के नियामकों द्वारा थोक दवा लाइसेंस लेने के लिए कहा जा रहा था। ज्यादातर लोग इसके योग्य नहीं होते क्योंकि वे फार्मासिस्ट नहीं होते हैं।
हालांकि, मास्क, कंडोम आदि जैसी बहुत ही सामान्य वस्तुओं के लिए जो अब पान की दुकान, या पड़ोस में किराने की दुकान पर आसानी से उपलब्ध हैं, उनकी अब किल्लत हो सकती है।
एक सूत्र ने कहा कि ये छोटे व्यापारियों और रीसेलरों को खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में पंजीकरण के लिए चुनौती का सामना करना होगा। सरकार को छूट वाली सूची लानी पड़ सकती है ताकि ज्यादातर मामलों में व्यापार जारी रहे और रोगी की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके। इससे कुछ मामलों में चिकित्सा उपरकरणों को सस्ते और स्वतंत्र रूप से उपलब्ध कराया जा सकेगा।

First Published - October 4, 2022 | 10:17 PM IST

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