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गृह मंत्रालय ने क्यों केजरीवाल सरकार की Mohalla Clinics के खिलाफ दिए CBI जांच के आदेश? AAP ने भी किया स्वागत

स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने राज्य के गृह मंत्रालय द्वारा दिए गए CBI जांच के आदेश का स्वागत किया है और स्वास्थ्य विभाग के सचिव को तुरंत निलंबित करने की मांग की है।

Last Updated- January 05, 2024 | 11:31 PM IST
Why did the Home Ministry order a CBI inquiry against the Mohalla Clinics of the Kejriwal government? AAP also welcomed

दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर लगातार केंद्रीय जांच एजेंसियां धावा बोल रही हैं। एक तरफ जहां खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ED का लगातार समन मिल रहा है वहीं, दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के.सक्सेना की सिफारिश पर भारत के गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को CBI जांच के आदेश दे दिए हैं। यह जांच दिल्ली सरकार के अस्पतालों में ‘घटिया’ दवाओं की सप्लाई से जुड़ी है। माना जा रहा है कि दिल्ली सरकार द्वारा संचालित आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक (AAMCs) में फर्जी लैब जांच, घटिया दवाओं की सप्लाई और डॉक्टरों की अटेंडेंस में काफी अनियमितताएं पाई गईं हैं। इस बीच आइये जानते हैं क्यों सौंपी गई जांच और क्या है दिल्ली सरकार का पक्ष

तीन सरकारी अस्पतालों से घटिया दवाओं के नमूने मिलने के बाद उपराज्यपाल सक्सेना ने जांच के आदेश दिए हैं। इन अस्पतालों में हो रही कथित अनियमितताओं तब पकड़ में आईं जब राज्य के सतर्कता और स्वास्थ्य विभागों ने 2023 में जांच की और पाया कि घटिया दवाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है।

उपराज्यपाल के सामने दाखिल की गई सतर्कता विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि 43 दवाओं के नमूने जांच के लिए सरकारी लैब में भेजे गए थे, जिनमें से तीन मानकों पर खरी नहीं उतरीं और 12 की रिपोर्ट लंबित है। इनके अलावा 43 अन्य नमूनों को प्राइवेट लेब में भेजा गया था, जिसमें से पांच मानकों पर खरा नहीं उतरे।

जांच में और क्या मिला?

अगस्त महीने में जब राज्य के सतर्कता और स्वास्थ्य विभागों ने यह पाया कि मोहल्ला क्लिनिकों में काम कर रहे डॉक्टर फर्जी अटेंडेंस बना रहे हैं कई अस्पताल ही नहीं आ रहे हैं, जबकि उनकी जगह पर कोई ऐसा व्यक्ति दवाएं लिख रहा है जिसका उस अस्पताल से कोई ताल्लुक नहीं है।

उसके बाद फिर एक जांच की गई, जिसमें पाया गया कि डॉक्टरों ने 24,399 लैब जांच प्राइवेट अस्पतालों को रिफर की हैं, और उसमें दिया गया नंबर फर्जी है। जबकि, ये जांच सरकारी अस्पतालों के लैब में हो सकती थी और ये फ्री में की जा सकती थी। माना जा रहा है कि इसी को आधार बनाते हुए उपराज्यपाल सक्केना ने जांच की सिफारिश की।

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने किया स्वागत

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भारद्वाज ने कहा कि उन्होंने पिछले साल मार्च में स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाली और उसके तुरंत बाद दवाओं का ऑडिट करने का निर्देश जारी किया था लेकिन (दिल्ली सरकार) स्वास्थ्य सचिव ने निर्देशों का पालन नहीं किया।

उन्होंने कहा, ‘इस मामले में मैं CBI जांच का स्वागत करता हूं लेकिन क्यों केंद्र अधिकारियों को बचा रहा है? उन्हें (स्वास्थ्य विभाग के सचिव) तुरंत निलंबित किया जाना चाहिए।’

गौरतलब है कि सक्सेना ने कथित तौर पर गुणवत्ता मानक परीक्षणों में विफल रहने वाली दवाओं की सप्लाई के मामले में दिसंबर में CBI जांच की सिफारिश की थी।

First Published - January 5, 2024 | 3:55 PM IST

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