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तेल की कीमतों में उछाल से रुपये में बड़ी गिरावट

Last Updated- December 11, 2022 | 2:16 PM IST

डॉलर के मुकाबले रुपया सोमवार को तेजी से फिसला क्योंकि पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन ओपेक व उसके सहायकों की तरफ से उत्पादन में कटौती की खबर से कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज हुई। डीलरों ने यह जानकारी दी।
डॉलर के मुकाबले रुपया 81.88 पर बंद हुआ, जो इससे पहले 81.35 पर बंद हुआ था। साल 2022 में अब तक डॉलर के मुकाबले रुपया 9.2 फीसदी कमजोर हो चुका है। कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया 81.93 के निचले स्तर को छू गया था, जो पिछले हफ्ते के रिकॉर्ड निचले स्तर 81.95 से थोड़ा ही नीचे रहा।
सोमवार को सरकारी बॉन्ड पर भी चोट पड़ी क्योंकि तेल की कीमतों में मजबूती ने भारत की महंगाई को लेकर चिंता पैदा की। इसकी वजह यह है कि भारत इस जिंस का बड़े पैमाने पर आयात करता है। 10 वर्षीय बेंचमार्क बॉन्ड का प्रतिफल 7 आधार अंक बढ़कर 7.47 फीसदी पर बंद हुआ। बॉन्ड की कीमतें व प्रतिफल एक दूसरे के विपरीत दिशा में चलते हैं।
डीलरों ने कहा, वैश्विक सूचकांकों में भारत के बॉन्ड को शामिल करने को लेकर घोषणा न होने से भी बॉन्ड पर असर पड़ा। इसकी घोषणा सितंबर में होने की उम्मीद थी, जो एक साल में करीब 30 अरब डॉलर का निवेश ला सकता है।
उत्पादन में कटौती के कयास से ब्रेंट क्रूड सोमवार को 3 फीसदी चढ़ गया और आयातक डॉलर की खरीद की ओर बढ़े क्योंकि उन्हें तेल की कीमतों में तीव्र बढ़ोतरी का डर सता रहा है। डीलरों ने कहा, इससे रुपये की गिरावट और तेज हो गई। 
ओपेक बुधवार को वैश्विक उत्पादन को लेकर बैठक आयोजित कर रहा है। सबसे ज्यादा सक्रिय ब्रेंट क्रूड वायदा अनुबंध करीब 88 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
एचडीएफसी बैंक के कार्यकारी उपाध्यक्ष (ओवरसीज ट्रेजरी) भास्कर पांडा ने कहा, वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें ओपेक व सहयोगी की तरफ से उत्पादन कटौती को लेकर होने वाली बैठक से बढ़ी। इसने डॉलर-रुपये पर दबाव बढ़ा दिया क्योंकि आयातकों ने हेजिंग की।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से 21 सितंबर को मौद्रिक नीति का चक्र उम्मीद से लंबा चलने के संकेत के बाद से ही रुपये में काफी उतारचढ़ाव देखने को मिल रहा है। तब से देसी मुद्रा डॉलर के मुकाबले 2.3 फीसदी कमजोर हो चुकी है।
डीलरों ने कहा, अमेरिका में ब्याज दर ज्यादा होने से वैश्विक फंड दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की ओर जा रहे हैं और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय इक्विटी में शुद्ध बिकवाल बन गए हैं, ऐसे में रुपये की गिरावट और गहरा रही है। डीलरों ने कहा, पिछले हफ्ते से अब तक एफपीआई करीब 2.5 अरब डॉलर की बिकवाली कर चुके हैं। विदेशी निवेशक जुलाई में करीब नौ महीने बाद अंतत: शुद्ध‍ खरीदार बने थे।

First Published - October 3, 2022 | 10:50 PM IST

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