हरियाणा सरकार राज्य में बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए चालू वित्त वर्ष में 5615.18 करोड़ रुपये निवेश करेगी।
राज्य सरकार के प्र्रवक्ता ने बताया कि हरियाणा पावर यूटिलिटीज की ओर से वर्ष 2007-08 के दौरान 3409.50 करोड़ रुपये खर्च किया गया, वहीं 2006-07 के दौरान 2534.30 करोड़ रुपये खर्च किया गया। उन्होंने बताया कि बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है।
मांग-आपूर्ति
वर्तमान में बिजली का कुल उत्पादन 5000 मेगावॉट है, जबकि मांग 9000 मेगावॉट है। इससे बिजली संकट का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। यही नहीं, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में और बढ़ते शहरीकरण की वजह से राज्य में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है।
आगामी योजना
राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि बिजली उत्पादन और आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए एचपीजीसीएल, एचवीपीएनएल, यूएचबीवीएनएल और डीएचबीवीएनएल क्रमश: 2951.13 करोड़ रुपये, 997 करोड़ रुपये, 722.74 करोड़ रुपये और 944.3 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है। इसके तहत हिसार के कोयला आधारित प्लांट से 1200 मेगावॉट बिजली उत्पादन के लिए 1895.80 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है।
इसके साथ ही यमुनानगर थर्मल प्लांट के विस्तार पर 454.90 करोड़ रुपये खर्च किया जाएगा। झार स्थित 1500 मेगावॉट के सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए सरकार की ओर से 100 करोड़ रुपये और यमुनानगर थर्मल प्लांट के लिए 234.58 करोड़ रुपये जारी किया गया है। पानीपत और फरीदाबाद स्थित थर्मल प्लांट के आधुनिकीकरण पर 102 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है।
वितरण व्यवस्था दुरुस्त
इसके साथ ही बिजली वितरण की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए तमाम उपाय अपनाए जा रहे हैं, जिससे उपभोक्ता को बिजली कटौती की समस्या का सामना न करना पड़े। इसके लिए तीन 220 केवी सब-स्टेशन, 132 केवी के 18, 66 कवी के 16 और 33 केवी के 95 सब-स्टेशन स्थापित करने की योजना है। वर्तमान में करीब 100 सब-स्टेशन है, जिस पर काफी ज्यादा लोड है। यही वजह है कि बिजली की आपूर्ति में बाधा आती है।
वितरक कंपनियां 11 केवी के फीडर के जरिए ग्रामीण और शहरी, दोनों इलाकों में बिजली आपूर्ति की तैयारी कर रही है। वितरक कंपनियों को जून के अंत तक अपने वितरण नेटवर्क को दुरुस्त करने को कहा गया है, ताकि धान के मौसम में किसानों को बिजली किल्लत का सामना न करना पड़े।
बीपीएल पर ध्यान
राज्य सरकार की ओर से राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले एक लाख लोगों बिजली कनेक्शन मुहैया कराई गई है। साथ ही सभी आवेदकों को दो सीएफएल बल्ब भी मुफ्त में दिया गया है। बिजली की मांग को देखते हुए 150 करोड़ रुपये और वोल्टेज सुधार के लिए 293 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है।
राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि योजना के कार्यान्वयन के लिए कंपनियों के प्रबंध निदेशकों से बात की गई है और हर दो महीने में योजना के विकास की समीक्षा की जानी है।
प्रादेशिक आइना
हरियाणा – हाल-ए-बिजली
चालू वित्त वर्ष में बिजली उत्पादन और वितरण पर 5615.18 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना
मांग 9000 मेगावॉट, जबकि आपूर्ति हो रही है 5000 मेगावॉट
शहरीकरण की वजह से बढ़ रही है बिजली की मांग
नई परियोजना होगी शुरू, पुराने संयंत्रों के आधुनिकीकरण पर भी है ध्यान