धमाकों की गूंज दिल्ली के प्रमुख बाजारों में भी सुनाई देने लगी है। व्यापारी खौफजदा हैं, तो ग्राहक सहमे हुए हैं।
बाजार को आतंक के साये और ग्राहकों के पलायन से बचाने के लिए कारोबारी मंथन कर रहे हैं। उन्हें रमजान, नवरात्र व दीपावली के दौरान होने वाली जबरदस्त बिक्री के बैठ जाने का भय सता रहा है। प्रमुख कारोबारी संगठनों ने तो छुट्टी का दिन होने के बावजूद आगे की रणनीति तैयार करने के लिए बैठक बुलायी है, तो कुछ संगठनों ने सोमवार को इसके लिए समय तय किया है।
शनिवार को दिल्ली में हुए सीरियल धमाकों से दहले कारोबारी कहते हैं, ‘धमाके का सिलसिला ऐसे ही जारी रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब दिल्ली की थोक मंडी अपना चरित्र खो देगी। बाहर के लोग यहां आने से कतराने लगेंगे। फिर यह मंडी नहीं, स्थानीय बाजार बनकर रह जाएगा।’
कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के पदाधिकारियों ने बताया, ‘आने वाले दो महीने त्योहारी हैं, तो उसके बाद शादी-ब्याह का मौसम शुरू हो जाएगा। इस दौरान बिक्री दोगुनी हो जाती है, लेकिन बम विस्फोट से उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।’
उनके इस आशंका की पुष्टि रविवार को लाल किले के बाहर लगने वाले बाजार से गायब रौनक ने भी की। इन बाजारों में दुकानें तो सजीं, लेकिन ग्राहक अपेक्षाकृत काफी कम थे। दुकानदार रफीक कहते हैं, ‘बम नहीं फटता तो इस बाजार में शाम में पैर रखने की जगह नहीं होती।’
व्यापारियों के मुताबिक, धमाके से उनका कारोबार कम से कम एक महीने के लिए आधे से भी कम रह जाएगा। सदर बाजार, खारी बावली, कुतुब रोड, चांदनी चौक, करोल बाग, पान मंडी, लाजपत राय मार्केट जैसी जगहों पर दिल्ली समेत करीब 200-300 किलोमीटर की दूरी से आने वाले छोटे कारोबारी होते हैं।
दुकानदार धनीराम कहते हैं, ‘भीड़ से हर कोई कतरा रहा है। ऐसे में बाहर के कारोबारी किसी और बाजार में क्यों नहीं जाएंगे। चौकसी बढ़ाने पर भी वे इन थोक बाजारों में आने से कतराने लगते है, क्योंकि वे खरीदारी करने नकद लेकर आते हैं और चेकिंग के नाम पर उन्हें हर जगह इसे दिखाना पड़ता है। अहमदाबाद में होने वाले धमाके के बाद से ही लोग यहां से घबराने लगे थे।’
रोज लगेगी 50 करोड़ की चपत
त्योहारी मौसम में सदर बाजार व आसपास के अन्य थोक बाजारों से रोजाना लगभग 100 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। 50 फीसदी की कमी होने पर भी रोजाना 50 करोड़ रुपये की लगेगी चपत।
कौन-कौन से बाजार होंगे प्रभावित
करोल बाग, चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, किराना बाजार, तेलीवाड़ा, भागिरथ प्लैस, लाजपत राय, कमला नगर, लाजपत नगर, सरोजनी नगर आदि।
पुलिस ही लौटा सकती है खोया हौसला
आमोद कंठ, पूर्व पुलिस अधिकारी
दिल्ली के पूर्व पुलिस अधिकारी और 90 के दशक में दिल्ली में हुए सीरियल धमाके की जांच से जुड़े आमोद कंठ कहते हैं कि ऐसी स्थिति में लोगों का डरना लाजिमी है। जहां तक बम धमाके का सवाल है, तो अब यह एक चक्र (सायकल) बन चुका है और इस बार दिल्ली का नंबर था।
कहने का मतलब है कि यह खेल पुराना हो चला है। जहां तक लोगों के हौसले को वापस लाने की बात है, तो पुलिसिया कार्रवाई ही इसमें कारगर साबित हो सकती है। अगर अहमदाबाद में हुए धमाके के मास्टरमाइंड को पकड़ लेते तो दिल्ली में धमाका नहीं होता। सबसे पहले धमाके से जुड़े आतंकियों के सिंडिकेट को खत्म करना होगा। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था एवं संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े लोगों के साथ सख्ती होने पर ही लोग खुद को सुरक्षित महसूस करेंगे।