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सरकारी रहमत के बिना ही कारोबारी करने चले कायापलट

Last Updated- December 07, 2022 | 9:03 AM IST

जर्जर-पुरानी इमारतों की जगह आलीशान बिल्डिंग, टपकती छत वाले फ्लैट के बदले चमचमाता फ्लैट और कंपनी के कुछ शेयर बॉन्ड भी।


यह कोई कोरी कल्पना नहीं, बल्कि मध्य मुंबई के सबसे पुराने कारोबारियों का गढ़ समझे जाने वाले मुंबई-सी वार्ड के बाशिंदों को यह सब कुछ हकीकत में मिलने वाला है। दिलचस्प यह कि इस क्षेत्र का विकास सरकार नहीं, बल्कि इस काम के लिए यहां के कारोबारी और निवासी खुद आगे आए हैं।

सी-वार्ड के विकास के लिए यहां के कारोबारियों और निवासियों ने रीमेकिंग ऑफ मुंबई फेडरेशन (आरओएमएफ) नामक संस्था बनाई है, जो इस क्षेत्र के विकास में लगी है। लगभग 20 हजार करोड़ रुपये की इस योजना के तहत सरकार को इस क्षेत्र का इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधारने के लिए 1500 करोड़ रुपये और 5000 बने बनाए फ्लैट मुफ्त दिए जाएंगे। जिन्हें सरकार गरीबों को मुफ्त में बांटेगी।

96 हजार की जनसंख्या वाले सी वार्ड इलाके में 5 से 6 लाख लोग कारोबार करते हैं। 212 एकड़ क्षेत्रफल में फैले इस क्षेत्र में कुल 2202 इमारतें हैं। इनमें से 1777 पुरानी और जर्जर इमारतें हैं, जो 1940 से पहले की बनी हुईं हैं। आरओएमएफ के चेयरमैन ललित गांधी बताते हैं कि 26 जुलाई, 2005 को मुंबई में आई बाढ क़े दौरान जर्जर इमारतों के गिरने के बाद हुई मौतों को देखकर मन में विचार आया कि सरकारी योजनाओं का इंतजार किए बिना क्यों न हम लोग मिलकर इस क्षेत्र का विकास करें।

संस्था के सचिव मयंक गांधी बताते हैं कि इस क्षेत्र के विकास में लगभग 15 से 20 हजार रुपये का खर्च आएगा। पूरे 212 एकड़ की जमीन में सिर्फ 30 फीसदी हिस्से में बिल्डिंग खड़ी की जाएगी। यहां खडी क़ी जाने वाली इमारतें 50 से 100 मंजिल तक की होंगी। इसके अलावा, इनमें एक ऐसी बिल्डिंग भी बनाई जाएगी, जो मुंबई की पहचान होगी। यहां पर जिसका जितने एरिया का फ्लैट है, उसको उतनी ही एरिया का फ्लैट बना कर दे दिया जाएगा। इसके अलावा, उन्हें बॉन्ड भी दिए जाएंगे, जो तीन साल के बाद कंपनी की इक्विटी में बदल जाएंगे।

सी-वार्ड के कायापलट का काम अक्टूबर तक शुरू हो जाएगा। इस काम में दिलचस्पी लेते हुए महाराष्ट्र सरकार भी इन्हें सहयोग देने की बात कर रही है। इस क्षेत्र के विकास में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए सरकार ने टेक्निकल कमेटी का गठन किया है, जो अगले दो-तीन महीनों में अपनी रिपोर्ट देगी। इस क्षेत्र के विकास में सबसे बड़ी बाधा सरकार का सीआरजेड-2 कानून है, जिसके तहत समुद्र किनारे से 500 मीटर तक किसी तरह का निमार्ण नहीं किया जा सकता है।

इस पर ललित गांधी कहते हैं कि यह कानून यहां पर लागू नहीं होता है, क्योकि सीआरजेड कानून 1991 में बना है, जबकि यहां पर खडी इमारतें 1940 से पहले की हैं। तंग गलियों और जर्जर इमारतों के बावजूद यह हर दिन अरबों रुपये का कारोबार किया जाता है। इस क्षेत्र में मुंबई का नाम देने वाली मुंबा देवी का मंदिर और कारोबारियों गलियारों की पहचान बताने वाली कालबा देवी का मंदिर स्थित है। यहां एशिया का सबसे बड़ा कपड़ा बाजार और देश की सबसे बड़ी सोने-चांदी की मंडी झावेरी बाजार भी है।

इसके अलावा, दागीना बाजार, मेटल मार्केट, स्टेशनरी मार्केट, बैग, फूल ,छाता, स्टील बर्तन और गिफ्ट के थोक एवं खुदरा व्यवसाय जैसे बड़े बाजार यहां की पहचान हैं। यहां पर रहने वाले लोगों में ज्यादातर किरायेदार हैं, जो 40-50 साल से किराये पर रह रहे हैं। सरकारी योजना के तहत इनको निकाला नहीं जा सकता है, लेकिन यदि ये फ्लैट बेचते हैं, तो उसकी 30 फीसदी कीमत मकान मालिक को देनी होगी। इस योजना के तहत जो फ्लैट मिलेंगे, वे यहां वर्षों से रह रहे करायेदारों को ही मिलेगें। पूरे प्रोजेक्ट में यहां के जमीन मालिकों को 10 फीसदी की हिस्सेदारी दी जा रही है।

First Published - July 3, 2008 | 11:17 PM IST

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