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सुजलॉन के संस्थापक तुलसी तांती का निधन

Last Updated- December 11, 2022 | 2:21 PM IST

 पवन ऊर्जा कंपनी सुजलॉन एनर्जी के अध्यक्ष तुलसी तांती का शनिवार शाम को पुणे में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 64 वर्ष के थे। तांती अपनी कंपनी के 1,200 करोड़ रुपये के राइट्स इश्यू पर कई बैठकों में भाग लेने के बाद अहमदाबाद से पुणे अपने घर जा रहे थे, तभी उन्हें कुछ असहज महसूस होने लगा और कुछ ही देर बाद उनकी मृत्यु हो गई। उनके परिवार में पत्नी गीता, बेटा प्रणव और बेटी निधि हैं।

तांती ने 1990 के दशक के मध्य में पवन ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश करके अपनी किस्मत चमकाई थी जब अक्षय ऊर्जा पर जोर नहीं हुआ करता था। सुजलॉन ने 2007 में जर्मनी में 1.4 अरब यूरो की बड़ी रकम खर्च कर सेनवियन एनर्जी का अधिग्रहण किया था। लेकिन उनका अच्छा दौर जल्द ही खत्म हो गया क्योंकि ग्राहकों ने ब्लेड से जुड़ी गुणवत्ता से जुड़ी समस्याओं की ओर इशारा करना शुरू कर दिया और सुजलॉन ने बैंकों को अपना ऋण चुकाने में देरी की। वर्ष 2015 में, सुजलॉन को बैंक ऋण चुकाने और ऋण पुनर्गठन योजना का लाभ लेने के लिए सेनवियन को बेचना पड़ा।
गुजरात विश्वविद्यालय से वाणिज्य विषय की पढ़ाई करने वाले तांती ने कपड़ा व्यापारी के रूप में अपनी कारोबारी यात्रा शुरू की लेकिन बिजली की बढ़ती लागत के बाद अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में अपना दायरा बढ़ाया। 1995 में तांती ने एक पवन ऊर्जा उद्यम शुरू किया और बाद में सुजलॉन को सूचीबद्ध किया। हाल के वर्षों में, तांती ऋणदाताओं के साथ वित्तीय पुनर्गठन करने में कामयाब रहे भले ही कंपनी में उनकी अपनी हिस्सेदारी कम हो गई। 

कंपनी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि भारत ने 2070 तक शून्य उत्सर्जन वाला देश बनने के लिए सीओपी26 के वादे के साथ ही जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अक्षय ऊर्जा की बढ़ती भूमिका ने तांती को अपनी कंपनी में फिर से बदलाव लाने के लिए उत्साहित किया था। सूत्रों का कहना है कि ऊर्जा स्वतंत्रता और सुरक्षा के माध्यम से टिकाऊ कारोबार एवं टिकाऊ अर्थव्यवस्था बनाने में दृढ़ विश्वास रखने वाले, तांती स्वच्छ ऊर्जा के मामले में दूरदर्शी होने के साथ ही इसके दुनिया के मशहूर विशेषज्ञ थे और सस्ती-टिकाऊ ऊर्जा को बढ़ावा देने में वह अग्रणी रहे।
तांती ने भारतीय अक्षय ऊर्जा उद्योग में ऐसे समय में मौके तलाशने की कल्पना की जब वैश्विक पवन ऊर्जा बाजार में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का दबदबा था और महंगी तथा जटिल प्रौद्योगिकी पारंपरिक कारोबारों के लिए काफी हद तक अव्यावहारिक थीं। एक नया बिजनेस मॉडल स्थापित करते हुए, उन्होंने कारोबारों के लिए ‘स्वच्छ ऊर्जा’ के रास्ते तैयार करने के समाधान पर सोचा और इस तरह वह टिकाऊ कारोबार तैयार करने के लिए एक रणनीतिक भागीदार के रूप में उभरे।
भारत एक जीवाश्म ईंधन से अक्षय ऊर्जा वाले देश में बदल गया है लेकिन इसमें ‘तुलसीभाई’ के नाम से मशहूर तांती का योगदान सर्वोपरि रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि कई लोग उन्हें ‘भारतीय अक्षय ऊर्जा उद्योग का जनक’ मानते हैं क्योंकि उन्होंने इस क्षेत्र के भविष्य की भविष्यवाणी की थी।

जलवायु परिवर्तन से संघर्ष करने की अपनी कोशिशों के लिए, तांती को संयुक्त राष्ट्र द्वारा ‘चैंपियन ऑफ द अर्थ’, अर्न्स्ट ऐंड यंग द्वारा ‘एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर 2006, टाइम पत्रिका द्वारा ‘हीरो ऑफ द एनवायरनमेंट’ सहित कई अन्य पुरस्कार भी मिले।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तांती के निधन पर शोक जताते हुए उन्हें अपने क्षेत्र का पथ-प्रदर्शक बताया। प्रधानमंत्री ने ट्वीट में कहा, ‘तुलसी तांती एक पथ-प्रदर्शक कारोबारी दिग्गज थे जिन्होंने भारत की आर्थिक प्रगति में योगदान दिया और टिकाऊ विकास की दिशा में देश के प्रयासों को मजबूती दी।’’
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शोक संदेश में कहा कि तांती ने भारत में पवन ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांति की अगुआई की। रीन्यू पावर के संस्थापक एवं मुख्य कार्या​धिकारी सुमंत सिन्हा ने अपने ट्वीट में उनके निधन पर गहरा शोक जताते हुए कहा कि वह नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के अग्रदूत थे। 

अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने कहा, ‘तांती एक प्रतिभाशाली दूरदर्शी थे, जिन्होंने साबित किया कि भारत पवन ऊर्जा के क्षेत्र में एक वैश्विक खिलाड़ी हो सकता है। वह सही मायने में आत्म निर्भारता में यकीन रखने वाले शख्सियत में से एक थे।’

First Published - October 2, 2022 | 11:07 PM IST

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