उत्तर प्रदेश के पूर्वी और मध्य क्षेत्र से मजदूरों का कमाई के लिए पंजाब और हरियाणा जाना थम-सा गया है।
दो साल पहले कमाई के लिए पंजाब और हरियाणा के रुख करने वाले इन इलाकों में आज स्थिति ठीक उलट गयी है। इस साल मानसून के समय के पहले आ जाने के बाद उत्तर प्रदेश के तराई इलाकों में खासी तादाद में राजस्थान के हरियाणा से सटे इलाकों के लोग मजदूरी करने आए हैं।
धनी किसानों सहित मजदूरों का कहना है कि ऐसी हालात राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) के आने के बाद मजदूरी बढ़ने से हुई है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून बेहतर होने और समय से आने के चलते फसल बढ़िया हो रही है और मजदूरों को अपने श्रम की अच्छी कीमत मिल रही है। इस सब के चलते पंजाब और हरियाणा की ओर पलायन रुका है।
नरेगा के चलते खेती के लिए अच्छे माने जाने वाले जिलों में मजदूरी के दाम चढ़कर 100 रुपये से ज्यादा जा पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश के परंपरागत रूप से पिछड़े इलाकों- बहराइच, गोंडा, बलरामपुर और सिध्दार्थ नगर जिलों में अब मजदूरी के दाम सीजन में 80 रुपये हो गए हैं। बलरामपुर के जद्दापुर गांव के प्रधान विभूति सिंह बताते हैं कि नरेगा में काम करने के बाद ज्यादातर मजदूर अब खेतों में काम करने को तैयार नहीं हैं। सिंह के मुताबिक, नरेगा में मजदूरी भी अच्छी मिलती है और काम का बोझ भी कम रहता है।
उन्होंने बताया कि इस बार राजस्थान के श्रीगंगानगर से गेंहू के सीजन में ट्रैक्टरों में भरकर मजदूर आए थे पूर्वी उत्तर प्देश में काम करने के लिए। जाते समय मजदूरों ने धान के सीजन में फिर आने का वादा किया था। इस साल एक बार फिर राजस्थान के मजदूरों की आमद शुरू हो गयी है।
लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. अजय प्रकाश के मुताबिक, पंजाब और हरियाणा में मजदूरी करने में अब कोई खास फायदा नहीं रह गया है। अजय के अनुसार नरेगा के अलावा भी उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी की दर को बढ़ाकर 100 रुपये प्रतिदिन कर दिया है, जिससे मजदूरों को फायदा होने लगा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बीते कुछ सालों से फसल अच्छी हो रही है, जिसके चलते अन्य राज्यों के मजदूर भी यहां खप जा रहे हैं।