स्वास्थ्य

AI अपनाने में भारत ने दुनिया को पछाड़ा: स्वास्थ्य सेवा के लिए 85% भारतीय कर रहे इस तकनीक का उपयोग

बीसीजी के सर्वे के अनुसार, 85% भारतीयों द्वारा स्वास्थ्य के लिए एआई टूल्स अपनाने के साथ ही भारत इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर सबसे आगे निकल गया है

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अंजलि सिंह   
Last Updated- April 21, 2026 | 10:44 PM IST

बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) के एक नए अध्ययन के अनुसार भारत स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एआई को अपनाने में वैश्विक स्तर पर सबसे आगे निकल गया है। यहां 85 प्रतिशत उपभोक्ता पहले से ही अपने निजी स्वास्थ्य के लिए एआई-आधारित टूल्स का उपयोग कर रहे हैं।  

15 देशों के 13,000 से ज्यादा उपभोक्ताओं के सर्वे पर आधारित यह रिपोर्ट भारत और अमेरिका (50 प्रतिशत),  ब्रिटेन (43 प्रतिशत) और जापान (34 प्रतिशत) जैसे विकसित बाजारों के बीच बड़ा अंतर दिखाती है। दुनिया भर में लगभग 60 फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि वे स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरतों के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं।

यह अध्ययन इस बात पर जोर देता है कि भारत में एआई किस प्रकार तेजी से एक ‘एक्सेस एक्सटेंडर’ के रूप में काम कर रहा है, जो विशेष रूप से नियमित परामर्श घंटों के बाहर, देखभाल की सामर्थ्य, उपलब्धता और पहुंच में अंतर पाटने में मदद कर रहा है।

भारतीय उपभोक्ता लक्षणों की जांच करने, इलाज के विकल्पों को समझने और मेडिकल नतीजों की व्याख्या करने जैसे कामों के लिए संवादी यानी कन्वर्जेशनल एआई टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसे अपनाने का चलन युवाओं में सबसे ज्यादा है। 78 प्रतिशत जेन जेड और 71 प्रतिशत मिलेनियल्स पहले से ही स्वास्थ्य से जुड़े कामों के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं।

यह रिपोर्ट हाइब्रिड हेल्थकेयर मॉडल की दिशा में हो रहे बदलाव की ओर भी इशारा करती है, जहां मरीज सिर्फ डॉक्टरों या मशीनों पर निर्भर रहने के बजाय एआई की मदद से मिलने वाली इंसानी देखभाल को ज्यादा पसंद करते हैं। अभी इसके इस्तेमाल के मुख्य मामले चैटबॉट और पहनने वाले डिवाइस के इर्द-गिर्द ही हैं, लेकिन अब ज्यादा एडवांस ‘एजेंटिक एआई’ की मांग बढ़ रही है, जो अपॉइंटमेंट बुक करने, रेफरल मैनेज करने और दवाओं के संभावित साइड इफेक्ट के खतरों को पहचानने में सक्षम हो।

First Published : April 21, 2026 | 10:15 PM IST