अगर आप इनकम टैक्स भरते हैं तो ये खबर आपके काम की हो सकती है। बता दें कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने एक अप्रैल 2022 से 31 अगस्त 2022 के बीच 1.97 करोड़ करदाताओं का 1.14 लाख करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया है। सीबीडीटी (Central Board of Direct Taxes) के मुताबिक, इसमें से 61 हजार 252 करोड़ रुपए का रिफंड पर्सनल इनकम टैक्स रिफंड के रूप में 1.96 करोड़ करदाताओं को दिया गया है। वहीं 1,46,871 मामलों में 53,158 करोड़ रुपये कॉरपोरेट टैक्स रिफंड जारी कर दिया है।
ऐसे चैक करना होगा अपना रिफंड स्टेटस:
1. यूजर को आयकर पोर्टल में लॉग इन करने के लिए डालना होगा अपना आईडी पासवर्ड
2. माय अकाउंट में जाकर ‘रिफंड/डिमांड स्टेटस’ पर क्लिक करें।
3. आपके सामने सारी जानकारी आ जाएगी।
4. अगर आपको रिफंड नहीं मिला है, तो आप ‘कारण’ पर जाकर स्थिति की जांच कर सकते हैं।
रिटर्न न मिलने के हो सकते हैं ये कारण
दस्तावेजों का अभाव:
बता दें कि आपका रिफंड अतिरिक्त दस्तावेजों की कमी के कारण भी हो सकता है। इस समस्या के समाधान के लिए आपको कर अधिकारी से बात करनी होगी और आवश्यक दस्तावेजों को दोबारा जमा करना पड़ सकता है।
तकनीकी खामी:
अधिकारिक पोर्टल या आपके खाते से जुड़ी कोई तकनीकी समस्या के कारण भी आयकर रिफंड न आने की वजह हो सकती है। ऐसे में आप आयकर विभाग की हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं और विस्तृत जानकारी ले सकते हैं।
आयकर विभाग का हेल्पलाइन नंबर (आयकर संपर्क केंद्र, ASK का नंबर) 18001801961 है।
वेरिफिकेशन न होना:
रिफंड न मिलने का कारण वेरिफिकेशन भी हा सकता है। यदि आपका आईटीआर निर्धारित समय सीमा के भीतर सत्यापित नहीं होता है, तो इसे अमान्य माना जाएगा।
बता दें कि आयकर अधिनियम, 1961 के अनुसार, वेरिफाइड नहीं किए गए आईटीआर अमान्य हो जाते हैं।
बैंक से जुड़ी जानकारी में बदलाव:
यदि आपने अपने बैंक डिटेल में कोई बदलाव किया है तो इस वजह से भी आपका रिफंड न आने की वजह हो सकता है।
बता दें कि आपके प्राथमिक खाते के मोबाइल नंबर और ई-मेल जैसी जानकारी नए खाते से प्राप्त होती रहेगी, तो ही आपका खाता मान्य होगा। यदि जानकारी बदली गई है तो पोर्टल पर एक चेतावनी दिखाई देगी।
क्या होता है इनकम टैक्स रिफंड?
कंपनी अपने कर्मचारियों को के वेतन में से टैक्स का अनुमानित हिस्सा काटकर पहले ही सरकार के खाते में जमा कर देती है। वहीं कर्मचारी भी साल के आखिर में इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हैं, जिसमें वे बताते हैं कि टैक्स के रूप में उनकी तरफ से कितनी देनदारी है। यदि देनदारी पहले काट लिए गए टैक्स की रकम से कम है, तो शेष राशि इनकम टैक्स रिफंड के तौर में कर्मचारी को मिलती है।
आपको बता दें कि हर साल टैक्सपेयर्स (Taxpayers) को अपने टैक्स रिफंड के लिए एक निर्धारित समय तक टैक्स रिटर्न फाइल करना पड़ता है।