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आईपीओ आ रहे बड़े-बड़े तो निवेश बैंकरों के तेवर चढ़े

Last Updated- December 11, 2022 | 3:40 PM IST

 आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाकर बाजार में सूचीबद्ध होने की इच्छुक कंपनियां जितनी बढ़ती जा रही हैं, बड़े निवेश बैंकों के तेवर भी उतने ही चढ़ते जा रहे हैं। अब वे छोटे आईपीओ लाने वाली कंपनियों के बजाय बड़े आईपीओ अपने हाथ में लेना पसंद कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि 1,000 करोड़ रुपये से कम का आईपीओ हो तो बैंक उसे लेने से पहले बहुत सोच रहे हैं। इनमें घरेलू और विदेशी दोनों निवेश बैंक शामिल हैं। वे छोटे आईपीओ लेने के बजाय बड़े आईपीओ का इंतजार करना बेहतर मान रहे हैं। 
सूत्रों का कहना है कि बड़े निवेश बैंकों का यह रवैया शीर्ष 10 बैंकों की सूची से बाहर के निवेश बैंकों के लिए मौके बढ़ा रहा है। प्राइम डेटाबेस के अनुसार इस साल अब तक 60 से अधिक कंपनियों ने कुल 82,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास अपने आईपीओ के मसौदे जमा कराए हैं। इनमें से करीब 60 फीसदी कंपनियां 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचने की योजना बना रही हैं।
हालांकि हाल के महीनों में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच आईपीओ की आवक सुस्त पड़ी है मगर बाजार नियामक के पास आईपीओ का मसौदा जमा कराने की रफ्तार लगातार दमदार बनी हुई है। बड़े निवेश बैंकों के अधिकारियों का कहना है कि आईपीओ की तादाद बढ़ने से उनका काम भी बढ़ गया है। ऐसे में वे अपनी मेहनत बड़े सौदों में लगा रहे हैं।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के कार्यकारी निदेशक अजय सराफ ने कहा, ‘हमें सौदों की संख्या अपनी टीम का आकार देखकर तय करनी होगी। हर सौदे के साथ न्याय करना होगी। इस साल कुछ महीनों से बाजार की स्थिति अनुकूल नहीं है और अटके हुए कई सौदे निपटाने हैं।’ आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज 2021 में इक्विटी पूंजी बाजार (ईसीएम) लीग की सूची में शीर्ष पायदान पर रही थी।
आमतौर पर निवेश बैंकों को किसी भी सौदे के लिए जरूरी काम निपटान के एवज में जुटी रकम का कुछ हिस्सा दिया जाता है। बड़े सौदों के लिए बड़े बैंकों को ही तरजीह दी जाती है क्योंकि उनका बहीखाता बड़ा होता है और बड़े संस्थागत निवेशकों तक उनकी पहुंच होती है। बड़े निवेश बैंकों के इस रुझान से छोटे निवेश बैंकों को मौके मिलना तय है। इसलिए कई छोटे निवेश बैंक अपनी निवेश बैंकिंग टीमें मजबूत कर रहे हैं और उन सौदों को हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं जो बड़े निवेश बैंकों के पास जा सकते थे। अपेक्षाकृत नए निवेश बैंक डैम कैपिटल एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी धर्मेश मेहता ने कहा, ‘निवेश बैंकिंग कुल मिलाकर भरोसा, संबंध और सही सलाह देने का मामला है। बड़े बैंक सभी ग्राहकों को ऐसी सेवाएं नहीं दे सकते। आईपीओ के साथ पूंजी बाजार में उतरने वाली कंपनियां मौजूदा उथल-पुथल के माहौल में इन बातों को बहुत तवज्जो देती हैं। पिछले साल हमने 10 आईपीओ के लिए काम किया और इस साल हम 20 आईपीओ के लिए करार कर चुके हैं। इसके अलावा ब्लॉक डील, क्यूआईपी और बड़े विलय एवं अधिग्रहण सौदे भी हैं।’
उद्योग प्रतिभागियों का कहना है कि बड़े बैंकों के बजाय आईपीओ छोटे बैंकों की ओर जाने का चलन और बढ़ेगा। उदाहरण के लिए हाल में हवाई अड्डा सेवा एग्रीगेटर ड्रीमफोक्स सर्विसेज का आईपीओ मोतीलाल ओसवाल इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स और इक्विरस कैपिटल ने संभाला था। सिरमा टेक्नोलॉजिज के आईपीओ में प्रमुख निवेश बैंक डैम कैपिटल एडवाइजर्स था। पिछले महीने एयू स्मॉल फाइनैंस बैंक के 2,000 करोड़ रुपये के पात्र संस्थागत निवेश (क्यूआईपी) के लिए प्रमुख प्रबंधक के तौर पर अवेंडस कैपिटल ने काम किया।
 

First Published - September 12, 2022 | 10:00 PM IST

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