घरेलू और वैश्विक दोनों मोर्चों पर कमजोर आर्थिक आंकड़ों से आर्थिक परिदृश्य पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। इसी चिंता में शेयर बाजारों में आज जबरदस्त गिरावट आई। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की आशंका और डॉलर में मजबूती के बीच निवेशकों की चिंता बढ़ गई जिससे भारी बिकवाली के बीच शेयर बाजारों में पिछले तीन महीनों की सर्वाधिक एक दिवसीय गिरावट दर्ज की गई।
बीएसई सेंसेक्स 1,093 अंक यानी 1.8 फीसदी की गिरावट के साथ 58,841 अंक पर बंद हुआ। जबकि एनएसई निफ्टी 346 अंक यानी 1.9 फीसदी की गिरावट के साथ 17,531 अंक पर बंद हुआ। यह 16 जून के बाद सर्वाधिक एक दिवसीय गिरावट है। सप्ताह के दौरान दोनों सूचकांकों में करीब 1.7 फीसदी की गिरावट आई जो 19 जून को समाप्त सप्ताह के बाद सर्वाधिक गिरावट है।
विशेषज्ञों का कहना है कि फेडरल रिजर्व मुद्रास्फीति के ताजा आंकड़ों को देखते हुए नीतिगत दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। अमेरिकी रोजगार आंकड़े भी उम्मीद से कहीं अधिक है और इससे भी फेडरल रिजर्व आक्रामक मौद्रिक सख्ती के लिए प्रेरित होगा। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने आज 3,260 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की। पिछले दो कारोबारी सत्रों में एफपीआई ने 2,053 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की थी।
एवेंडस कैपिटल अल्टरनेट स्ट्रैटजीज के मुख्य कार्याधिकारी एंड्रयू हॉलैंड ने कहा, ‘फेडरल रिजर्व का मुद्रास्फीति लक्ष्य 2 फीसदी है। वहां तक पहुंचने के लिए दरों में लगातार बढ़ोतरी करनी पड़ेगी। फेडरल रिजर्व के नजरिये में बदलाव के लिए मुद्रास्फीति में गिरावट आवश्यक है।’ उन्होंने कहा कि फेडएक्स की ओर से जारी अनुमान ताबूत में आखिरी कील साबित होगा।
प्रमुख डिलिवरी कंपनी फेडएक्स ने एशिया एवं यूरो में मंदी के मद्देनजर अपने आय अनुमान में कमी की है। उसने आगे कारोबारी परिस्थितियों के कहीं अधिक खराब होने की आशंका जताई है।
वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच द्वारा भारत की आर्थिक वृद्धि संबंधी अनुमान को घटाए जाने से भी निवेशकों की चिंता बढ़ गई। फिच ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि के अनुमान को घटाकर 7 फीसदी कर दिया जो पहले 7.8 फीसदी था। उसने अगले वित्त वर्ष यानी 2023-24 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि अनुमान को 7.4 फीसदी से घटाकर 6.7 फीसदी कर दिया है।
अमेरिकी नीतिगत दरों में वृद्धि की आशंका और कमजोर आर्थिक परिदृश्य के कारण अमेरिकी डॉलर एवं अन्य सुरक्षित परिसंपतियों के प्रति निवेशकों का रुझान बढ़ा है। यही कारण है कि पिछले तीन कारोबारी सत्रों में रुपये के मुकाबले डॉलर में 0.7 फीसदी की तेजी आई है।
ऐंबिट ऐसेट मैनेजमेंट के फंड मैनेजर ऐश्वर्य दाधीच ने कहा, ‘निवेशकों को अगले सप्ताह नीतिगत दरों के आक्रामक वृद्धि दिखने की आशंका है। करीब एक तिहाई बाजार प्रतिभागियों ने फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में 100 आधार अंकों की वृद्धि किए जाने की बात कही जबकि 75 आधार अंकों की वृद्धि कम रहेगी।’