मेवात जिले के ग्रामीण इलाकों में चल रहे इलाकाई विकास योजना से ग्रामीणों की जिंदगी में खासा बदलाव आया है।
एक साल पहले जहां इलाके के किसानों के पास काम नहीं था, वहीं अब बहुआयामी कार्य शुरू किए गए हैं। खेती के साथ ही किसानों को दुग्ध उत्पादन जैसे नकदी कारोबार से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही उनके उत्पादों को बाजार से जोड़ने के लिए विस्तृत सड़क निर्माण योजनाएं चल रही हैं।
मेवात के पिछड़े इलाके मांडीखेड़ा के हेतराम बताते हैं, ‘पहले हम खेती पर निर्भर थे। अब किसानों ने खेती के साथ दुधारू पशुओं को भी पालना शुरू कर दिया है। गांव में मिल्क चिलर्स लग जाने से दूध बर्बाद नहीं होता और उसे डेयरी बोर्ड वाले आकर ले जाते हैं, जिससे अच्छी कमाई हो जाती है।’
इलाकाई विकास योजना (क्लस्टर डेवलपमेंट) के तहत घाघस, मांडीखेड़ा, जलालपुर, खेरी कला, गुलालटा, गुनकशर, नई नंगला, बचेनका, अनरोला सहित 10 गांवों को चुना गया है। यहां पर 10 बल्क मिल्क चिलर्स लगाए गए हैं, जिसकी क्षमता प्रति चिलर्स 1000 लीटर है। आसपास के इलाके के किसान दुग्ध उत्पादन करते हैं और उसे लाकर यहां रख देते हैं।
गांवों में दुग्ध उत्पादक समितियां बनी हैं, जो दूध का देखभाल करती हैं और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के माध्यम से इसकी मार्केटिंग की जाती है। दूध का उचित दाम देने का भी पुख्ता इंतजाम है। किसानों को 17 रुपये प्रति लीटर की दर से दाम मिलते हैं।
इसके अलावा कृषि उत्पाद के क्षेत्र में विभिन्न इलाकों में बैगन, मूली, टमाटर, प्याज के लिए जमीनों का चुनाव किया गया है, जिसके लिए राज्य सरकार की ओर से 28.20 लाख रुपये जारी किए गए हैं। आर्गेनिक फार्मिंग, जल प्रबंधन के क्षेत्र में भी कोशिशें तेज कर दी गई हैं।
मेवात डेवलपमेंट एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अतर सिंह अहलावत कहते हैं, ‘पहले यहां दूधियों का राज चलता था। वे किसानों को मनमाने ब्याज दरों पर दुधारू पशु खरीदने के लिए पैसे देते थे और मनमाने दर पर ही दूध खरीदा करते थे। इसलिए इस योजना से दूधियों को पूरी तरह से दूर कर दिया गया है। दुग्ध उत्पादक समितियों में केवल किसानों को रखा गया है।’
इन गांवों से इस समय प्रतिदिन करीब 1290 लीटर दूध का संचय हो जाता है। अब तक इस काम में 236 इसके अलावा 1705 किसानों को फसल लोन, 190 किसानों को डेयरी लोन और 9 अति पिछड़े किसानों को सरकार की कम ब्याज वाली डीआरआई योजना के तहत 4 प्रतिशत ब्याज पर कर्ज उपलब्ध कराया गया है। इस तरह से इस वित्तीय साल में कुल 18 करोड़ रुपये कर्ज दिए गए हैं।
मेवात में स्वास्थ्य क्षेत्र में भी परिवर्तन साफ नजर आता है। इलाके में सबसे सफल योजना डिलिवरी हट की रही है। यह योजना 2 अक्टूबर, 2007 को लागू की गई, लेकिन साल भर के भीतर यह योजना क्षेत्र में लोकप्रिय हो गई। इसके तहत 9 डिलिवरी वैन हर ब्लॉक में आपातकालीन सेवाओं के लिए सक्रिय रहती हैं।
इसका फायदा यह हुआ कि राज्य के 1000 पर 860 महिलाओं के लिंगानुपात की जगह इस क्षेत्र में जून 2008 में लिंगानुपात बढ़कर 930 के सम्मानजनक स्तर पर पहुंच चुका है। कुछ साल पहले जहां 70 प्रतिशत डिलिवरी असुरक्षित और घरों में होती थीं, अब 55 प्रतिशत से अधिक मामले अस्पताल में आते हैं।
राज्य के मुख्यमंत्री भुपिंदर सिंह हुड्डा कहते हैं, ‘यह योजना हमने अपने राज्य के सबसे पिछड़ा कहे जाने वाले इलाके मेवात में शुरू की थी, लेकिन इसकी अभूतपूर्व सफलता को देखते हुए राज्य के हर जिले में शुरू करने पर विचार किया जा रहा है।’ इसके साथ ही मेवात क्षेत्र में सड़कों के विकास के लिए 653 करोड़ रुपये से अधिक की योजना चल रही है।
हरियाणा के लोक निर्माण मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव ने कहा, ‘इलाके के विकास के लिए गुड़गांव-अलवर रोड, होडल-नूंह-पटौदी-पटियाला मार्ग पर सुधार कार्य चल रहे हैं। मेवात क्षेत्र में ही इस सड़क का पूर्व-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर के चौराहे का निर्माण होगा।
सड़कों को चार लेन करने का काम युध्द स्तर पर चल रहा है।’ सोलपुर कोलेगांव दोहा, पलवल-हातिन-उतावर रोड सहित कई अन्य सड़कों के निर्माण के लिए स्वीकृति मिल चुकी है।
(समाप्त)