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ताकि न फिसले उद्योग

Last Updated- December 07, 2022 | 5:01 AM IST

सरकार के मंत्री भले ही खुद अपने मुखिया मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी की खर्च में कटौती की अपील पर अमल न करें।


लेकिन कॉरपोरेट घरानों ने अपने स्तर से ही लागत कम करने की पहल शुरू करने का निर्णय लिया है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के मद्देनजर लागत में हो रही वृद्धि को देखते हुए कई कंपनियों ने नई रणनीति अपना ली है।

परिवहन खर्च में कटौती

भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड ने परिवहन खर्च बचाने के मकसद से फैब्रिकेशन यूनिट को फैक्टरी के पास ही स्थापित करने की योजना बनाई है। कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक रवि कुमार का कहना है कि इससे लागत कम करने में मदद मिलेगी। ऐसा नहीं है कि इस तरह के कदम सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियां ही उठा रही हैं, बल्कि प्राइवेट कंपनियां भी इस नीति पर अमल करने की तैयारी में हैं।  

भर्ती और निवेश पर नकेल

टाटा ग्रुप के एक अधिकारी ने बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने से ग्रुप की सभी कंपनियों-टाटा मोटर्स, टाटा केमिकल्स, टाटा पावर और टाटा स्टील पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है। इसकी वजह से कंपनी लागत कम करने के लिए तरह-तरह के उपाय अपना रही है।

इसके तहत नई तकनीक को अपनाया जा रहा है, वहीं नई नियुक्तियों और ताजा निवेश पर लगाम लागने की योजना बनाई जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बनाने वाली प्रमुख कंपनी एलजी और सैमसंग भी कुछ ऐसी नीति बना रहे हैं, जिससे बढ़े हुए ईंधन का भार उपभोक्ताओं पर न पड़े।

वैकल्पिक ईंधन वाहनों को बढ़ावा

वाहन निर्माता कंपनियां बिजली, एलएनजी और सीएनजी से चलने वाले वाहनों को लॉन्च करने की तैयारी में जुटी हैं। हीरो होंडा इस साल के अंत तक इलेक्ट्रिक टू व्हीलर लॉन्च करने जा रही है, वहीं अल्ट्रा मोटर्स की योजना बिजली से चलने वाले थ्री व्हीलर लॉन्च करने की है। मारुति सुजुकी और हुंडई हाइब्रिड वर्जन की कार लॉन्च करने जा रही हैं, जो पेट्रोल और एलएनजीसीएनजी, दोनों से चलेगी। महिंद्रा अगले साल तक सीएनजी से चलने वाले लोगान लॉन्च करेगी।

पिक-ड्रॉप पर गाज

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से आईटी कंपनियां भी सकते में हैं। दरअसल, ये कंपनियां अपने कर्मचारियों को पिक-ड्रॉप की सुविधा मुहैया कराती हैं। ऐसे में उनका परिवहन खर्च काफी बढ़ने की आशंका है। कई सॉफ्टवेयर कंपनियों ने अपने कर्मचारियों से कहा है कि वे कस्टमर्स के पास जाने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का इस्तेमाल करें। इससे परिवहन खर्च में कटौती की जा सकती है। कई कंपनियां कर्मचारियों के ट्रांसपोर्टेशन पर्क्स में कटौती करने का मन बना रही हैं।

First Published - June 11, 2008 | 12:35 AM IST

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