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फिर ट्रैक्टर पर सवार

Last Updated- December 07, 2022 | 1:41 AM IST

भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष ओम प्रकाश भट्ट को सोच समझकर अपने पत्ते फेंकने के लिए जाना जाता है।


पिछले हफ्ते शुक्रवार को उन्होंने कुछ ऐसा ही करते हुए कुछ समय के लिए कृषि उपकरणों की खरीद पर ऋण नहीं देने का फैसला लिया। उनका इरादा तेजी से बढ़ रहे फंसे हुए ऋण पर कुछ हद तक लगाम लगाने का था जो फिलहाल 7,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

एसबीआई के इस फैसले पर किसानों की ओर से कोई नाराजगी जताई जाती, उससे पहले ही इस फैसले ने राजनीतिक महकमे में खलबली मचा दी। मामले को गंभीर होता देखकर वित्त मंत्री पी चिदंबरम को हस्तक्षेप करना पड़ा और उनके कहने पर अगले ही दिन एसबीआई ने इस निर्णय को वापस ले लिया।

भट्ट को एसबीआई का नेतृत्व करने के लिए 5 साल का कार्यकाल मिला है। ऐसा पहली बार हुआ है कि उन्हें कहना पड़ा हो कि, ‘मुझे गलत समझा गया।’ भट्ट ने अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। वह खुद मानते हैं कि एसबीआई को उन्होंने नई रंगत दी है। पिछले साल के आखिर में उन्होंने 10,000 करोड़ रुपये का राइट इश्यू लाने के लिए केंद्र सरकार को राजी किया था।

यह देश का अब तक का सबसे बड़ा राइट इश्यू था और सबसे दिलचस्प है कि यह राइट इश्यू उस समय लाया गया था, जब आईपीओ का बाजार मंदा चल रहा था। लंबे समय से एसोसिएट्स बैंकों के एसबीआई में विलय को लेकर मामला लटका हुआ था। इसके लिए भी भट्ट ने सरकार को रजामंद करा लिया था।

ऐसा माना जाता है कि भट्ट को अनुभव है कि सरकार के साथ किसी मुद्दे को कैसे सुलझाया जाए। भट्ट 1972 बैच के कार्यकारी हैं और अपने माता-पिता के कहने पर वह बैंक से जुड़ गए थे। दरअसल, वह आईएएस बनना चाहते थे, पर क्योंकि उस दौरान एसबीआई की तनख्वाह ज्यादा थी, इस वजह से वह एसबीआई से जुड़ गए। शुरुआत के कुछ वर्षों में वह एक से दूसरी शाखाओं में घूमते रहे, पर उसके बाद वह पीजी काकोदकर के कॉरपोरेट कार्यालय में आ गए।

यहां उन्होंने कार्यकारी सहायक के तौर पर दबाव में भी बेहतर प्रदर्शन करने के गुर सीखे। मूल रूप से उत्तराखंड के भट्ट ने 2006 में एसबीआई के प्रबंध निदेशक पद से प्रोन्नत होकर अध्यक्ष का कार्यभार संभाला। कुर्सी संभालते ही भट्ट मार्केट शेयर को बढ़ाने में जुट गए। उन्होंने हर तिमाही में बैंक का बाजार शेयर 0.25 फीसदी बढ़ाने का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य तय किया।

उन्हें कर्मचारियों में जोश और उमंग भरने के लिए राष्ट्रव्यापी बदलाव प्रबंधन कार्यक्रम ‘परिवर्तन’ की शुरुआत करने के लिए भी जाना जाता है। साथ ही उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान बैंक में तकनीकी रूप से दक्ष कर्मचारिर्यों की भर्ती को बढ़ावा दिया। भट्ट खुद अपने काम और प्रयासों से काफी संतुष्ट नजर आते हैं और कहते हैं कि इसी तरह के दूसरे कार्यक्रमों के विकास के लिए अक्सर दूसरी कंपनियां उनसे मदद की मांग करती हैं।

भट्ट के नेतृत्व में बैंक ने बीमा, पेंशन और प्राइवेट इक्विटी क्षेत्र में काफी तरक्की की है। अब तक उनके कार्यों के लिए उन्हें सराहा जाता रहा है पर अगर एसबीआई पूंजी उगाहने के अपने प्रयास में और सफल हो जाता है तो उनके काम करने के तरीके को और सराहा जाएगा।

भट्ट ने पिछले महीने बिजनेस स्टैंडर्ड को दिए गए एक साक्षात्कार में कहा था, ‘आप एक नए एसबीआई को देख रहे हैं।’ पर उन्हें जो बात समझने में शायद थोड़ी देर लगी वह यह कि सरकार की अपनी राजनीति बाध्यताएं होती हैं, जो शायद कभी बदल नहीं सकतीं।

First Published - May 24, 2008 | 12:48 AM IST

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