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सरकार ने दिया और, फिर भी कर्मचारी मांगे मोर

Last Updated- December 07, 2022 | 6:41 PM IST

सरकार ने दिया और, फिर भी कर्मचारी मांगे मोर
खतरनाक है यह प्रतिस्पर्धा


छठे वेतन आयोग से सरकारी-निजी क्षेत्रों के कर्मचारियों के वेतनमान भले ही समानान्तर हो जाएं लेकिन क्या सरकारी क्षेत्र के कर्मचारी उस उन्नत दृष्टिकोण, समर्पण व निष्ठापूर्वक कार्य करके अपनी उत्कृष्टता का नमूना दे सकेंगे, जैसा कि निजी क्षेत्रों का शानदार प्रदर्शन रहा है। सरकारी नौकरी का मतलब आरामतलबी समझा जाता है। मेरी दृष्टि में यह प्रतिस्पध्र्दा काफी खतरनाक है, क्योंकि देश में सर्वाधिक लोग तो असंगठित क्षेत्र में काम करके जीविकोपार्जन कर रहे हैं, जहां वेतन व सुविधाएं दोनों बहुत ही कम हैं।

कृष्ण कुमार उपाध्याय
एडवोकेट, 8262-बैरिहवां, गांधी नगर, जनपद-बस्ती, उत्तर प्रदेश

निश्चित तौर पर घटेगी खाई

इसमें कोई शक नहीं कि छठे वेतन आयोग से सरकारी-निजी क्षेत्रों की खाई घटेगी और सरकारी कर्मचारियों को काफी फायदा होगा। देश की कई राज्य सरकारें भी अपने कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी करने वाले हैं। राज्य सरकारों पर कर्मचारियों के वेतन बढ़ाने को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है। लेकिन राज्य सरकारों के पास सबसे बड़ी समस्या है कि धन की कमी को कैसा पूरा किया जाएगा। वैसे देखा जाए तो अपने-अपने राज्यों का पैसा अपने ही राज्य में खर्च होना है।

ओ.पी. मालवीय
भोपाल, मध्य प्रदेश

खाई तो खत्म होगी, पर भ्रष्टाचार…

खाई तो कम होगी लेकिन भ्रष्टाचार कम हो तब ही बात बनेगी। सरकार को अब सरकारी कर्मचारियों के कार्यों की जवाबतलबी की रूपरेखा बनानी चाहिए। यदि कम वेतन पर भ्रष्टाचार पनप रहा था तो अब समुचित वेतन पर जवाबदेही भी होनी चाहिए। यदि सरकारी कर्मचारी, अधिकारी एवं व्यापारी सभी थोड़ा-थोड़ा सुधरें तो सभी क्षेत्रों में काफी सुधार हो सकता है।

सुशील जैन ‘राना’
सहारनपुर, उत्तर प्रदेश

वेतन ही नहीं कार्यकुशलता भी बढ़ेगी

वैश्वीकरण के प्रभाववश निजी उद्योगों, कारोबारों व फैलते बाजारों ने लाखों रोजगार के अवसर पैदा किए हैं, जिसमें निजी संगठन कार्यकुशलता व कार्यक्षमता से कंपनी अधिक परिश्रमिक अपने कामगारों को दे रहे हैं, जिससे सार्वजनिक संगठनों के कर्मी निजी क्षेत्रों की ओर पलायन को मजबूर हैं। लेकिन छठे वेतन आयोग के प्रस्ताव को केंद्र सरकार द्वारा लागू करने की घोषणा उन्हें रोमांचित कर दिया है। इस वेतन आयोग से न केवल निजी और सरकारी तबकों की खाई मिटेगी बल्कि कार्यकुशलता की होड़ लगेगी और एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा जन्म लेगा।

मुनीश्वर
बेगूसराय, बिहार

पलायन पर लगेगी रोक

छठे वेतन आयोग के  लागू होने से सरकारी क्षेत्र से निजी क्षेत्र की ओर प्रतिभाओं के पलायन पर रोक तो लगेगी। सरकारी क्षेत्र में भर्ती पर लगे प्रतिबंधों के कारण काम का दबाव निजी क्षेत्रों जैसा हो गया था, जबकि वेतनमानों में बहुत अंतर था। इस कारण सरकारी क्षेत्र में यह सोच विकसित हो रही थी कि जब इतने दबावों में काम करना है तो निजी क्षेत्र मंन बेहतर सुविधाओं के साथ क्यों न काम किया जाए।

डॉ. सतीश कुमार शुक्ल
पूर्व भारतीय आर्थिक सेवा अधिकारी एवं सलाहकार, कॉटन एक्सचेंज बिल्डिंग, मुंबई

निजी क्षेत्र आगे ही है

निजी क्षेत्र वेतन के मामले में सबसे आगे है। छठे वेतन आयोग ने वेतन अब जा कर बढ़ाया है लेकिन निजी क्षेत्र आज भी बहुत अच्छा वेतन दे रही है। आज निजी क्षेत्र की नौकरी में भी पीएफ, पेंशन और मृतक आश्रित नौकरी मिल रही है।
वी. के. सिंह
एडवोकेट, लखनऊ

सरकारी कर्मियों के बीच ही बनी खाई

छठे वेतन आयोग से निजी और सरकारी तबकों के बीच की खाई कम होगी, आज इससे बड़ी बात यह है कि इस वेतन आयोग से सरकारी क्षेत्र के कर्मचारियों के बीच ही एक बहुत बड़ी खाई खोद दी गई है। राज्य सरकारें वेतन बढ़ाने की बात कर रही हैं, लेकिन महानगर पालिका, जिला परिषद की देखरेख वाले कर्मचारियों का तो भगवान ही मालिक है।
आर.बी.यादव
शिक्षक निरीक्षक -बीएमसी स्कूल, कुर्ला, मुंबई

अब काम में भी तो साबित करना होगा

सरकार का यह कदम निश्चित ही निजी और सरकारी तबकों के बीच वेतन की खाई को कम करने में अहम साबित होगा, लेकिन काम और कमाई के बारे में कह पाना मुश्किल है। जितनी सुविधाएं सरकारी उपक्रमों के कर्मचारियों को मिलती हैं,निजी क्षेत्र में सोची भी नहीं जा सकती। अब सरकारी कर्मचारियों को काम में भी अपने को साबित करना होगा।
शैलेश
मीरा रोड, थाणे, महाराष्ट्र

First Published - August 25, 2008 | 12:06 AM IST

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