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12 हफ्ते से चढ़ रहे मिडकैप सूचकांकों की रफ्तार थमी

Last Updated- December 11, 2022 | 3:27 PM IST

 एसऐंडपी बीएसई मिडकैप इंडेक्स में लगातार 12 हफ्ते से हो रही बढ़ोतरी पिछले हफ्ते थम गई। जून के निचले स्तर से उबरने के बाद 100 अहम मिडकैप कंपनियों के प्रदर्शन को ट्रैक करने वाला इंडेक्स बिना किसी अवरोध के लगातार 12 हफ्ते तक चढ़ा और उसमें 22 फीसदी की बढ़ोतरी हुई जो अगस्त 2020 के बाद बढ़त की सबसे लंबी अवधि है।
महामारी के बाद बीएसई मिडकैप इंडेक्स लगातार 14 हफ्ते तक चढ़ा था और उसमें 29 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई थी।
यह इंडेक्स 13वें हफ्ते भी बढ़त की राह पर था, लेकिन शुक्रवार को तीन फीसदी की गिरावट ने उसकी बढ़त की राह को अवरोधित कर दिया। पिछले हफ्ते बीएसई मिडकैप इंडेक्स 1.5 फीसदी गिरकर बंद हुआ, लेकिन अभी भी सेंसेक्स के मुकाबले उसका प्रदर्शन उम्दा है, जिसमें 1.6 फीसदी की गिरावट आई।
निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में भी पिछले हफ्ते लगातार 12 हफ्ते हो रही बढ़त थम गई, जो पिछले 15 साल में बढ़त की सबसे लंबी अवधि है। 19 जून से 11 सितंबर के बीच इंडेक्स में 24 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
मिडकैप इंडेक्स की हालिया बढ़ोतरी बेंचमार्क निफ्टी व सेंसेक्स की बढ़ोतरी को प्रतिबिंबित करता है। जून के निचले स्तर के बाद से ज्यादातर शेयरों में इस आशावाद में बढ़ोतरी दर्ज हुई है कि उच्च महंगाई का दौर पीछे छूट गया है और  अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर धीरे-धीरे कदम बढ़ाएगा।
हालांकि अमेरिका में महंगाई के हालिया आंकड़ों ने इन उम्मीदों को धराशायी कर दिया और एक बार फिर बिकवाली का दौर शुरू 
हो गया।
पिछले हफ्ते अमेरिका में एसऐंडपी 500 इंडेक्स 4.8 फीसदी टूटा। ज्यादातर निवेशक अब अगले हफ्ते अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में 75 आधार अंकों की बढ़ोतरी मानकर चल रहा है और कुछ को इसमें 100 फीसदी की बढ़ोतरी की भी आशंका है। फेडरल रिजर्व दो बार ब्याज दरों में 75 आधार अंकों का इजाफा कर चुका है।
वैश्विक बाजारों के हाल में धराशायी होने के दौरान भारतीय बाजारों ने सुदृढ़ता का प्रदर्शन किया है। हालांकि विशेषज्ञों ने  चेतावनी दी है कि भारतीय बाजार अछूते नहीं बने रह सकते हैं, अगर वैश्विक स्तर पर बिकवाली का दबाव गहराता है।
हालिया बढ़ोतरी के बाद निफ्टी मिडकैप 100 अपनी एक साल आगे की अनुमानित आय के करीब 28.3 गुने पर कारोबार कर रहा है, जो जून में 19 गुना था। मूल्यांकन में  विस्तार निफ्टी के मुकाबले काफी ज्यादा रहा है, जो अब 20.3 गुने  पर उपलब्ध है, जो जून में 17.4 गुना था।
स्वतंत्र बाजार विश्लेषक अजय बोडके ने कहा, आदर्श तौर पर निवेशकों  को मिडकैप सूचकांकों की तुलना लार्जकैप मसलन निफ्टी से करनी चाहिए। मिडकैप में लार्जकैप के मुकाबले छूट पर ट्रेड की प्रवृत्ति होती है। जब अत्यधिक उत्साह होता है तो छूट और कम होनी शुरू हो जाती है और मिडकैप का कारोबार लार्जकैप के मुकाबले प्री​मियम पर होना चालू हो जाता है।
इसके अलावा निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में निफ्टी 50 इंडेक्स के मुकाबले ज्यादा बढ़ोतरी व गिरावट की प्रवृत्ति होती है। 
 

First Published - September 18, 2022 | 9:48 PM IST

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