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उत्तराखंड में नहीं बनेगा टाइगर सफारी, NGT ने लगाई अंतरिम रोक

Last Updated- December 11, 2022 | 1:10 PM IST

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कालागढ़ टाइगर रिजर्व डिवीजन के कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में 600 पेड़ों को अवैध रूप से काटे जाने की खबर पर गौर करने के बाद उत्तराखंड में पखराउ टाइगर सफारी निर्माण पर अंतरिम रोक लगा दी है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए के गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने तीन सदस्यीय समिति का गठन किया और उसे इस पर एक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।

हरित पैनल ने कहा कि इस तरह के उल्लंघन और कानून की उचित प्रक्रिया के बाद बहाल पर्यावरण को नुकसान के लिए जवाबदेही तय करने की जरूरत है। ‘‘तदनुसार, हम उल्लंघनकर्ताओं की पहचान करने और पर्यावरण की बहाली के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए डीजी, वन विभाग, डीजी वन्यजीव विभाग और डीजी, प्रोजेक्ट टाइगर सहित तीन सदस्यीय समिति का गठन करते हैं। पीठ ने कहा, ‘‘विशिष्ट सिफारिशों के साथ इसकी रिपोर्ट सचिव, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (पर्यावरण और वन मंत्रालय) को एक महीने के भीतर प्रस्तुत की जा सकती है और अगले एक महीने के भीतर मामले में आगे की कार्रवाई के लिए कदमों को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

तब तक परियोजना की अनुमति नहीं दी जा सकती है। ’’ एनजीटी का यह आदेश उस खबर पर संज्ञान लेने के बाद आया है कि उत्तराखंड में कालागढ़ टाइगर रिजर्व डिवीजन में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में 600 पेड़ों को अवैध रूप से काटा गया है। इसने यह भी नोट किया कि भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई) को अवैध रूप से काटे गए पेड़ों की स्थिति का आकलन करने के लिए कहा गया था।
एफएसआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कालागढ़ वन प्रभाग में टाइगर सफारी शुरू करने के लिए 6,000 से अधिक पेड़ों को अवैध रूप से काटा गया था।

उत्तराखंड वन विभाग ने टाइगर सफारी परियोजना के लिए केंद्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की मंजूरी लेते हुए कहा था कि इस प्रक्रिया में केवल 163 पेड़ काटे जाएंगे, लेकिन एफएसआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कालागढ़ वन मंडल के पखराउ में टाइगर सफारी परियोजना के लिए 163 के स्थान पर 16.21 हेक्टेयर भूमि में 6,093 पेड़ काटे गए।

First Published - October 26, 2022 | 2:14 PM IST

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