सरकारी बॉन्डों पर प्रतिफल सोमवार को नीचे आ गया क्योंकि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक की ताजा रिपोर्ट में आगे दरों में धीरे-धीरे वृद्धि किए जाने के संकेत दिए गए हैं। 28-30 सितंबर को हुई एमपीसी की बैठक की रिपोर्ट हाल में जारी हुई है। 10-वर्षीय बेंचमार्क बॉन्ड प्रतिफल मंगलवार को सात आधार अंक घटकर 7.40 फीसदी पर बंद हुआ था।
एक वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल 14 आधार अंक गिरकर 6.78 फीसदी पर बंद हुआ। अल्पावधि बॉन्ड प्रतिफल का संबंध अल्पावधि ब्याज दर की संभावनाओं से है। मंगलवार को, एक वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल ने 1 अगस्त के बाद से एक दिन की अपनी सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की थी।
1 अगस्त को प्रतिफल में 30 आधार अंक की गिरावट आई थी। 1 वर्षीय और 10 वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल के बीच अंतर मौजूदा समय में 62 आधार अंक का है। शुक्रवार को यह अंतर 55 आधार अंक पर दर्ज किया गया था, जिससे दीर्घावधि प्रतिफल के मुकाबले अल्पावधि बॉन्ड प्रतिफल में तेज वृद्धि का पता चलता है।
सरकारी बॉन्डों पर प्रतिफल सोमवार को नीचे आ गया, क्योंकि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की 28-30 सितंबर को हुई बैठक की हाल में जारी रिपोर्ट में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा भविष्य में धीमी रफ्तार से दर वृद्धि किए जाने का संकेत दिया गया है। जब बॉन्ड कीमतों में तेजी आती है तो प्रतिफल नीचे आता है।
10-वर्षीय बेंचमार्क बॉन्ड प्रतिफल मंगलवार को सात आधार अंक घटकर 7.40 प्रतिशत पर बंद हुआ था। एक वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल 14 आधार अंक गिरकर 6.78 प्रतिशत पर बंद हुआ। अल्पावधि बॉन्ड प्रतिफल का संबंध अल्पावधि ब्याज दर की संभावनाओं से है।
मंगलवार को, एक वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल ने 1 अगस्त के बाद से एक दिन की अपनी सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की थी। 1 अगस्त को प्रतिफल में 30 आधार अंक की गिरावट आई थी। 1 वर्षीय और 10 वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल के बीच अंतर मौजूदा समय में 62 आधार अंक का है।
शुक्रवार को यह अंतर 55 आधार अंक पर दर्ज किया गया था, जिससे दीर्घावधि प्रतिफल के मुकाबले अल्पावधि बॉन्ड प्रतिफल में तेज वृद्धि का पता चलता है। सॉवरिन बॉन्ड प्रतिफल विभिन्न ऋण उत्पादों के मूल्य निर्धारण के लिए बेंचमार्क हैं।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज प्राइमरी डीलरशिप में ट्रेडिंग प्रमुख नवीन सिंह ने बिजनेस स्टैंडड्र को बताया, ‘प्रतिफल चक्र गहरा हुआ है, क्योंकि अल्पावधि बॉन्ड प्रतिफल में कमी आई है। ताजा रिपोर्ट के बाद नवंबर में होने वाली नीतिगत दरों में ज्यादा वृद्धि होने की आशंका घटी है।’
उन्होंने कहा, ‘प्रतिफल की राह पिछले महीनों के दौरान काफी हद तक सपाट बनी रही, क्योंकि अल्पावधि बॉन्डों में फेडरल के आक्रामक रुख के अनुरूप तेज दर वृद्धि का असर दिखा था। अब इसमें बदलाव आया है।’
आरबीआई ने एमपीसी की 28-30 सितंबर को हुई बैठक की रिपोर्ट शुक्रवार को बाजार बंद होने के बाद जारी की। रिपोर्ट में कहा गया कि 6 सदस्यीय समिति के दो सदस्यों – आशिमा गोयल और जयंत वर्मा ने ब्याज दर वृद्धि पर लगाम लगाने के पक्ष में अपनी सहमति जताई थी।
गोयल इस समिति की ऐसी एकमात्र सदस्य हैं जिन्होंने दर वृद्धि की मात्रा पर असहमति जताई थी और वह अन्य सदस्यों द्वारा 50 आधार अंक की वृद्धि के खिलाफ 35 आधार अंक वृद्धि के पक्ष में थीं। वहीं वर्मा ने केंद्रीय बैंक द्वारा सख्ती बढ़ाए जाने के बजाय नरमी बरतने का सुझाव दिया।
गोयल के अनुसार, भारत की वास्तविक ब्याज दर मौजूदा हालात में एक प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। एमपीसी के मुद्रास्फीति अनुमानों को देखते हुए और ज्यादा दर वृद्धि की कम गुंजादश दिख रही है।