facebookmetapixel
रेट कट का असर! बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारीTest Post कैश हुआ आउट ऑफ फैशन! अक्टूबर में UPI से हुआ अब तक का सबसे बड़ा लेनदेनChhattisgarh Liquor Scam: पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ED ने किया गिरफ्तारFD में निवेश का प्लान? इन 12 बैंकों में मिल रहा 8.5% तक ब्याज; जानिए जुलाई 2025 के नए TDS नियमबाबा रामदेव की कंपनी ने बाजार में मचाई हलचल, 7 दिन में 17% चढ़ा शेयर; मिल रहे हैं 2 फ्री शेयरIndian Hotels share: Q1 में 19% बढ़ा मुनाफा, शेयर 2% चढ़ा; निवेश को लेकर ब्रोकरेज की क्या है राय?Reliance ने होम अप्लायंसेस कंपनी Kelvinator को खरीदा, सौदे की रकम का खुलासा नहींITR Filing 2025: ऑनलाइन ITR-2 फॉर्म जारी, प्री-फिल्ड डेटा के साथ उपलब्ध; जानें कौन कर सकता है फाइलWipro Share Price: Q1 रिजल्ट से बाजार खुश, लेकिन ब्रोकरेज सतर्क; क्या Wipro में निवेश सही रहेगा?Air India Plane Crash: कैप्टन ने ही बंद की फ्यूल सप्लाई? वॉयस रिकॉर्डिंग से हुआ खुलासा

सुप्रीम कोर्ट ने हटाया कोटे का कांटा

Last Updated- December 07, 2022 | 12:01 AM IST

उच्चतम न्यायालय ने देश के प्रमुख प्रबंधन संस्थान आईआईएम और अन्य उच्च संस्थानों में स्नातकोत्तर पाठयक्रमों में ‘सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग’ के लिए 27 फीसदी आरक्षण देने का रास्ता साफ कर दिया है।


मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें 27 प्रतिशत आरक्षण देने पर स्थगन लगा दिया गया था।

पीठ ने आदेश पर रोक लगाते हुए पूछा, ‘क्या कलकत्ता उच्च न्यायालय का आदेश उच्चतम न्यायालय से ऊपर है।’ पीठ ने कहा कि वह कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को क्रियान्वित करने की इजाजत नहीं दे सकती। पीठ ने कहा कि जब उच्चतम न्यायालय अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) को आरक्षण देने वाले अधिनियम की वैधता को बरकरार रख चुका है तो फिर उच्च न्यायालय द्वारा इसके कार्यान्वयन पर रोक लगाने का सवाल ही कहां उठता है।

न्यायालय ने हालांकि यह भी कहा कि अंतिम फैसले तक केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों के स्नातकोत्तर पाठयक्रमों में सभी दाखिले अस्थायी होंगे। न्यायालय ने दिल्ली, कलकत्ता और बम्बई उच्च न्यायालयों में ओबीसी से संबंधित लंबित सभी मामलों की प्रक्रिया को स्थगित कर दिया।

न्यायालय ने सभी मामलों को शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने की मांग वाली केंद्र की याचिका पर उन सभी याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी किए जो विभिन्न उच्च न्यायालयों में ओबीसी आरक्षण से संबंधित सरकारी परिपत्र के कार्यान्वयन का विरोध कर रहे हैं।

उच्चतम न्यायालय ने अधिकारियों से कहा कि ऐसे प्रत्याशी जो दाखिले की प्रतीक्षा में हैं, उन्हें यह स्पष्ट किया जाए कि याचिका को लेकर जो आखिरी फैसला सुनाया जाएगा, उसी के आधार पर उनका नामांकन किया जाएगा। वरिष्ठ अधिवक्ताओं के के वेणुगोपाल और हरीश साल्वे की दलील थी कि छात्रों को आरक्षण के लाभ से वंचित रखा गया है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि सूची में जिन छात्रों का नाम शामिल नहीं है, वे व्यक्तिगत के तौर पर हैं।

इसे किसी समुदाय के तौर पर नहीं लिया जा सकता, जबकि क्रीमी लेयर का मतलब समुदाय से है, व्यक्तिगत से नहीं। उन्होंने कहा कि यह सरकार का काम है कि वह प्रत्येक समुदाय से क्रीमी लेयर को छांटे और यह सुनिश्चित करे कि उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है। उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई के दौरान कहा कि कोटा को परिभाषित करते वक्त ही इस बात को स्पष्ट किया गया था कि यह क्रीमी लेयर के प्रत्याशियों के लिए नहीं बनाई गई है और इससे उन्हें लाभ नहीं मिलना चाहिए।

उच्चतम न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर लगाई रोक
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण के फैसले पर जारी किया था स्थगन आदेश
उच्चतम न्यायालय ने पूछा प्रश्न क्या उच्च न्यायालय है उच्चतम न्यायालय से बड़ा
आईआईएम समेत अन्य स्नातकोत्तर संस्थानों में आरक्षण का रास्ता साफ
कहा क्रीमी लेयर का निर्धारण करना सरकार का काम, करे सुनिश्चित उन्हें न मिले आरक्षण का लाभ

First Published - May 16, 2008 | 11:54 PM IST

संबंधित पोस्ट