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शॉर्ट कवरिंग से ​फिसला बॉन्ड प्रतिफल

Last Updated- December 11, 2022 | 2:50 PM IST

10 वर्षीय बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल मंगलवार को 7 आधार अंक घटकर बंद हुआ क्योंकि कुछ ट्रेडरों ने शॉर्ट पोजीशन कवर की और  बाजार को वैश्विक सूचकांकों में भारतीय सॉवरिन बॉन्ड के शामिल होने की उम्मीद अभी भी है। डीलरों ने यह जानकारी दी। 

इस बीच, अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपये की विनिमय दर मंगलवार को नौ पैसे चढ़कर 81.58 प्रति डॉलर पर पहुंच गई। वैश्विक बाजारों में अमेरिकी मुद्रा के ऊंचे स्तर से उतरने के बाद रुपये में मजबूती आई है। 10 वर्षीय बॉन्ड 7.29 फीसदी पर बंद हुआ जबकि यह सोमवार को 7.36 फीसदी पर बंद हुआ था। बॉन्ड की कीमतें तब बढ़ती हैं जब प्रतिफल घटता है और बॉन्ड की कीमतें घटती हैं तो प्रतिफल बढ़ता है।
सूत्रों के हवाले से मीडिया की खबरों में कहा गया है कि देसी बॉन्डों का जेपी मॉर्गन इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स में शामिल किए जाने का मामला अगले साल पर टल गया है। उधर ट्रेड एफटीएसई रसेल इंडेक्स की समीक्षा की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो गुरुवार को होनी है। एफटीएसई रसेल उन सूचकांकों में शामिल है, जिसने भारतीय बॉन्डों को संभावित तौर पर शामिल करने की खातिर उसे निगरानी सूची में रखा था।
सूचकांक प्रदाता मोटे तौर पर अपनी समीक्षा सितंबर के आखिर में पूरी करते हैं। भारतीय बॉन्ड को वैश्विक सूचकांकों में शामिल किए जाने को खासी पूंजी आकर्षित करने के तौर पर देखा जा रहा है। पिछले महीने एक रिपोर्ट में गोल्डमैन सैक्स ने अनुमान लगाया था कि भारतीय डेट को इंडेक्स में शामिल किए जाने से करीब 30 अरब डॉलर का निवेश आ सकता है।
इतना बड़ा निवेश बॉन्ड बाजार की मांग-आपूर्ति के डायनैमिक्स में  सुधार लाएगा और भारत सरकार का राजकोषीय घाटे को भी सहारा देगा।
मंगलवार को 10 वर्षीय बॉन्ड की कीमतें करीब 50 पैसे बढ़ी, जिसके बारे में डीलरों ने कहा कि काफी हद तक इसकी वजह तकनीकी है। कुछ ट्रेडर पुराने दांव की बिकवाली की ओर बढ़े क्योंकि अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल में कारोबारी सत्र के दौरान गिरावट से कीमतों को सहारा मिला। 
तीन साल के उच्चस्तर के पास कॉल रेट
मंगलवार को इंटरबैंक कॉल मनी रेट 5.20 फीसदी पर बंद हुआ, जो 4 अक्टूबर, 2019 के बाद का उच्चस्तर है क्योंकि बैंकिंग व्यवस्था में नकदी पिछले कुछ दिनों में काफी ज्यादा कम हुई हैं।
भारांकित औसत कॉल रेट 5.44 फीसदी पर टिका और पिछले हफ्ते के बाद यह चौथा मौका है जब कॉल दरें मौजूदा रीपो दर  5.40 फीसदी से ऊपर बंद हुई।
पिछले हफ्ते से पहले भारांकित औसत कॉल दरें तीन साल  तक रीपो दरों से नीचे बनी रही थी। भारांकित औसत कॉल दरें आरबीआई की मौद्रिक नीति का ऑपरेटिंग टार्गेट है। घटती नकदी ने बैंकों पर जमा दरें बढ़ाने का दबाव बनाया है ताकि वह रकम जुटा सके।
20 सितंबर को बैंकिंग व्यवस्था की नकदी मई 2019 के बाद पहली बार कम हो गई। 20 सितंबर को यह कमी करीब 20,000 करोड़ रुपये की थी। अनुमान है कि मौजूदा समय में नकदी के मामले में बैंकिंग व्यवस्था तटस्थ है।

First Published - September 27, 2022 | 10:37 PM IST

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