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सांख्यिकी संग्रह कानून होगा अपराध मुक्त

Last Updated- December 11, 2022 | 1:51 PM IST

सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने सांख्यिकी संग्रह अधिनियम 2008 के तहत विभिन्न उल्लंघनों को अपराधमुक्त और तर्कसंगत बनाने का प्रस्ताव किया है। यह प्रस्ताव सरकार द्वारा विभिन्न कानूनों को तर्कसंगत बनाने और कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने की योजना का हिस्सा है।
मंत्रालय ने मसौदा प्रस्ताव पर 30 अक्टूबर तक जनता से प्रतिक्रिया मांगी है। अधिनियम की विभिन्न धाराओं में संशोधन का प्रस्तावित कदम मंत्रालय कर्मचारियों के काम में बाधा डालने और सांख्यिकी अधिकारियों या सांख्यिकी एजेंसी को धोखा देने जैसे अपराधों पर 6 महीने के साधारण कारावास की सजा खत्म करने का प्रस्ताव है।
बहरहाल सांख्यिकी मंत्रालय ने उपरोक्त उल्लंघन पर जुर्माने की राशि व्यक्तियों पर 2,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये करने और कंपनियों पर इसे 10,000 से बढ़ाकर 1,00,000 रुपये करने का प्रस्ताव किया है। इस समय व्यक्तियों पर जुर्माना राशि 2,000 रुपये और कंपनियों पर 10,000 रुपये है।
प्रस्ताव में कहा गया है, ‘ज्यादा मौद्रिक जुर्माना जेल की सजा की तुलना में कहीं ज्यादा कारगर होगा क्योंकि यह ज्यादा आसानी से लागू किया जा सकेगा।’सामान्यतया छोटी चूक को अधिनियम में नहीं रखा गया है। मंत्रालय ने 6 माह की सजा से दूर रहने और जुर्माने की राशि बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। प्रस्ताव में कहा गया है, ‘मामूली चूक से निपटने के मामले में सजा का प्रावधान लागू करना मुश्किल हो सकता है।
ऐसे में जेल की सजा की सिफारिश नहीं की गई है। ऐसे अपराध रोकने के लिए भारी जुर्माना पर्याप्त होगा।’ यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि सरकार अपराधमुक्ति कानून आगामी शीतकालीन सत्र में ला सकती है, जिससे कंपनियों पर अनुपालन का बोझ कम किया जा सके। 
झूठे बयान देने, किसी कर्मचारी के रूप में काम करने, सूचना अनुसूची को विकृत करने, कर्मचारियों द्वारा कर्तव्य निर्वहन व काम के पूरा करने में विफलता की स्थिति में मंत्रालय ने ज्यादा अर्थदंड के साथ 6 माह की सजा का प्रस्ताव किया है। 
 

First Published - October 11, 2022 | 10:40 PM IST

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