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दिखने लगा ट्रक हड़ताल का देशभर पर गहरा असर

Last Updated- December 07, 2022 | 9:01 AM IST

बुधवार से शुरू ट्रांसपोर्टर्स की देशव्यापी हड़ताल का असर दिखने लगा है। दूसरी ओर, सरकार ने भी साफ तौर पर कह दिया है कि टोल टैक्स में किसी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी।


ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने दावा किया है कि ट्रक व अन्य मालवाहक वाहनों की हड़ताल से प्रमुख बंदरगाह समेत ऑटोमोबाइल से जुड़ी कंपनियों के कारखानों में काम नहीं हो पाया। इन जगहों पर रोजाना के मुकाबले सिर्फ 5 फीसदी तक  माल को चढ़ाने व उतारने का काम हो सका।

दिल्ली की आजादपुर मंडी में बुधवार को मंगलवार के मुकाबले ट्रकों की आवाजाही में मामूली फर्क दिखा। ट्रांसपोर्ट कांग्रेस का कहना है कि उनकी तरफ से फल, सब्जी व दूध की आपूर्ति करने वाले ट्रकों के साथ नरमी बरती जा रही है। ताकि लोगों की आवश्यक जरूरतों की पूर्ति होती रहे। मोटर कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने बुधवार को परिवहन व हाईवे मंत्री टीआर बालू से मुलाकात की। बालू ने मोटर कांग्रेस के प्रतिनिधियों से कहा कि फरवरी में टोल टैक्स में की गई बढ़ोतरी काफी अधिक थी लेकिन यह संसद में पारित कानून के जरिए की गई है।

लिहाजा, बढ़े हुए कर को वापस लेना संभव नहीं है। उधर, सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज एंड कस्टम (सीबीईसी) के सदस्य वी. श्रीधर  ने कहा है कि वे ट्रांसपोर्टर्स को सेवा कर से राहत देने के बारे में विचार कर रहे हैं। ट्रक वालों ने जिन मांगों को लेकर हड़ताल शुरू की है, उनमें यह भी शामिल है। मोटर कांग्रेस के अध्यक्ष चरन सिंह लोहारा ने बताया कि परिवहन मंत्री से उनकी बातचीत विफल होने के बाद उन्होंने हड़ताल को जारी रखने का फैसला किया है। ट्रांसपोर्टर्स ने मुख्य रूप से टोल टैक्स व डीजल पर लगने वाले विभिन्न टैक्स में कमी की मांग की है।

मोटर कांग्रेस के अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि हड़ताल की वजह से मुंद्रा, हल्दिया, जेएनपीटी व मंगलोर जैसे प्रमुख बंदरगाहों से सामान की कोई ढुलाई नहीं हो सकी। उन्होंने दावा किया कि कार बनाने वाली प्रमुख कंपनियां, फोर्ड, हुंडई, मंहिद्रा की उत्पादन इकाइयों में भी हड़ताल के कारण कामकाज पूर्ण रूप से प्रभावित रहा। आजादपुर मंडी में मंगलवार के मुकाबले 142 कम ट्रक आए। एपीएमसी के आंकड़ों के मुताबिक मंगलवार को 1032 हल्के ट्रक तो 543 भारी ट्रक आए थे। बुधवार को यह संख्या क्रमश: 934 व 499 रही।

हालांकि इस बात की पूरी उम्मीद जाहिर की जा रही है कि गुरुवार से मंडी में आने वाले ट्रकों की संख्या में भारी गिरावट देखी जा सकती है। फल व सब्जी कारोबारियों का कहना है कि हड़ताल गुरुवार तक जारी रही तो शुक्रवार से निश्चित रूप से फलों व सब्जियों की कीमत 40-50 फीसदी तक बढ़ सकती है। ट्रांसपोर्टर्स की इस हड़ताल में कुल 48 लाख वाहन के शामिल होने का दावा किया गया है। मोटर कांग्रेस के मुताबिक इस हड़ताल की वजह से रोजाना 2000 करोड़ रुपये का कुल नुकसान हो रहा है। 

कई राज्यों में कारोबार पर आई आंच

लखनऊ : ट्रक ऑपरेटरों की हड़ताल का असर उत्तर प्रदेश के बाजारों में दिखने लगा है। देशव्यापी हड़ताल के चलते प्रदेश में जरूरी सामानों की आपूर्ति पर असर पड़ा है। फल मंडी में ट्रक की हड़ताल के चलते करोड़ों का माल फंसा हुआ है। आम के मौसम में हुई हड़ताल के चलते प्रदेश के आम निर्यातकों को खासा नुकसान हो रहा है। सब्जियों की कीमतों मे उछाल देखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि निर्यात के ऑर्डर की डिलीवरी का दबाव आम उत्पादकों पर है और ट्रक हड़ताल के चलते नए ऑर्डर लेने से उत्पादक कतरा रहे हैं।

मुंबई : महाराष्ट्र का सबसे बड़ा फल,फूल, अनाज और सब्जी के बाजार एपीएमसी में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का असर दिखाई देने लगा है। औसत कारोबारी दिन में 1460 ट्रक माल बाजार में आता है, लेकिन बुधवार को  बाजार में सिर्फ 1113 ट्रक ही माल आ सका। सबसे ज्यादा असर मसाला और अनाज बाजार में पड़ा। औसतन मसाला बाजार में 228 और अनाज बाजार में 379 ट्रक आते हैं लेकिन बुधवार को यहां क्रमश: 146 और 213 ट्रक ही आ सके। ट्रांसपोर्टरों को 400 करोड़ रुपये से ज्यादा की चपत लगने का अनुमान है। समय पर माल न पहुंचने की वजह से अन्य कारोबारियों को भी करोड़ों के नुकसान की आशंका है।

भोपाल : ट्रक ऑपरेटरों की देशव्यापी हड़ताल का असर मध्यप्रदेश में भी कारोबार पर दिखा। भोपाल ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक मालपानी ने बताया कि हड़ताल का पहला दिन सफल रहा। हालांकि बाहर से आए कुछ ट्रकों को लोडिंग-अनलोडिंग की अनुमति दी गई। उन्होंने बताया कि राज्य के एक लाख ट्रक और 3000 पंजीकृत ट्रांसपोर्टर हड़ताल पर रहे। इसकी वजह से कारखानों में माल की आपूर्ति नहीं हो सकी, वहीं दूध की आपूर्ति व थोक बाजार पर भी इसका असर दिखा।

…और आज भारत बंद : कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने भाजपा के आह्वान पर गुरुवार को होने वाले भारत बंद के फैसले को  पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया है। अमरनाथ श्राइन बोर्ड को भूमि हस्तांतरित के मसले पर इस बंद का आयोजन किया गया है। कनफेडरेशन के मुताबिक गुरुवार को देश भर के पांच करोड़ व्यापारी इस बंद में शामिल हो रहे हैं। उनका दावा है कि दिल्ली के सदर बाजार, चांदनी चौक, कश्मीरी गेट, कमला नगर, करोल बाग, लाजपत नगर, कीर्ति नगर, गांधी नगर समेत तमाम प्रमुख बाजार गुरुवार को बंद रहेंगे। कनफेडरेशन से जुड़े अन्य प्रांतों के कारोबारियों ने भी अपनी दुकानों को बंद रखने का फैसला किया है।

First Published - July 2, 2008 | 11:34 PM IST

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