देश में बाढ़ का सिलसिला साल दर साल चलता ही आ रहा है। और इसके साथ ही चल रहा हर साल हजारों लोगों की जान और हजारों करोड़ रुपये के नुकसान का सिलसिला।
केन्द्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 1953 से 2007 तक औसतन हर साल 1,597 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है जबकि औसतन 1817.07 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हुई है। 1977 में सबसे अधिक 11,316 लोगों की बाढ़ से मौत हुई जबकि 2000 में सबसे अधिक 8864.54 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ।
अब बिहार में बाढ़ की बात करते हैं। बिहार भारत का सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित राज्य है। राज्य की करीब 76 प्रतिशत आबादी और 73.06 प्रतिशत जमीन को हर साल बाढ़ की विभीषिका का सामना करना पड़ता है। कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला बलान, महानंदा और अधवारा नदियां हर साल नेपाल से तबाही का पानी लाती हैं लेकिन इसके बावजूद पिछले 60 सालों में सरकारें बाढ़ को रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना नहीं बना सकी हैं।
बिहार जल संसाधन विभाग के प्रभारी अजित कुमार सान्याल ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि पिछले 30 वर्षो के दौरान उत्तरी बिहार बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। बीते वर्षो के दौरान 1978, 1987, 1998, 2004 और 2007 में व्यापक विनाशलीला देखने को मिली है।
वर्ष 2007 में उत्तरी बिहार में भयानक बाढ़ आई। लगभग सभी नदियां लाल निशान को पार कर गई। विभिन्न स्थानों पर 28 तटबंध टूट गए। बूढ़ी गंडक और बागमती नदी घाटी में जुलाई और अगस्त के दौरान लगातार बारिश होती रही और जलस्तर लगातार बढ़ता रहा। लगभग पूरा उत्तरी बिहार बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ और जानमाल को भारी क्षति पहुंची।
हालांकि इससे पहले वर्ष 2005 और 2006 में स्थिति सामान्य रही। लेकिन वर्ष 2004 की बाढ़ में 23,490 वर्ग किलोमीटर में फैली खेती पानी में डूब गई थी। उत्तरी बिहार में भारी बारिश हुई। जुलाई के पहले सप्ताह ने बाढ़ ने 1987 के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। लगभग सभी नदियां अब तक के उच्चतम स्तर पर बह रही थीं। करीब 522 करोड़ रुपये की फसल और 1030 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ। इस दौरान 885 लोग मारे गए।
वर्ष 2003 में भागलपुर में गंगा के पानी ने 1978 के 34.18 मीटर के रिकॉर्ड तोड़ दिया। गांधीघाट पटना में भी पानी रिकॉर्ड स्तर पर जा पहुंचा। हालांकि गंगा और गंडक को छोड़कर बाकी नदियों में जलस्तर सामान्य था। वर्ष 2002 के साल में फिर उत्तरी बिहार को भारी बाढ़ का सामना करना पड़ा। पानी कमला बलान के बांध से ऊपर बहने लगा।
बाढ़ में 489 लोग मारे गए, 511.5 करोड़ रुपये की फसल बबाई हुई और 408.92 करोड़ रुपये की संपत्ति नष्ट हो गई। इसी तरह वर्ष 2001 मे नेपाल की नदी घाटियों में भारी बारिश के कारण उत्तरी बिहार बाढ़ से 267.22 करोड़ रुपये की फसल और 183.53 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ।