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बायोगैस योजना में होगा बदलाव

Last Updated- December 11, 2022 | 1:13 PM IST

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय सस्ते परिवहन के टिकाऊ विकल्प (एसएटीएटी) की योजना में बदलाव पर विचार कर रहा है। इसका मकसद कस्बाई और ग्रामीण इलाकों की छोटे स्तर की परियोजनाओं को प्रोत्साहन देना है। इसके लिए सरकार परिचालन संबंधी नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रही है।
 2018 में शुरू की गई एसएटीएटी का मकसद बायोमास के विभिन्न स्रोतों से कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) को प्रोत्साहन देना है। इसका शुरुआती लक्ष्य अगले 5 साल के दौरान 5,000 सीबीजी संयंत्र लगाना है। बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में अधिकारियों ने कहा कि इस परियोजना में तेजी लाने के लिए नया तरीका अपनाने की जरूरत है। मंत्रालय ने संसद को बताया की एसएटीएटी पहल के तहत जुलाई तक सिर्फ 35 परियोजनाएं स्थापित हुई हैं।

उसके बाद से पंजाब के संगरूर में एक परियोजना स्थापित की गई है, जिसकी क्षमता 33 टन सीबीडी प्रतिदिन है। इसका निर्माण जर्मन बायो-एनर्जी कंपनी वर्बियो एजी ने 220 करोड़ रुपये लागत से कराई है। संयंत्र में प्रतिदिन धान के 300 टन धान के पुआल का इस्तेमाल होगा। हाल के बहुप्रचारित संयंत्र को एशिया में अपने तरह का अनोखा संयंत्र कहा गया।
अधिकारियों ने कहा कि इस तरह भारी भरकम निवेश में वक्त लगेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘बड़े संयंत्र स्थापित होने से तमाम नौकरियों के सृजन होगा और कचरे को ऊर्जा में बदलने का माहौल बनेगा। लेकिन कृषि आधारित अक्षय ऊर्जा उत्पादन और पुआल जलाए जाने के मामलों में कमी लाने के लिए लक्ष्य तक पहुंचना जरूरी है। यह सरकार की ओर से तय समय सीमा के भीतर किया जाना है।’

उन्होंने कहा कि देश भर में फसलों के अवशेष को निपटाने के प्रभावी इंतजाम के लिए व्यापक भौगोलिक प्रसार जरूरी है।  उन्होंने कहा, ‘ऐसे में ग्रामीण इलाकों में छोटे संयंत्र लगाने को प्रोत्साहित करना ज्यादा जरूरी है। इसके लिए इन संयंत्रों के परिचालन संबंधी मानकों में बदलाव करना होगा। हम इस पर विचार कर रहे हैं।’

First Published - October 25, 2022 | 11:14 PM IST

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