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…शुक्र है फिर भी आए तो

Last Updated- December 07, 2022 | 10:06 AM IST

बीते पांच सालों से जबरदस्त सूखे की मार झेल रहे बुंदेलखंड के किसानों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है। मानसून के पहले महीने में हुई झमाझम बारिश के बाद किसानों को अच्छी फसल होने का इंतजार है।


जोरदार बारिश ने बुंदेलखंड के खेत-खलिहान सहित बांधों और जलाशयों की भी प्यास बुझा दी है। बुदेलखंड में मौसम वैज्ञानिक इस बार खरीफ की अच्छी फसल की आशा जता रहे हैं। अच्छे मानसून के चलते बुंदेलखंड के ज्यादातर इलाकों में धान की रोपाई का काम आधे से ज्यादा पूरा हो गया है। बाकी खेतों में भी रोपाई इस महीने के अंत तक पूरा हो जाने की आशा है।

मौसम विभाग के वैज्ञानिकों का कहना है कि बुंदेलखंड में अकेले जून में इस साल सामान्य के मुकाबले 200 फीसदी ज्यादा बारिश हुई, जो कि बीते सात सालों का रिकॉर्ड है। पिछले पांच सालों से बुंदेलखंड में जून के महीने में बारिश सामान्य के मुकाबले आधी से भी कम होती रही है। मौसम विभाग का कहना है कि बुंदेलखंड पर मानसून देवता की कृपा इस पूरे साल बनी रहेगी। बुंदेलखंड के ज्यादातर बांध आधे से ऊपर तक भर चुके हैं।

ललितपुर में बेतवा नदी पर बना माताटीला बांध बुंदेलखंड का सबसे बड़ा बांध है, जोकि 50 फीसदी के लगभग भर चुका है। इसी जिले का गोविंदसागर बांध अधिकतम जल स्तर से केवल 52 सेंटीमीटर नीचे रह गया है। शाहजाद और सजनम बांध जो कि अपनी विशालता के लिए पूरे बुंदेलखंड में जाने जाते हैं इस समय आधे से ज्यादा भर चुके हैं। बीते पांच सालों में यह सभी बांध कभी एक चौथाई भी नही भर सके थे। बुंदेलखंड के अलावा भी सूखा पीड़ित जिलों मिर्जापुर और सोनभद्र में इस साल जोरदार बारिश के चलते दोनों जिलों के बांध लबालब भर गए हैं।

सोनभद्र के सिलहट बांध इसी सोमवार को ओवरफलो कर गया था। मिर्जापुर का मशहूर रिहंद बांध 63 फीसदी और ओबरा बांध अब तक 89 फीसदा भर चुका है। जलाशयों के भरने बाद अब आशा जतायी जा रही है कि बुंदेलखंड इस साल तो कम से कम पानी की कमी नही झेलेगा। बुंदेलखंड आंदोलन के सक्रिय सदस्य रहे नीरज कुमार बताते हैं कि अच्छी बारिश के बाद गांव छोड़ चुके लोग खेती के लिए वापस लौटने लगे हैं। इससे भूजल स्तर में भी सुधार होगा और नलकूपों की समस्या सुलझ जाएगी।

First Published - July 10, 2008 | 12:49 AM IST

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