भारतीय कार निर्माताओं ने ब्रिटेन के साथ व्यापार सौदे के तहत आयातित कारों पर कर दर घटाकर 30 प्रतिशत करने की मांग की है। इस घटनाक्रम से अवगत सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि कर दर घटने से दुनिया के बेहद सुरक्षित वाहन बाजारों में से एक तक पहुंच आसान हो सकेगी। यह पहली बार है जब भारतीय कार निर्माताओं ने इस तरह की कटौती पर जोर दिया है। दुनिया के चौथे सबसे बड़े कार बाजार में आयात कर 60 प्रतिशत से 100 प्रतिशत है जो दुनिया में सर्वाधिक कर दरों में शामिल है, जिस वजह से टेस्ला इंक. जैसी कंपनियों ने इसकी आलोचना की है। टेस्ला ऊंचे कर की वजह से अपनी कुछ योजनाओं पर विराम लगा चुकी है।
पहचान गुप्त रखे जाने के अनुरोध के साथ सूत्रों ने बताया कि भारतीय वाहन निर्माताओं के संगठन सायम ने सरकार को पत्र लिखकर कर घटाकर पांच साल में 30 प्रतिशत किए जाने और उसके बाद की पांच वर्ष की छूट अवधि में इसे समाप्त करने की मांग की है। सायम ने इस बारे में पूछे गए सवाल पर फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है। इन व्यापार वार्ताओं की अगुआई कर रहे वाणिज्य मंत्रालय से भी इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
कई वर्षों से भारतीय कार निर्माताओं ने कर कटौती की मांग की थी और तर्क दिया था कि आयात सस्ता होने और वैश्विक वाहन निर्माताओं की राह आसान होने से घरेलू निर्माण में निवेश घट जाएगा। सूत्रों का कहना है कि हालांकि ब्रिटेन में निसान, बीएमडब्ल्यू और टाटा की जगुआर लैंड रोवर जैसे ब्रांडों द्वारा कुछ कार संयंत्र संचालित किए जाते हैं, लेकिन कंपनियों को आशंका है कि नया कदम यूरोपीय यूनियन, जापान या दक्षिण कोरिया जैसे अन्य क्षेत्रों के साथ बातचीत की गुंजाइश पैदा कर सकता है। कुछ सप्ताह पहले ही वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने मारुति सुजूकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा के वरिष्ठ अधिकारियों को बताया था कि भारत को वाहनों के संबंध में ब्रिटेन को कुछ पेशकश करने की जरूरत है।
मंत्री और कंपनी अधिकारियों के बीच अगस्त में हुई बैठक में शामिल एक अधिकारी ने कहा, ‘गोयल का संदेश स्पष्ट था कि यदि कंपनियां कर घटाने के प्रस्ताव पर आगे नहीं बढ़ती हैं तो सरकार उनके लिए ऐसा करेगी।’
एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि हालांकि 10 वर्षों के दौरान कर दर घटाकर 30 प्रतिशत करना पर्याप्त नहीं है, लेकिन उन्होंने यह स्वीकार किया कि कर दर नहीं घटाना इस बार विकल्प नहीं था।