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स्मृति इरानी मामले ने तूल पकड़ा

Last Updated- December 11, 2022 | 5:12 PM IST

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कांग्रेस नेताओं जयराम रमेश, पवन खेड़ा और नेट्टा डिसूजा को निर्देश दिया कि वे केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी की बेटी के गोवा में ​स्थित रेस्टोरेंट को लेकर किए गये सभी ट्वीट हटाएं। न्यायालय ने इरानी द्वारा इन नेताओं के ​खिलाफ मानहानि का मामला दायर करने के बाद उन्हें समन भी जारी किया। नेताओं ने ट्वीट हटा दिए हैं लेकिन उन्होंने कहा है कि वे समन का जवाब देंगे और इस मामले को न्यायालय में लड़ेंगे।
यह शायद अपनी तरह का पहला मामला है जहां न्यायालय ने नेताओं से अपने ट्वीट हटाने को कहा है और प्रकरण बुनियादी ​अ​धिकारों समेत वि​भिन्न विषयों से जुड़ी तमाम जटिलताएं समेटे हुए है। न्यायालय ने कांग्रेस नेताओं से कहा कि वे वादी तथा उसकी बेटी से जुड़े अपने तमाम पोस्ट, वीडियो, ट्वीट एवं ​रीट्वीट तथा छेड़छाड़ की हुई तस्वीरें आदि हटा लें।
न्यायालय ने उनसे यह भी कहा कि इरानी और उनकी बेटी के ​खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रसारित करना भी बंद कर दें। इरानी ने न्यायालय में दो करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति के मामले के साथ मानहानि का मुकदमा दायर किया है, उन्होंने निषेधाज्ञा जारी करने की मांग की है और कहा है कि कांग्रेस नेताओं जयराम रमेश, पवन खेड़ा और नेट्टा डिसूजा ने अज्ञात व्य​क्तियों के साथ मिलकर षडयंत्र किया और उनकी युवा संतान की मानहानि करने के उद्देश्य से उन्हें नुकसान पहुंचाने वाली व्य​क्तिगत टिप्प​णियां कीं।
इससे पहले लोकसभा में कल स्मृति इरानी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बीच हुए गतिरोध के बाद केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल और अन्य बड़े नेताओं ने इरानी के बचाव में जमकर तेवर दिखाए। सोशल मीडिया पर इरानी की बेटी के गोवा ​स्थित रेस्टोरेंट की तस्वीरें भी प्रसारित की गईं जिनके बारे में इरानी का दावा है कि वे फर्जी तस्वीरें हैं।
दिल्ली उच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई करने वाली न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने कहा, ‘प्रथम दृष्टया मुझे लगता है कि वादी के ​खिलाफ बिना वास्तविक तथ्यों की पु​ष्टि किए मिथ्या आरोप लगाये गए।’ न्यायालय ने कहा कि बचाव पक्ष द्वारा आयोजित संवाददाता सम्मेलन के कारण हुए ट्वीट और रीट्वीट के चलते वादी की प्रतिष्ठा को गहरी क्षति पहुंची है।
न्यायालय ने कहा, ‘प्रथमदृष्टया वादी की ओर से मामला बनता है और वादी की बात उपयुक्त लगती है तथा बचाव पक्ष के ​खिलाफ जाती है। मुझे यह एक अंतरिम निषेधाज्ञा जारी करने के लिए पर्याप्त लगता है जिसके तहत जयराम रमेश, पवन खेड़ा और नेट्टा डिसूजा को निर्देश दिया जाता है कि वे अपने ट्वीट डिलीट करें और संवाददाता सम्मेलन के दौरान लगाए गए आरोपों को यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर समेत सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाएं।
न्यायालय ने इन नेताओं को यह निर्देश भी दिया कि वे वादी और उसकी बेटी की छेड़छाड़ की गई तस्वीरों, उन पर लगाए आरोपों, पोस्ट, वीडियो, ट्वीट, रीट्वीट आदि को हटाएं और उनके प्रसार को रोकें। यह भी कहा गया कि यदि प्रतिवादी 1-3 अगले 24 घंटे के भीतर आदेश का अनुपालन करने में विफल रहे तो प्रतिवादी 4-6 (सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म)  को निर्देश दिया जाता है कि वे यह सामग्री हटाएं।
कल के घटनाक्रम का असर यह हुआ कि लोकसभा और राज्य सभा में केवल 1 मिनट कार्यवाही चली। सदन के स्थगित होने से पहले अगले सप्ताह के लिए सरकार के विधायी कामकाज की घोषणा की गई। माना जा रहा है कि अगले सप्ताह सदन में प्रतिस्पर्धा (संशोधन) विधेयक 2022, ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) विधेयक 2022, केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2022 और नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र विधेयक, 2022 पेश किए जा सकते हैं। बहरहाल, निलंबित चल रहे 23 सांसदों का निलंबन शुक्रवार को समाप्त हो गया लेकिन अगर सोमवार को भी उनका व्यवहार पहले जैसा रहा तो उन्हें सत्र की शेष अव​धि के लिए निलंबित किया जा सकता है।
अधीर ने राष्ट्रपति से माफी मांगी
लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अपनी उस टिप्पणी के लिए लिखित माफी मांग ली, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति को ‘राष्ट्रपत्नी’ कहकर संबोधित किया था। उनकी इस टिप्पणी को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। उन्होंने बुधवार को मीडिया से बातचीत में राष्ट्रपति के लिए ‘राष्ट्रपत्नी’ शब्द का उपयोग कर दिया था। उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिये भूलवश एक गलत शब्द का इस्तेमाल किया। चौधरी ने कहा, ‘मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि यह जुबान फिसलने से कारण हुआ। मैं माफी मांगता हूं और आपसे आग्रह करता हूं कि आप इसे स्वीकार करें।’ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने इसी विषय को लेकर शनिवार को राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगा है।
भाजपा की तरफ से केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने लोकसभा में मोर्चा संभाला था और कांग्रेस को ‘आदिवासी, महिला और गरीब विरोधी’ करार देते हुए कहा था कि मुख्य विपक्षी दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को माफी मांगनी चाहिए। राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था कि कांग्रेस अध्यक्ष को माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस ने दावा किया था कि लोकसभा में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और कई भाजपा नेताओं ने सोनिया गांधी के साथ अपमानजनक व्यवहार किया, जिसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माफी मांगनी चाहिए। भाषा

First Published - July 30, 2022 | 1:09 AM IST

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