आज ( 15 अक्टूबर ) को भारत कि 11वें राष्ट्रपति और मिसाइलमैन अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम की 91वीं जयंती है। उनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम् में हुआ था। उनका जन्म एक साधारण मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम और माता का नाम आशिमा था।
गरीब परिवार में जन्मे कलाम को पैसों कि अहमियत शायद बचपन से ही समझ आ गई थी। कलाम के ऊपर लिखी एक किताब में इसका जिक्र है कि वे महज 8 साल की उम्र में कमाना सीख गए थे। उस समय ( 1939 ) द्वितीय विश्व युद्ध चल रहा था। तब उन्होंने इमली की बीज बेच कर पैसे कमाए। आपको बता दें, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इमली के बीज से एक खास किस्म का पाउडर बनाया जाता था। जिसका उपयोग युद्ध में काम आने वाली गाड़ियों के ईंधन बनाने के लिए किया जाता था। जिसके कारण इमली के बीजों की कीमत में बढ़ोतरी हुई और कलम को उन्हें बेच कर पैसा कमाने का विचार आया।
इतना ही नहीं, बल्कि कलाम ने अपने चचेरे भाई के साथ मिल कर ट्रेन से अखाबर के बंडल फेंकने का भी काम किया था। कलाम अपने चचेरे भाई शमसुद्दीन से बहुत प्रेरित थे। जिसका जिक्र उन्होंने अपनी किताब ‘माइ जर्नी: ट्रांसफॉर्मिंग ड्रीम्स इंटु ऐक्शंस’ में भी किया था। शमसुद्दीन चचेरे भाई होने के साथ-साथ उनकी बड़ी बहन के पति भी थे। जिनका योगदान उनकी आगे की पढ़ाई में बहुत था।
साल 1981 में भारत सरकार ने कलाम साहब को पद्म भूषण, साल 1990 में पद्म विभूषण और साल 1997 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा था। वह भारत रत्न पाने वाले देश के तीसरे राष्ट्रपति हैं। उनसे पहले सर्वपल्ली राधाकृष्णन और जाकिर हुसैन को भरात रत्न से नवाजा गया था।
साल 1992 में एपीजे अब्दुल कलाम को रक्षा सलाहाकार नियुक्त किया गया। उनके कार्यकाल के दौरान ही अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने साल 1996 में पोखरण में दूसरी बार परमाणु में दूसरी बार परमाणु परीक्षण किया था। फिर साल 2002 में वे भारत के 11वें राष्ट्रपति बने।
83 वर्षीय एपीजे अब्दुल कलाम का निधन 27 जुलाई 2015 को मेघालय के शिलांग में हुआ था। वे उस समय वहां लेक्चर देने गए थे। जहाँ दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई।