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ऑटो कंपोनेंट उद्योग की सहायता के लिए आगे आई CBIC

Last Updated- December 11, 2022 | 2:06 PM IST

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) द्वारा HSN (Harmonised System of Nomenclature/ नामकरण की संगत प्रणाली) कोड के आधार पर वस्तुओं (goods) के वर्गीकरण (classification) पर स्पष्टीकरण दिए जाने के बाद ऑटो कंपोनेंट उद्योग अब राहत महसूस कर सकता है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मुद्दे पर वित्त मंत्रालय द्वारा दायर एक समीक्षा याचिका को खारिज करने के बाद उद्योग चिंतित था। यह मामला मूल रूप से उत्पाद शुल्क (excise duty) से संबंधित है लेकिन इसका सीमा शुल्क (customs duty) और वस्तु एवं सेवा कर (GST) पर भी प्रभाव पड़ता है।
असल मामला क्या है
मूल मामला रेलवे में इस्तेमाल होने वाले रिले (relays) के वर्गीकरण (classification) से जुड़ा है। एचएसएन कोड में, कभी-कभी कुछ अध्यायों (chapters) में कुछ वस्तुओं को शामिल नहीं किया जाता है । उदाहरण के लिए अध्याय 85 (दो अंक एचएसएन कोड के तहत अध्यायों को संदर्भित करते हैं) रिले सहित इलेक्ट्रिक सर्किट को चालू या संरक्षित करने के लिए विद्युत उपकरण को कवर करता है। अध्याय 86 में रेलवे या रेलवे लोकोमोटिव या रोलिंग स्टॉक के कुछ हिस्सों को शामिल किया गया है। यहीं पर exclusion को लेकर एक नोट है, जो कहता है कि अध्याय 85 के तहत आने वाले सामान को 86 के तहत कवर नहीं किया जाएगा, भले ही रेलवे के लिए इस्तेमाल किया गया हो।
उत्पाद शुल्क की दर अध्याय 85 के तहत उत्पादों पर अध्याय 86 के तहत उन उत्पादों की तुलना में अधिक थी।  westinghouse saxby farmer   मामले के सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने तक वर्गीकरण का यह तय सिद्धांत था। कोर्ट ने मार्च 2021 में फैसला सुनाया कि रिले अध्याय 86 के तहत आएंगे क्योंकि ये मुख्य रूप से इस मामले में रेलवे में उपयोग किए जाते हैं।
इस फैसले से कंपनी को फायदा हुआ। हालांकि यह अन्य उद्योगों के खिलाफ था। मान लीजिए आंतरिक दहन (आईसी) इंजन जैसे कई उच्च मूल्य वाले ऑटो घटक अध्याय 84 और 85 के अंतर्गत आते हैं और ऑटो अध्याय 87 के अंतर्गत आते हैं। अब मूल सीमा शुल्क/ basic customs duty (बीसीडी) अध्याय 84 और 85 और ऊपर के तहत माल के लिए 7.5-10 फीसदी है, जबकि अध्याय 87 के तहत उन लोगों के लिए 15 फीसदी है।

इसी तरह अध्याय 84 और 85 के तहत वस्तुओं के लिए जीएसटी दर 18 फीसदी है, यदि ये सामान अध्याय 87 के अंतर्गत आते हैं तो यह 28 फीसदी है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ऑटो कंपोनेंट उद्योग को इन घटकों के लिए 15 फीसदी बीसीडी और 28 फीसदी जीएसटी का भुगतान करना होगा। यदि exclusion के सिद्धांत को लागू किया जाता है तो उद्योग इन घटकों के लिए 7.5-10 फीसदी बीसीडी और 18 फीसदी जीएसटी का भुगतान करेगा।

इस बीच सीबीआईसी ने समस्या को स्वीकार किया और जनवरी 2022 में एक निर्देश जारी किया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला मामला विशिष्ट था और इसे आम तौर पर लागू नहीं किया जा सकता है। इसने पहले के उन फैसलों का हवाला दिया जो westinghouse saxby farmer मामले में अपनी बात रखने के लिए नहीं आए थे। हालांकि सीबीआईसी का निर्देश सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ओवरराइड नहीं कर सकता। इस पर काबू पाने के लिए वित्त मंत्रालय के तहत राजस्व विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में एक समीक्षा याचिका दायर की। कोर्ट ने हाल ही में याचिका खारिज कर दी थी।
इसने ऑटो कंपोनेंट उद्योग विशेष रूप से ऑटो कंपोनेंट्स में भ्रम पैदा कर दिया था कि उनका माल (goods) भी अध्याय 87 में चला जाएगा और इसका मतलब उनके लिए उच्च कर होगा। सीबीआईसी ने मामले पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से परामर्श किया। उनकी राय प्राप्त करने के बाद बोर्ड ने स्पष्ट किया कि उनका निर्देश वैध है और इसमें किसी बदलाव की आवश्यकता नहीं है।

यह विशेषज्ञों और उद्योग के साथ अच्छी तरह से नीचे चला गया है। ईवाई (EY) में टैक्स पार्टनर सौरभ अग्रवाल कहते हैं, ‘सीबीआईसी द्वारा जारी निर्देश उद्योग की मांग के अनुरूप है और इससे विभाग और उद्योग के बीच मुकदमेबाजी को कम करने में मदद मिलेगी।’

First Published - October 5, 2022 | 4:40 PM IST

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