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अपनी अनूठी, चंचल शोख आवाज से हिंदी पार्श्व गायन में अलग मुकाम हासिल करने वाली 92 वर्षीय दिग्गज गायिका आशा भोसले का रविवार को निधन हो गया। भोसले को शनिवार शाम सीने में संक्रमण और कमजोरी के चलते मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनका अंतिम संस्कार सोमवार मुंबई के शिवाजी पार्क में किया जाएगा।
आशा ने अपनी बहन तथा महान गायिका लता मंगेशकर की छाया में रहकर अपनी अलग पहचान बनाई थी। आशा ने अपनी बहन लता के साथ मिलकर सात दशकों तक हिंदी पार्श्व गायन की दुनिया पर राज किया। बॉलीवुड में फिल्मी अभिनेत्रियों के लिए रिकॉर्ड किए गए लगभग हर फिल्मी गाने में उन्होंने अपनी आवाज दी। आठ दशकों से अधिक लंबे करियर में आशा ने अविश्वसनीय रूप से 12,000 गाने रिकॉर्ड किए। उनका पहला गाना 1943 में 10 वर्ष की आयु में मराठी फिल्म ‘माझा बल’ के लिए था।
उन्होंने 2010 के दशक के अंत तक और उसके बाद भी गायन जारी रखा, जिससे वह वैश्विक संगीत इतिहास में सबसे लंबे समय तक गायन करने वाली गायिका बन गईं। दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म विभूषण, राष्ट्रीय पुरस्कार सहित कई अन्य संगीत सम्मानों से नवाजी जाने वाली आशा ने परंपराओं को तोड़ते हुए सिनेमा में महिलाओं की आवाज को गहराई दी, चाहे वह ‘हम इंतजार करेंगे’ में विरह से भरी मीना कुमारी हों या ‘पिया तू अब तो आजा’ में बेबाक और मदहोश हेलेन हों।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दशकों तक भोसले की असाधारण संगीतमय यात्रा ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया और दुनिया भर में अनगिनत दिलों को छुआ। मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘भारत की सबसे प्रतिष्ठित और बहुमुखी आवाजों में से एक, आशा भोसले जी के निधन से मैं बेहद दुखी हूं। उनके साथ हुई बातचीत की यादें मेरे दिल में हमेशा बसी रहेंगी। उनके परिवार, प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। वह पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी और उनके गीत हमेशा लोगों के जीवन में गूंजते रहेंगे।’
आशा का विवाह 16 वर्ष की आयु में 1949 में गणपतराव भोंसले से हुआ था और बाद में उन्होंने अपने सहयोगी एवं संगीतकार आर डी बर्मन से विवाह किया जिनके साथ उनकी लंबी और बेहद सफल संगीत यात्रा रही। ‘मेरा कुछ सामान’ और ‘दम मारो दम’ से लेकर ‘चुरा लिया है तुमने’ और ‘नहीं, नहीं, अभी नहीं’ जैसे शानदार गीतों का यह सिलसिला कैबरे, रोमांस, विरह और हर तरह के भावों से सजा रहा। उनकी आवाज ने कई पीढ़ियों तक भारतीयों के बचपन और युवावस्था की स्मृतियों को संवारा।
लता मंगेशकर ने लेखिका नसरीन मुन्नी कबीर द्वारा लिखी किताब, ‘लता मंगेशकर इन हर ओन वॉयस’ में कहा था, ‘वह हर तरह के गीत बहुत अच्छी तरह गा सकती हैं, दुख भरे गीत, झूमने वाले और कैबरे तक। मैं यह इसलिए नहीं कह रही क्योंकि वह मेरी बहन हैं बल्कि उनकी खूबियों के बारे में बताना मेरा कर्तव्य है। जिस विविधता के गीत वह गा सकती हैं, उसकी बराबरी कोई गायक नहीं कर सकता।’
फिल्म ‘उमराव जान’ में उन्होंने गजल गायकी को एक नया आयाम दिया जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था। आशा के लोकप्रिय गीतों में ‘अभी न जाओ छोड़ कर’, ‘इन आंखों की मस्ती’, ‘दिल चीज क्या है’, ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘दुनिया में लोगों को’ और नए दौर में ‘जरा सा झूम लूं मैं’ जैसे गाने शामिल हैं। उन्होंने पद्मिनी एवं वैजयंतीमाला जैसी दक्षिण भारतीय अभिनेत्रियों से लेकर मीना कुमारी, मधुबाला, जीनत अमान, काजोल और उर्मिला मातोंडकर सहित कई प्रमुख अभिनेत्रियों को अपनी आवाज दी।
आशा ने वर्ष 2023 में अपने जन्मदिन के उपलक्ष्य में दुबई में आयोजित एक विशेष संगीत कार्यक्रम ‘आशा90: लाइव इन कॉन्सर्ट’ में प्रस्तुति दी थी। उनकी आवाज अंत तक गहन ठहराव, लचीलापन और ताजगी लिए रही। उन्होंने आखिरी बार गोरिलाज के एल्बम ‘द माउंटेन’ के लिए अपनी आवाज दी, जिसमें उन्होंने ‘द शैडो लाइट’ गीत गाया। यह गीत 27 फरवरी 2026 को रिलीज हुआ था।
8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में जन्मीं आशा भोसले को उनकी बहन लता की तरह ही उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर ने संगीत की शिक्षा दी थी। संगीत मानों उनकी नियति में ही था। चार बहनों में लता, उषा और आशा पार्श्व गायिका बनीं जबकि मीना संगीतकार हैं। उनके भाई हृदयनाथ मंगेशकर भी संगीतकार हैं। कई पुरस्कारों से सम्मानित आशा भोसले एक सफल उद्यमी भी थीं। उन्होंने दुबई और ब्रिटेन में ‘आशा’ नाम से लोकप्रिय रेस्तरां संचालित किया।