स्वास्थ्य

जनऔषधि योजना का बड़ा असर: सस्ती दवाओं से 11 साल में ₹40,000 करोड़ की बचत

देश भर में जनऔषधि केंद्रों (JAK) की संख्या बढ़ाकर मार्च 2027 तक 25,000 करने का लक्ष्य रखा गया है

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रामवीर सिंह गुर्जर   
Last Updated- March 20, 2026 | 7:01 PM IST

सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) के तहत सस्ती दवाओं की पहुंच तेजी से बढ़ाई जा रही है। देश भर में जनऔषधि केंद्रों (JAK) की संख्या बढ़ाकर मार्च 2027 तक 25,000 करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 28 फरवरी 2026 तक देश में कुल 18,646 जनऔषधि केंद्र संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों के जरिए मिलने वाली जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले 50% से 80% तक सस्ती हैं, जिससे आम लोगों का स्वास्थ्य खर्च काफी कम हुआ है। इन सस्ती दवाओं से मरीजों को हजारों करोड़ रुपये की बचत हुई है।

11 साल में 40,000 करोड़ रुपये की बचत

जनऔषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती दवाएं मुहैया कराई जा रही हैं। जिससे दवा खरीदारों को काफी बचत हो रही है। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में जानकारी दी कि पिछले 11 वर्षों में जनऔषधि उत्पादों के इस्तेमाल से मरीजों के ‘आउट-ऑफ-पॉकेट’ खर्च में करीब 40,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है।

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यह योजना खासतौर पर मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए राहत लेकर आई है। योजना के अंतर्गत उत्पाद सूची में 2,110 दवाएं और 315 शल्य चिकित्सा सामग्री, चिकित्सा उपभोग्य वस्तुएं और उपकरण शामिल हैं, जो हृदय रोग, कैंसर रोधी, मधुमेह रोधी, संक्रमण रोधी, एलर्जी रोधी और पाचन संबंधी दवाएं और पोषक तत्व जैसे सभी प्रमुख चिकित्सीय समूहों को कवर करते हैं। पिछले 5 वर्षों में दवाओं की संख्या 1,654 से बढ़कर 2,425 हो गई है।

संचालकों को भी मिलता आर्थिक प्रोत्साहन

सरकार जनऔषधि केंद्र संचालकों को आर्थिक प्रोत्साहन भी दे रही है। जन औषधि केंद्र संचालकों को फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेज ब्यूरो ऑफ इंडिया (PMBI) से खरीदे गए जनऔषधि उत्पादों की मासिक खरीद पर 10% की दर से प्रोत्साहन दिया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹10,000 प्रति माह है। इसके अलावा 200 से अधिक मांग वाले उत्पादों का आवश्यक स्टॉक बनाए रखने पर भी केंद्र संचालकों को प्रति माह ₹10,000 तक का अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलता है।

साथ ही, पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी क्षेत्रों, द्वीपीय क्षेत्रों और नीति आयोग द्वारा अधिसूचित आकांक्षी जिलों में खोले गए जन औषधि केंद्रों के लिए ₹2 लाख तक का एकमुश्त विशेष प्रोत्साहन दिया जाता है। यह प्रोत्साहन उन उद्यमियों को भी दिया जाता है जो पात्र श्रेणियों में आते हैं, जैसे पूर्व सैनिक, महिलाएं, दिव्यांगजन तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्य।

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गुणवत्ता पर सख्त निगरानी

जन औषधि केंद्रों पर उपलब्ध दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और मरीजों के स्वास्थ्य से कोई समझौता न हो, इसके लिए सरकार ने सतत निरीक्षण, परीक्षण और मानकीकरण की ठोस व्यवस्था लागू की है। दवाओं की आपूर्ति सिर्फ उन्हीं संयंत्रों से की जाती है, जिन्हें केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा प्रत्यक्ष निरीक्षण के बाद WHO-GMP अनुपालन प्रमाणित किया गया हो।

PMBI के गोदामों में प्राप्त दवाओं के सभी बैचों (100%) से नमूने लेकर गुमनाम तरीके से परीक्षण किया जाता है। गुणवत्ता जांच पास होने के बाद ही इन दवाओं को जन औषधि केंद्रों तक भेजा जाता है।

दवाओं के नमूनों का परीक्षण केवल उन प्रयोगशालाओं में किया जाता है, जो राष्ट्रीय परीक्षण और अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL) से मान्यता प्राप्त हों और समय-समय पर निरीक्षित की जाती हों। साथ ही, PMBI द्वारा भी इन लैब्स का गुड लेबोरेटरी प्रैक्टिसेज (GLP) अनुपालन सुनिश्चित किया जाता है।

First Published : March 20, 2026 | 7:01 PM IST