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बीते हुए लम्हों की कसक…

Last Updated- December 07, 2022 | 12:42 AM IST

बंटवारे के बाद बिछड़े परिवार को पुराने समय की साझा और बेमिसाल संस्कृति की कसक याद दिलाने का तरीका तो कोई विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी से सीखे।


जो अधिकारियों के साथ मंगलवार को पाकिस्तान यात्रा पर अपने साथ ‘बॉलीवुड : 60 ईयर्स ऑफ रोमांस’ म्यूजिक एलबम भी साथ ले जा रहे हैं। हिंदी फिल्मी गीतों के इस संग्रह को पाकिस्तानी अधिकारियों को भेंट किया जाएगा।

बेहतर संबंध कायम करने के लिए विदेश मंत्रालय के पब्लिक डिप्लोमेसी डिविजन ने खास इस सीडी को तैयार करने के लिए म्यूजिक कंपनी सारेगामा इंडिया लिमिटेड के साथ समझौता किया है। यह सीडी फिलहाल बाजार में उपलब्ध नहीं है। सीडी में 1940 के दशक के गीतों का भी संग्रह है, जब भारत-पाक का बंटवारा नहीं हुआ था।

एलबम का पहला गीत फिल्म ‘शाहजहां’ का ‘जब दिल ही टूट गया…’ है, जिसे कुंदन लाल सहगल ने गाया है। एलबम का अंतिम गीत फिल्म ‘कभी अलविदा न कहना’ का है, जिसे सोनू निगम ने आवाज दी है। सारेगामा ने 1946 से 2006 तक के हिंदी फिल्मों के 60 चुनिंदा गीतों को इस एलबम में शामिल किया है।

पाक ही नहीं, मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, इस तरह की सीडी विभिन्न देशों के विदेश मंत्रालयों के अधिकारियों को भी समय-समय पर भेंट की जाएगी। इसका मकसद बॉलीवुड के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना है। विदेशी प्रतिनिधियों को खास तरह के उपहार भेंट करने की परंपरा रही है, लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों को हिंदी फिल्मी गीतों की सीडी भेंट करना अपने आप में अनूठा और दिलचस्प होगा।

गौरतलब है कि पाकिस्तान में लंबे समय तक बॉलीवुड फिल्मों के प्रसारण पर पाबंदी थी, जबकि वहां भारतीय फिल्मों को चाहने वालों की कमी नहीं है। यही नहीं, लाहौर और कराची में भारतीय फिल्मों और गानों की प्राइरेटेड सीडी धड़ल्ले से बिकती हैं, जिससे भारतीय फिल्म जगत को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि कुछ महीने पहले परवेज मुशर्रफ की सरकार ने पाकिस्तान में बॉलीवुड की कुछ फिल्मों को रिलीज करने की अनुमति दी।

इसके बाद ‘तारे जमीं पर’ और ‘भूतनाथ’ ने पाकिस्तानी थिएटर पर धमाल मचाया और हिट रही। यही नहीं, लॉलीवुड (कराची फिल्म इंडस्ट्री) ने भी भारतीय कलाकारों को लेकर ‘खुदा के लिए’ फिल्म बनाई, जिसे भारत में भी प्रदर्शित किया गया। विभाजन के समय भारतीय फिल्म उद्योग को भी गहरा सदमा लगा, क्योंकि हिंदी फिल्म संगीत की ‘सुर-कोकिला’ नूरजहां भारत छोड़कर पाकिस्तान चली गईं।
हालांकि पिछले कुछ समय से पाकिस्तानी कलाकार भारत में खूब परफॉर्म कर रहे हैं। इसकी शुरुआत नुसरत फतेह अली खान से हुई। जबकि इन दिनों राहत अली और अदनान सामी को भारतीय भी खूब पसंद कर रहे हैं।

First Published - May 20, 2008 | 2:11 AM IST

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