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रुपये में कमजोरी से विदेशी ​शिक्षा के लिए बढ़ेंगी दिक्कतें

Last Updated- December 11, 2022 | 6:10 PM IST

चालू कैलेंडर वर्ष की शुरुआत से अब तक डॉलर के मुकाबले रुपया 5 प्रतिशत कमजोर हुआ है। इसे देखते हुए विशेषज्ञों ने कहा है कि शिक्षा ऋण लेकर विदेश में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को मुद्रा में उतार चढ़ाव के झटकों से कुछ समय के लिए बचाया गया है, लेकिन अगर रुपया आगे और गिरता है तो विद्यार्थियों पर बोझ बढ़ेगा।
एचडीएफसी क्रेडिला फाइनैंशियल सर्विसेज के एमडी और सीईओ अरिजित सान्याल ने कहा, ‘डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में गिरावट की वजह से शिक्षा के लिए अमेरिका जाने वाले विद्यार्थियों की लागत बढ़ने की उम्मीद है। जो कर्ज जारी किया जाता है, उसमें मुद्रा में थोड़े बहुत उतार चढ़ाव का ध्यान रखा जाता है। जो ऋण जारी किया जाता है,  वह सामान्यतया अध्ययन की अवधि में आने वाले खर्च की भरपाई के लिए पर्याप्त होता है।’
विदेश जाने वाले 3000 से ज्यादा भारतीय विद्यार्थियों को 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा कर्ज दे चुकी पहली डिजिटल कंपनी ज्ञानधन के सह संस्थापक और सीईओ अंकित मेहरा ने कहा कि रुपये की कीमत में गिरावट अचानक हुई है, और हम विद्यार्थियों को कर्ज देने में मुद्रा में 5 प्रतिशत तक गिरावट को ध्यान में रखकर बजट बनाते हैं।
उन्होंने कहा, ‘अगर गणना में आप इसका ध्यान रखते हैं तो यह समस्या नहीं होगी। हालांकि रुपया बहुत ज्यादा गिर गया है, लेकिन कुल मिलाकर इससे स्थिति में कोई नाटकीय बदलाव नहीं आएगा।’
आईडीबीआई बैंक के एक अधिकारी ने कहा कि कर्ज रुपये में दिया जाता है और विद्यार्थी की जरूरत के मुताबिक  इसे भाव के मुताबिक डॉलर में तब्दील किया जाता है। तकनीकी रूप से विद्यार्थी उस समय कम  डॉलर पाएगा, जब रुपया कमजोर होगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा आकलन के हिसाब से देखें तो  अभी कमजोर रुपये का प्रबंधन किया जा सकता है। फरवरी में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से भारतीय रुपया लगातार गिर रहा है। भारत के केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने विदेशी विनिमय बाजार में समय समय पर हस्तक्षेप किया है और गिरावट को धीमा करने की कोशिश की है।
इस सप्ताह डॉलर के मुकाबले रुपया 78 के पार चला गया और इस सप्ताह बिजनेस स्टैंडर्ड की ओर से कराए गए पोल के मुताबिक निकट भविष्य के हिसाब से रुपये में और गिरावट आ सकती है। इसके तेजी से  गिरने की संभावना नहीं है क्योंकि रिजर्व बैंक  डॉलर खरीदकर अपना समर्थन जारी रख सकता है।
केंद्रीय बैंक विदेशी विनिमय बाजार में अपना हस्तक्षेप जारी रख सकता है, वहीं रुपये पर आगे और दबाव बने रहने की संभावना है। मूल धारणा कमजोर होने और कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बने रहने की वजह से चिंता बढ़ी है। साथ ही व्यापार घाटा भी बढ़ने की संभावना है। रुपये में 2022 में डॉलर के मुकाबले 4.8 प्रतिशत की गिरावट आई है।

First Published - June 20, 2022 | 1:05 AM IST

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